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शीशम का पेड़

गुड़गांव से बादली रोड़ पर पड़ने वाले गांव देवरखाना में जन्मे कवि इंद्रजीत की बेहतर कविता

May 7, 2016 4:33 am by: Category: साहित्य खास Leave a comment A+ / A-
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कवि इंद्रजीत

कवि इंद्रजीत की हरियाणवी बोली पर गजब की पकड़ है, हास्य और गंभीरता का जो मेल इंद्रजीत की कविताओं में मिलता है वह काबिले तारीफ है। एवन तहलका में कार्य के दौरान इंद्रजीत से परिचय हुआ था, उसी समय इनकी लेखनी से भी साक्षात्कार हुआ। पेश है हरियाणा खास के पाठकों के लिये कवि इंद्रजीत की यह कविता…..

शीशम का पेड़

या खबर सुण कै मेरै सांप सां लड्ग्या

के वो शीशम का पेड़ तेज आंधी मैं पड़ग्या

 वो शीशम का पेड़ झोहड़ के किनारे पै खड़ा था

जिसका सारे गाम नै सहारा बड़ा था

वो शीशम का पेड़ म्हारे गाम की शान हुआ करै था

जिसकी जड़ां मैं जमीन अर चोट्टी पै आसमान हुआ करै था

पाली जब भैंसा नै झोहड़ मै ले जाया करै थे

गर्मिया मैं उसकी मिट्ठी छाया में बैठ जाया करै थे

सुबह शाम तो हुड़ै रौनक ए न्यारी हो थी

हंसी ठिठोली और बात प्यारी प्यारी हो थी

किल्की जब पाट्टे थी जब कोई बहस छिड़ ज्या थी

या फेर जोहड़ में किसे की भैंस भीड़ ज्या थी

गाम समाज हर तरह की बात हुया करै थी

जणू सुबह शाम रोज पंच्यात हुआ करै थी

गाम मैं होण आली हर बात का जिकर हुआ करै था

माणसा का तो के डांगरा का भी फिकर हुआ करै था

सब बाता के भेद हुड़ै खुल जाया करैं थें

शर्त लाग कै लाड्डू घेवर तुल जाया करै थें

हम बालक भी शीशम के पेड़ पै चढ़ ज्यावां थे

पक़डम पकड़ाई मै लटक कै पड़ ज्यावां थे

साम्मण मैं तो रौनक और बढ़ जावै थी

जब शीशम के डाला मैं झूल पड़ जावै थी

सामण आले गीत जब छोरी गावैं थी

शीशम के पेड़ पै भी मस्ती छा जावै थी

बखत बदल्या जोहड़ मै पानी सुक्खण लाग्या

लोगा का जोहड़ पै जाणा छुट्टण लाग्या

पाल काट कै माट्टी उट्ठण लाग्गी

सामण की भी झूल छुट्टण लाग्गी

फेर शीशम का पेड़ एकला रहण लाग्या

आंधी तूफ़ान खड़ा सहण लाग्या

जड़ की माट्टी हवा नै काट दी

बची कुची लोगा नै छाट दी

खोखली जड़ कद तक बोझ सहती

और अपना दुखड़ा भी किस तै कहती

पत्ते झङगे छाया खूगी

शीशम के पेड़ की काया खूगी

डाल्हे सूखगे बक्कल झडग्या

शीशम का पेड़ तेज आंधी में पड़ग्या

के वो शीशम का पेड़ तेज आंधी में पड़ग्या…

शीशम का पेड़ Reviewed by on . [caption id="attachment_94" align="aligncenter" width="630"] कवि इंद्रजीत[/caption] कवि इंद्रजीत की हरियाणवी बोली पर गजब की पकड़ है, हास्य और गंभीरता का जो मेल [caption id="attachment_94" align="aligncenter" width="630"] कवि इंद्रजीत[/caption] कवि इंद्रजीत की हरियाणवी बोली पर गजब की पकड़ है, हास्य और गंभीरता का जो मेल Rating: 0

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