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बुद्ध पूर्णिमा – आज भी सीख देते हैं बुद्ध

महात्मा बुद्ध के प्रेरक प्रसंग

May 21, 2016 12:35 pm by: Category: खबर खास, धरोहर खास, शख्सियत खास, साहित्य खास Leave a comment A+ / A-

Budh Purnima

 

वैसाख माह की पूर्णिमा को महात्मा बुद्ध के जन्मोत्सव के रुप में मनाया जाता है। बोद्ध धर्म के अनुयायियों के लिये इस दिन  का  महत्व बहुत अधिक है। माना जाता है कि महात्मा बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति इसी दिन हुई थी। इसलिये इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा के रुप में मनाया जाता है।

महात्मा बुद्ध के विचार भारत से शुरु होकर आज दुनिया के कोने कोने तक पंहुच चुके हैं। करुणा, त्याग, दया और प्रेम का संदेश तो महात्मा बुद्ध ने जगत को दिया ही लेकिन अपने प्रवचनों को वे जिस अंदाज से जीवंत बनाते थे वे हैं उनके प्रेरक प्रसंग यानि वे छोटी छोटी कहानियां जिन्हें अपनी बात को अच्छी तरह से अनुयायियों को समझाने के लिये उन्हें सुनाते थे या उन्हें अनुभव करवाते थे। उनके प्रेरक प्रंसंग आज भी प्रासंगिक हैं तो हैं ही साथ ही सीख भी देते हैं। उदाहरण के लिये उनका एक रोचक प्रसंग हैं सभा को लेकर। बुद्ध जिस प्रकार के सभा करते थे और अनुयायियों का चयन करते थे वह आज के साधुओं और बाबाओं के लिये संदेश है और अनुयायियों के लिये भी।

एक बार की बात है महात्मा बुद्ध को सभा में भाषण करना था, समय होने पर बुद्ध सभा में तो आये लेकिन बिना कुछ बोले ही वहां से चले गये। सभा में उस समय करीब 150 लोग थे। अगले दिन फिर सभा में बुद्ध आये और बिना बोले चले गये लोगों की संख्या 100 रह गयी। तीसरे दिन भी गौतम इधर-उधर देखकर बिना बोले ही सभा से चले गये लोगों की संख्या अब घटकर 60 रह गयी। चौथे दिन फिर ऐसा ही हुआ और लोगों की संख्या कुछ और कम हो गई। पांचवे दिन सभा में गौतम बुद्ध बोले और 14 लोग उनके साथ हो गये। एक अनुयायी ने पूछा आपने चार दिन कुछ नहीं बोला इसका कारण क्या था। तब महात्मा बुद्ध ने कहा कि मुझे भीड़ नहीं चाहिये काम करने वाले चाहिये। इस काम में तो वही लोग टिक सकेंगें जिनमें धैर्य होगा। जिनमें धैर्य था वे रह गये केवल भीड़ ज्यादा होने से कोई धर्म नहीं फैलता बल्कि उसे समझने वाले चाहिये।

बुद्ध की नजर से यदि वर्तमान में झांके तो तमाम धार्मिक संतो के समागम में भीड़ तो मिल जायेगी लेकिन आध्यात्मिक ज्ञान की चाहत रखने वालों की संख्या हजारों में एक होती है। अनुयायियों को जाने भी दें तो संतो में भी कोई बुद्ध अब नजर नहीं आता। आप सभी को हरियाणा खास की ओर से बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं।

 

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