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गुड़गांव – गुरुग्राम – नाम में क्या रखा है

April 17, 2016 12:10 pm by: Category: खबर खास 1 Comment A+ / A-

शेक्सपियर के कथन नाम में क्या रखा है का जवाब ढ़ूढने की जरुर कोशिश करनी चाहिये। नाम में बहुत कुछ रखा होता है। जैसे नाम में धर्म रखा होता है नाम में संस्कृति रखी होती है किसी किसी नाम में शोषण, अत्याचार और दमन भी रखा होता है, किसी नाम में धमाका रखा होता है, किसी नाम में घृणा भी रखी होती है। किसी नाम में तहजीब रखी होती। नाम में लगाव रखा होता है सबसे बड़ी और अहम बात नाम में पहचान रखी होती है। बड़ी मुश्किल से गुड़गांव अपनी पहचान बना पाया था और एक वर्ग के लिये अन्याय और घृणा के अहसास से पिछा छुटा पाया था लेकिन हरियाणा सरकार ने फिर से उसी नाम को थोपकर एक और अन्याय की शुरुआत कर दी। क्या सरकार के पास गुड़गांव को गुरुग्राम घोषित करने का कोई सपष्ट औचित्य है।

अच्छे भले गुड़गांव को इतने साल लग गये साइबर, मैट्रो और मिलेनियम सिटी बनने में हालांकि गुड़गांव गांव भी है लेकिन उसे तो दूध से मक्खी की तरह निकाल ही दिया है वह तो जो साइबर और मिलेनियम सीटी को बना रहे हैं चला रहे हैं उन मजदूरों के खाने सोने और मरने की जगह भर दिखाई देता है। एक और कुछ दिन पहले सरकार गुड़गांव को स्मार्ट सिटी बनाने की जद्दोजहद करती दिखाई दे रहे थे, गुड़गांव से सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत भी पहल करते दिख रहे थे लेकिन अचानक सरकार ने गुड़गांव को गुरुग्राम घोषित कर दिया। क्या यह सरकार का विरोधाभासी कदम नहीं माना जाना चाहिये। खैर ये अलग बाद है चुटकला भी चल रहा है कि कोई किसी क्षेत्र के विकास की मांग करे तो उसका उठाकर नाम ही बदल दो लोग संतुष्ट हो जायेंगें। हालांकि गुड़गांव की तुलना में गुरुग्राम कुछ हल्का सा नाम लग रहा है। हरियाणावासी तो इसे गुड़गाम्मा के नाम से ही पुकारते हैं और आगे भी यही पुकारते रहेंगें।

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शोषण की गाथा कहता है गुरुग्राम

गुरु द्रोणाचार्य के नाम पर यह शहर पड़ा इसका पौराणिक इतिहास भी सोचने समझने पढ़ने लिखने वाले के लिये किसी लिहाज से अनुकरणीय नहीं कहा जा सकता। पहली बात तो द्रोणाचार्य ने गुरु की गरिमा का पालन नहीं किया और जिसे विद्या देने का श्रेय भी उन्हें नहीं था लेकिन एकलव्य ने उन्हें गुरु मानकर गलती कर ली और खामियाजा द्रोणाचार्य अंगूठा लेने से रत्ती भर भी नहीं हिचके। आज तक एक वर्ग द्रोणाचार्य को गुरु के नाम पर गाली समान मानता है। मान्यता है कि द्रोणाचार्य इसी भूमि पर कौरव-पांडवों को शस्त्र विद्या का ज्ञान देते थे। वहीं दूसरी कथा यहां जुड़े शीतला मंदिर से भी जुड़ी है शहर से तो जुड़ी ही है। माना जाता है कि द्रोणाचार्य अश्वत्थामा की मौत की खबर सुनने के बाद पुत्र मोह में हथियार छोड़ चुके थे तभी उनकी हत्या कर दी गई। उसके बाद गुड़गांव की ही इस धरती पर उनकी पत्नी द्रोणाचार्य की चिता से साथ सती हो गई। सती प्रथा जैसी अमानवीय प्रथा कब की बंद हो चुकी है लेकिन इस अमानवीय प्रथा को गौरवान्वित बताते हुए कुछ कर्मकांडी धार्मिक पाखंडी आज भी सतियों के मंदिर बनाकर उनकी पूजा कर रहे हैं और महीनों तक मेले चलते हैं करोड़ों अरबों की कमाई करते हैं।

