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महर्षि दयानंद – आर्यसमाज के संस्थापक

February 3, 2018 12:22 am by: Category: शख्सियत खास Leave a comment A+ / A-

स्वामी दयानन्द सरस्वती। एक सुधारवादी सन्यासी, विद्वान, दार्शनिक और आर्यसमाज के संस्थापक। स्वामी जी का जब भी जिक्र आता है तो हमारी समीक्षक दृष्टि एक बार फिर उस समाज की ओर चली जाती है जहां मूर्तिपूजा, अत्याचार, अंधश्रद्धा और पांखड की जड़ें आज भी मौजूद है।

12 फरवरी 1824 को गुजरात की एक छोटी सी रियासत मोरवी के टंकारा नामक गाँव में जन्मे दयानंद के बचपन का नाम मूलशंकर तिवारी था। बचपन से मेधावी और होनहार इस बालक को 14 साल की उम्र में रुद्री आदि के साथ-साथ यजुर्वेद और अन्य वेदों के भी कुछ अंश कंठस्थ हो गए थे।

कहते हैं कि एक बार पिता के कहने पर इन्होनें शिवरात्रि का व्रत रखा, लेकिन जब उन्होंने देखा कि एक चुहिया शिवलिंग पर चढ़कर भगवान शिव के लिए रखा हुआ प्रसाद खा रही है तो इनका विश्वास मूर्तिपूजा से उठ गया। इसके बाद जब इनकी बहन की मृत्यु हुई तो इन्होनें अत्यन्त दु:खी होकर संसार का त्याग करने और मुक्ति प्राप्त करने का निश्चय किया और ये घर से निकल पड़े और अलग-अलग आचार्यों से वेद इत्यादि की शिक्षा प्राप्त करते हुए ये समाज से पाखंडवाद, मूर्तिपूजा और अन्य कूरीतियों को खत्म करने की अलख जगाने लगे।

इसी दौरान इन्होनें अप्रैल 1875 में आर्यसमाज की स्थापना कर हिन्दू समाज से मूर्ति-पूजा, अवतारवाद, बहुदेव पूजा, पशुता का व्यवहार व विचार और अंधविश्वासी धार्मिक काव्य इत्यादि को खत्म कर समाज को नई चेतना दी और कई संस्कारगत कुरीतियों से छुटकारा दिलाया। आर्यसमाज की स्थापना के साथ ही स्वामी जी ने हिन्दी में ग्रन्थ रचना शुरू की जिसकी बदौलत इन्होनें समाज को ‘सत्यार्थप्रकाश’ समेत कई प्रभावशाली ग्रन्थ  दिए।

एक पौराणिक हिन्दुत्व से शुरूआत कर दार्शनिक हिन्दुत्व के पथ पर चलते हुए हिन्दुत्व की आधार शिला को वैदिक धर्म तक पहुँचाने वाला ये युगपुरूष 30 अक्टूबर 1883  को इस दुनिया से विदा हो गया। लेकिन उनकी शिक्षाएँ, संदेश और उनका बीसवीं सदी के भारतीय इतिहास में लिखे एक ज्वलंत अध्याय ‘आर्यसमाज’ आन्दोलन की अनुगूँज आज तक सुनाई देती है।

कब है स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती

वैसे तो उनका जन्म 12 फरवरी 1824 में हुआ था लेकिन हिंदू पंचाग के अनुसार यह तिथि संवत 1881 में फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि थी। इसलिये हर साल उनकी जयंती फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को ही मनायी जाती है वर्ष 2018 में अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह तिथि 10 फरवरी को है।

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