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तू किधर ?

December 24, 2017 10:52 am by: Category: शख्सियत खास Leave a comment A+ / A-

तू किधर ?

रामधारी खटकड़

ओ महा कवि ! 
कविता को नीलाम न कर
मत रख गिरवी
लेखनी को
छोड़ चाटुकारिता का साज
मत बजा चिरौरी की डफली
आश्रय न खोज ,
ये राजभोग न चख…..
कह दे खुलकर जमाने की पीड़ा
वाणी के वरदान को
मत बना दरबारी भौंपू
लफ्जों को मत बहने दे
बदकार हवाओं के संग
मोहरा नहीं है तू
सियासत की शतरंज का
करुणा का दुलारा है
पीड़ा का प्यारा है तू
गुरबत का सहारा है
मत देख चमकते कंगूरे को
यूं लार न टपका
कहीं रो न दे नींव की ईंट
तेरी नीयत भांप कर
समेट ले ढीले अंगों को
अपनी खुद्दारी संभाल
करना होगा आज तुझे तय
तू है किधर…?
किस तरफ ?
किस की तरफ ??

 
लेखक परिचय – रामधारी खटकङ हरियाणा के रोहतक में रहते है। लोक कवि और सामाजिक कार्यकर्ता है।

नोट:- प्रस्तुत Poem में दिये गये विचार या जानकारियों की पुष्टि हरियाणा खास नहीं करता है। यह लेखक के अपने विचार हैं जिन्हें यहां ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है। Poem के किसी भी अंश के लिये हरियाणा खास उत्तरदायी नहीं है।

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