गुड़गांव से गुरुग्राम करने का आर्थिक नुक्सान

सरकार को कोई नई ग्रांट या बजट प्रावधान करना है तो मुझे लगता है गुड़गांव के नाम में भी कोई दिक्कत नहीं होती लेकिन हां गुरुग्राम करने से उसे आर्थिक नुक्सान जरुर उठाना पड़ेगा। जिन सूचना पट्टों पर गुड़गांव नाम अंकित है उसकी लिपाई पुताई कर वहां गुरुग्राम करना होगा। जिन सरकारी विभागों में उनके दस्तावेजों मोहरों आदि में गुड़गांव का नाम है उसे भी गुरुग्राम करना होगा। यह सब करने का अर्थ है फिर से लाखों कागजात पुन: छपवाने पड़ेंगें यानि धन के साथ साथ पर्यावरण का नुक्सान, दूसरा सरकारी दफ्तरों की स्टेशनरी यानि की मोहर आदि भी बदलनी होंगी इसकी लागत अलग। धन का व्यय तो है ही समय व श्रम की बर्बादी इसे करने में जो होगी उसका मूल्य कैसे आंका जाये। अब नुक्सान तो इसका इतना सारा है क्या सरकार के पास गुरुग्राम नाम होने से होने वाले फायदों की कोई सूची है या फिर वही संस्कृति वाला राग सरकार अलापेगी। इससे तो सरकार पर सांप्रदायिक होने के भी आरोप लगने की संभावना है। धीरे-धीरे लोगों में इस नाम को लेकर विरोध भी सामने आने लगा है।

होना तो चाहिये था कि हरियाणा सरकार गुड़गांव के लोगों की बुनियादी जरुरतों पर ध्यान देती, कानून व्यवस्था को मजबूत करते हुए अपराधों पर लगाम लगाती, बिजली पानी की कमी को पूरा करने पर ध्यान देती मतलब ढांचागत सुविधाओं व सरकारी सेवाओं के लिये अतिरिक्त बजट का प्रावधान करती लेकिन ऐसी कोई पहल कहीं से नजर नहीं आती। अब सवाल है कि क्या नाम बदलना ही शहर के विकास के लिये काफी है।

क्या गुरुग्राम नाम होने से गुड़गांव की सड़कें खुली हो जांएगी?

क्या गुरुग्राम नाम होने से यहां जाम लगने बंद हो जायेंगें?

क्या गुरुग्राम होने से गुड़गांव की दो तस्वीरें (हाईवे से इस तरफ और हाईवे से उस तरफ) एक हो जायेंगी?

क्या गुरुग्राम नाम होने से यहां के मजदूरों को श्रम कानूनों के तहत वेतन मिलने लगेगा?

क्या गुरुग्राम नाम होने से यहां के सैक्टरों, कॉलोनियों और विहारों की दुर्दशा सुधर जायेगी? आदि आदि।

गुरुग्राम ही क्यों महागुरुग्राम या महागुरुनगर क्यों नहीं

जब नाम गुरु पर ही रखना था तो भई लगे हाथों इसे गुरुग्राम क्यों गुरुशहर या महागुरुशहर या फिर गुरुनगर या महागुरुनगर कर देते द्रोणाचार्य जिनकी संतान थे उनके नाम पर रख देते या फिर द्रोणाचार्य के पिता के पिता के नाम पर रख देते। सरकार क्षेत्रों के नाम भले बदल दे लेकिन उनकी शक्ल सूरत जब तक बेहतर नहीं होंगी आपको किसी शहर को ग्राम घोषित करने की जरुरत नहीं वह स्वत: ही ग्राम या गांव जैसा दिखेगा।

गुड़गांव – गुरुग्राम – नाम में क्या रखा है Reviewed by on . शेक्सपियर के कथन नाम में क्या रखा है का जवाब ढ़ूढने की जरुर कोशिश करनी चाहिये। नाम में बहुत कुछ रखा होता है। जैसे नाम में धर्म रखा होता है नाम में संस्कृति रखी शेक्सपियर के कथन नाम में क्या रखा है का जवाब ढ़ूढने की जरुर कोशिश करनी चाहिये। नाम में बहुत कुछ रखा होता है। जैसे नाम में धर्म रखा होता है नाम में संस्कृति रखी Rating: 0

Comments (1)

  • haryanakhas

    haryana khas bahut badiya website hai

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