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गोगा नवमी – गूगा पीर की छड़ी दादी कूद कै पड़ी

August 26, 2016 12:53 am by: Category: तीज तयोहार 1 Comment A+ / A-

Goga navmi

गूगा पीर की छड़ी दादी कूद कै पड़ी ये रुके इन दिनां मैं बाळका कै मूंह तै एक टेम मैं खूब सुणाई दिया करते। गूगा की छड़ी लेएं गूगा पीर के भगत घर-घर गूगा नौमी तै पहले ए डेरू की ढूं ढूं ढूं – ढूं ढूं ढू अर गोगा पीर के भजन गाते घुम जाया करते, नौमी आलै दिन तो जमां जुल्म होज्या करते एक भगत लोह की बेलां नै आपणी पीठ पै मार-मार कै लाल कर लिया करता जिस ढाल मुस्लिम समुदाय मैं मुहर्रम पै होया करै पर उड़ै कई जणे अर उरै इक्का दुक्का भगत, मान्यता या है के इनमै गूगा आवै है। महिलाएं गोगा की छड़ी पै दुप्पट्टे बांधती अर मन्नत मांगती, भगत मोर के चंद्या तै बणी झाड़ू तै आशीर्वाद दिया करते। यू नजारा गामां मैं तो इब बी थोड़ा ब्होत बेशक बच रह्या हो। शहरां मैं कोए इसका चलन था के नहीं इसकी आपणी कोये जानकारी नहीं है। पर इतणै तै आप समझ गये होगे बात हो री है गूगा नोमी की।

कब हुआ जाहर वीर गोगा का जन्म

जिस बाधवै कै म्हीनै गेल या कहावत जुड़ी है के बाधवै का घाम अर सीरी का काम यानि बहुत तपस्या का काम हो सै जमा हुमस सी के मौसम उसपै खेत क्यार का काम पसीनम-पसीना माणस लटापीन होया रहो। तो इसे बाधवै कै महीनै मैं कृष्ण पक्ष जिसनै देशी मैं अंधेर भी कह दें हैं तो इस अंधेर की आठम यानि अष्टमी नै तो जामे थे क्यरसन जी महाराज अर इनतै अगलै दिन यानि नौमी नै जन्म लिया था गूगा नै। गूगा था तो राजस्थान के ददरेवा गाम का जिसकी मान्यता है के बाछल कै कोये संतान नहीं हो रही थी तो गुरु गोरखनाथ जी ओड़ै तपस्या करया करदे (आज भी वो स्थान गोरख का टीला तै मशहूर है)। तो बाछल उनकी शरण मैं गई जिनके आशीर्वाद तै गूगा जी जन्म होया। इब गोगामेड़ी नाम का राजस्थान में पूरा गाम है अर इन दिनां ओड़ै पूरा मेला लाग्या रै है। कमाल की बात या है के यू पी बिहार तक गोगा के भक्तां का पसारा है। बाकि गोगा जी बहोत ही पराक्रमी वीर राजा और योद्धा बताये जां हैं जिनका राज्य सतलुज तै लेकै आपणै हरियाणा के हांसी तक मान्या जा है।

हरियाणा में गूगा डांस भी है मशहूर

हरियाणा मैं तो गूगा डांस कै नाम तै लोक नृत्य यानि के फोक डांस भी बहोत मशहूर है। हर साल कॉलेजां मैं ग्रुप डांस मैं इसकी कोए न कोए प्रस्तुति मिल ए जा सै। बाकि इस गोगा डांस तांहि हरियाणा मैं लोकप्रिय बणाण का पूरा श्रेय लोक कलाकार महावीर गुड्डू को मिलना चाहिये। गूगा डांस और घोड़ा डांस की विरासत के फिलहाल वो संभाले हुए हैं।

गूगा गेल्यां ए जाडै नै भी लिया है जन्म

हरियाणा में आम धारणा है कि गोगा नवमी कै दिन जाडा (सर्दियां) जन्म ले ले है। यानि इस दिन से मौसम में बदलाव शुरु हो जाता है या कहें यह गर्मियों से सर्दियों की और मौसम के संक्रमण का समय होता है। बाकि तो चमासा भी यानि वर्षा ऋतु का काल होता है यह जो कि पूरा ही हुमस से भरा हुआ होता है। सब कुछ चिपचिपा चिपचिपा लगता है। अजीब सी गंध हवा में फैली रहती है। गांव में तो मिट्टी की खुशबू फिर भी ली जा सकती है लेकिन शहरों में तो सिवरेज की कसैली बू के सिवा क्या महसूस करेंगें। रही सही कसर यहां वहां बिखरे कूड़ों की सड़ांध और गाड़ियों के जाम पूरी कर देते हैं। और हां जो कोई काबू का ना रहे तो वह गूगा का रुप हो जाता है और सामने वाला उससे प्रार्थना करने लगता है ओ गूगा थमज्या इब। मैं भी गूगा होऊं उससे पहले थम जाता हूं आप सभी को हरियाणा खास की ओर से गूगा नौमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

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लड़न गया था गूगा भिड़न गया था…… रंग सै ओ मियां रंग सै तेरे नीले घोड़े मैं रंग सै….

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Comments (1)

  • Amit bisla

    शानदार

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