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किताबें कुछ कहना चाहती हैं – सफदर हाश्मी

2 जनवरी 1989 सफदर की सहादत पर

January 2, 2018 9:11 am by: Category: इतिहास खास Leave a comment A+ / A-

किताबें कुछ कहना चाहती हैं – सफदर हाश्मी

किताबें करती हैं बातें
बीते ज़मानों की
दुनिया की, इंसानों की
आज की, कल की
एक-एक पल की
ख़ुशियों की, ग़मों की
फूलों की, बमों की
जीत की, हार की
प्यार की, मार की
क्या तुम नहीं सुनोगे
इन किताबों की बातें?
किताबें कुछ कहना चाहती हैं।
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं॥

किताबों में चिड़िया चहचहाती हैं
किताबों में खेतियाँ लहलहाती हैं
किताबों में झरने गुनगुनाते हैं
परियों के किस्से सुनाते हैं

किताबों में राकेट का राज़ है
किताबों में साइंस की आवाज़ है
किताबों में कितना बड़ा संसार है
किताबों में ज्ञान की भरमार है
क्या तुम इस संसार में
नहीं जाना चाहोगे?

किताबें कुछ कहना चाहती हैं।
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं॥

∼ सफ़दर हाश्मी

(इतनी मायने ख़ेज़ और सुन्दर कविता रचने वाले सफ़दर हाश्मी की ग़ाज़ियाबाद के साहिबाबाद में 2 जनवरी 1989 को कांग्रेस के राजनैतिक लठैतों ने निर्धन मज़दूरों को जागरूक करने और उनके अधिकारों की आवाज़ उठाने के लिए हल्ला बोल नामक नुक्कड़ नाटक करते समय पीट पीटकर हत्या कर दी थी।

भाजपा ही नहीं कांग्रेस के किले की नींव में भी अनेक बौद्धिक, तर्कवादियों और आंदोलनकारियो की हड्डियां दफ़न हैं।

खैर आप व्यक्ति को मार सकते हो, उसके विचार को नहीं, सफ़दर की विचारधारा आज भी जिंदा है, 28 वर्ष बाद भी। सफ़दर का विचार ज़िंदा है। )

Khushbu Srivastava कि फेसबुक से….

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