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हजकां कांग्रेस विलय – कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस को सौंपेंगें हरियाणा जनहित

भाजपा के बढ़ते नॉनजाट वोट पर रोक लगाने में कितना कारगर होगा कांग्रेस हजकां विलय

April 26, 2016 5:02 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

सुबह का भूला शाम को घर आ जाये तो उसे भूला नहीं कहते… जब जागो तभी सवेरा… लौट के बुद्धु घर को आये… और सबसे फेवरट ट्रेंड में चल रहा शब्द घर वापसी… हजकां सुप्रीमों कुलदीप बिश्नोई द्वारा अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में करने की खबरों पर कुछ इसी तरह की टिप्पणियां सुनने को मिल रही हैं। सोशल मीडिया पर उनके पुराने वीडियो फूटेज निकाल-निकाल कर आलोचनाएं की जा रही हैं। कहा जा रहा है कि कुलदीप के पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजनलाल कम से कम बुद्धिमान तो थे, वे तो बनी बनाई सरकार को तोड़कर अपनी सरकार बनाने तक हुनर जानते थे, कुलदीप से पिता का बनाया हुआ साम्राज्य भी न संभल सका आगे बढ़ाना तो दूर रहा। विपक्षी दल इनेलो के नेता अभय चौटाला तो शुरु से बिश्नोई की पार्टी को कांग्रेस की बी टीम कहते रहे हैं।

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लेकिन इन तमाम बातों को देखते हुए वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हजकां का कांग्रेस विलय का फैसला प्रेदश की राजनीति को कितना प्रभावित कर पायेगा यह तो आने वाला समय बतायेगा। फिलहाल तो यही कयास लगाया जा सकता है कि कांग्रेस की हालत भी वर्तमान में बेहतर नहीं है। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हरियाणा में हुई हिंसा के बाद पूरा प्रदेश जाट-नॉनजाट के खेमे में बंटता जा रहा है। सामाजिक सौहार्द और जातीय सद्भाव की कोशिशें भी हुई हैं लेकिन जमीनी स्तर पर तो इसका असर होते होते होगा। तो क्या यह कांग्रेस और हजकां की प्रदेश में भाजपा द्वारा नॉनजाट वोटबैंक पर होती मजबूत पकड़ को कमजोर करने की कोशिश तो नहीं। अशोक तंवर और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कारण वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस दो धड़ों में दिखाई देती है कभी कभार किसी कोने से कैप्टन भी तीसरी आवाज निकालते रहते हैं।

ऐसे में कुलदीप का कांग्रेस में शामिल होना रणदीप सिंह सुरजेवाला, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कैप्टन अजय, स्वयं अशोक तंवर और किरण चौधरी जैसे दिग्गजों के लिये क्या चुनौति नहीं बनेंगें। क्या कांग्रेस आलाकमान तंवर और हुड्डा की गुटबाजी का तोड़ निकालने के लिये कुलदीप का सहारा लेगी। क्या अब हुड्डा कांग्रेस से अलग राजनीति करेंगें। अगर हुड्डा कांग्रेस से अलग होते हैं तो ऐसी सूरत में रणदीप और किरण चौधरी के अलावा जाटों का कोई बड़ा चेहरा कांग्रेस पार्टी के पास नहीं रहेगा।

राजनीतिज्ञों पर नैतिक सिद्धांत लागू नहीं होते यह कहना शायद सही नहीं है लेकिन नैतिक सिद्धांतों या मर्यादाओं की परवाह राजनीतिज्ञ नहीं करते यह अक्सर वे सिद्ध करते रहते हैं। जब तक एक दूसरे के आमने सामने होते हैं एक दूसरे को कोसते रहते हैं लेकिन जब एक ही पार्टी में शामिल होते हैं तो ऐसे गले मिलते हैं इतना भाईचारा दिखाते हैं जैसे सारे जहां का प्यार बस इन्हीं पर बरस रहा हो। देश का दुर्भाग्य यह है कि रोजमर्रा में काम आने वाली चीजें जो खुद से जुड़ी हों बड़ी जांच-परख करते हैं लेकिन राजनीति में जांच-परख कर एक बार इसे अगली बार उसे आजमाते रहते हैं इनके अलावा कोई ठीक-ठाक विकल्प उसे नजर ही नहीं आता। आज कुलदीप की पुरानी बाइट को खोज कर लाने वाले कुछ दिनों में रैलियों की शोभा बढ़ाते और समर्थन में नारे लगाते भी नजर आएंगें।

हजकां कांग्रेस विलय – कुलदीप बिश्नोई कांग्रेस को सौंपेंगें हरियाणा जनहित Reviewed by on . सुबह का भूला शाम को घर आ जाये तो उसे भूला नहीं कहते... जब जागो तभी सवेरा... लौट के बुद्धु घर को आये... और सबसे फेवरट ट्रेंड में चल रहा शब्द घर वापसी... हजकां सु सुबह का भूला शाम को घर आ जाये तो उसे भूला नहीं कहते... जब जागो तभी सवेरा... लौट के बुद्धु घर को आये... और सबसे फेवरट ट्रेंड में चल रहा शब्द घर वापसी... हजकां सु Rating: 0

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