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प्रेमी प्रेमिका संवाद

कवि इंद्रजीत की कविता

May 14, 2016 11:10 am by: Category: खबर खास, मनोरंजन खास, साहित्य खास Leave a comment A+ / A-

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शहर के एक बड़े उद्यान में

प्रेमी ने कहा प्रेमिका के कान में

चलो प्रिये कहीं और चलते है

जहाँ पर मोहोब्बतो के दौर चलते है

यहाँ प्यार करना आसान नहीं है

इस पार्क में कोई जगह सुनसान नहीं है

यहाँ पर तन्हाई का बसेरा नहीं है

हर तरफ है रौशनी अँधेरा नहीं है

मोहोब्बत के फूल यहाँ नहीं खिलेंगे

इस भीड़ में भला दिल कैसे मिलेंगे

प्रेमिका ने कहा प्रेमी के कान में

क्या करना चाहते हो सुनसान में

हमें प्यार की पींघ चढ़ानी है

या कोई डकेती की योजना बनानी है

बाते तो इतनी बड़ी बड़ी करते हो

फिर ये रौनक देख के क्यूँ डरते हो

समझ गयी तेरी अभिलाषा

तू भवरा है तन का प्यासा

एकांत में मुझ तुम हाथ लगाओगे

इनकार करुँगी तो छोड़ जाओगे

दुनिया भर में शोर मचाओगे

मुझको तुम बे वफ़ा बताओगे

जाने किस भूल में रहते हो

वासना को तुम प्यार कहते हो

तुम जैसे जो काम करते है

वो ही इश्क को बदनाम करते है

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कवि इंद्रजीत

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