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युद्धों का निर्मम रणनीतिकार था अबु-बक्र-अल-बगदादीः एक विश्लेषण

मारा गया बगदादी

June 14, 2016 7:45 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

बगदादी मारा गया। सिर्फ तीन शब्द। और घटना इतनी बड़ी कि हर जिज्ञासुओं के लिए महत्व रखने वाली खबर। हालांकि अब से पहले भी ऐसी खबरें मीडिया जगत का हिस्सा बनती रही है। मगर इस बार खबर का हवाला आईएसआईएस से जुड़ी न्यूज एजेंसी अल-अमाक ने किया है। जिस घर की घटना हो; खबर भी उसी घर से मिल जाए तो बात शायद पुष्टि भरी होती है। एजेंसी के अलावा ईरान और तुर्की का मीडिया भी ऐसा ही दावा कर रहा है। कहा जा रहा है कि सीरिया के रक्का में यूएस कोलिशन फोर्सेस ने दो दिन पहले खूब बम बरसाए थे। इन्हीं हवाई हमलों में बगदादी मारा गया। उसके सिर पर 25 मिलियन डॉलर यानी 160 करोड़ रुपए का इनाम की बात कही जा रही थी। अल-अमाक के मुताबिक, रक्का में हुए हवाई हमले के बाद रविवार को रमजान के पांचवें दिन कोलिशन आर्मी की एयर स्ट्राइक में बगदादी की मौत हो गई है।

ये तो सर्वविदित है कि आतंकवाद का खौफ़ मौजूदा हालातों में हर एक राष्ट्र के लिए सरदर्द बना हुआ है। आतंकी घटनाओं, इन घटनाओं के शिकार बेगुनाह लोगों और पीड़ित परिवारों का दर्द जानकर आज हर कोई सिहर उठता है। भारत ही नहीं दुनिया के हर कोने में उठती आतंकवाद की लपटों ने लोकतंत्र की बुनियाद को सन्देहास्पद बना दिया है। ऐसे में बगदादी के मरने की खबर हर किसी के लिए आतंक के खात्मे की खबर होती है। आपको बता दें कि ये बगदादी था; 4 अक्तूबर 2011 को जब प्रशासन के अथक प्रयासों के बाद अमेरिका ने इसे विशेष वैश्विक आतंकवादी के रुप में चिह्नित किया और साथ ही उस पर एक करोड़ डालर (क़रीब 60 करोड़ रुपए) का इनाम भी रखा।

लादेन के सच्चे वारिश कहे जाने वाले अबू बकर अल बगदादी आंतकवाद का वही चेहरा था जिसने पिछले दिनों एक नया ऑडियो टेप जारी किया था। इस टेप में बगदादी ने दुनियाभर के मुसलमानों को संबोधित करते हुए कहा था कि दुनिया में मुसलमान जहां भी है वहां एक बड़ी लड़ाई के लिए तैयार हो जाएं और वहीं रहते हुए हमारे साथ जुड़कर धर्म की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ें। इस्‍लामिक स्‍टेट से ना जुड़ने का कोई बहाना नहीं होना चाहिए। बता दें कि अल बगदादी का जन्म सन 1971 में बगदाद के उत्तर में स्थित समारा में हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक,  अमरीका के नेतृत्व में साल 2003 में इराक़ पर हुए हमले के दौरान वो इसी शहर की एक मस्जिद में मौलवी थे। कुछ लोग मानते हैं कि सद्दाम हुसैन के शासनकाल से ही वो एक चरमपंथी जिहादी थे।

वहीं कुछ रिपोर्टों का ये भी अनुमान है कि चरमपंथ की ओर उनका झुकाव दक्षिणी इराक़ में स्थित कैंप बक्का में चार साल अमरीकी हिरासत में रहने के दौरान हुआ, इस कैंप में अधिकांश अल-क़ायदा कमांडरों को रखा गया था। बहरहाल, इराक़ के दो शहरों पर क़ब्ज़ा कर चुके बगदादी अपनी पहचान सार्वजनिक करने और अपने रहने की जगह बताने में काफ़ी सतर्क रहा था। धमकियां देने और अपनी ताकत दिखाने में आईएस ने हमेशा सुर्खियां बटोरी है हालांकि पाकिस्तान, अरब प्रायद्वीप और उत्तरी अफ़्रीका में अल-क़ायदा की मौजूदगी के कारण जवाहिरी के पास अब भी बड़ी ताक़त है लेकिन बग़दादी को सबसे संगठित और युद्ध के सबसे निर्मम रणनीतिकार के रूप में शोहरत हासिल थी। विश्लेषकों का मानना है कि युवा जिहादियों में धार्मिक गुरु की छवि रखने वाले जवाहिरी की अपेक्षा आईएसआईएस के प्रति ज़्यादा आकर्षण का यही प्रमुख कारण था।

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युद्धों का निर्मम रणनीतिकार था अबु-बक्र-अल-बगदादीः एक विश्लेषण Reviewed by on . बगदादी मारा गया। सिर्फ तीन शब्द। और घटना इतनी बड़ी कि हर जिज्ञासुओं के लिए महत्व रखने वाली खबर। हालांकि अब से पहले भी ऐसी खबरें मीडिया जगत का हिस्सा बनती रही है बगदादी मारा गया। सिर्फ तीन शब्द। और घटना इतनी बड़ी कि हर जिज्ञासुओं के लिए महत्व रखने वाली खबर। हालांकि अब से पहले भी ऐसी खबरें मीडिया जगत का हिस्सा बनती रही है Rating: 0

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