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चमकीली दुनिया से वेश्यावृति तक का सफर

November 7, 2016 10:04 am by: Category: खबर खास, मनोरंजन खास Leave a comment A+ / A-

prtyusha

मुंबई की मायानगरी महाठगिनी भी है। रात को जगमगाती है मुंबई और चमकते हैं अंबर पर असंख्या सितारे। दिन की उजली धूप में चमकते हैं फिल्मी सितारे। जिनकी एक झलक पाने के लिए फैंस की भीड़ उनके बड़े-बड़े बंगलों के बाहर लग जाती है। जलसा में बिग बी अमिताभ बच्चन प्रशंसकों का अभिवादन स्वीकार करते हैं तो ‘मन्नत’ के बाहर किंग खान शाहरुख खान की झलक पाना चाहते हैं। कोलकाता में नौकरी छोडक़र किस्मत आजमाने पहुंचे बिग बी बनने तक का सफर बहुत बार कष्टों में गुजरा और ‘सर्कस’ व ‘फौजी’ में छोटे परदे से बड़े परदे तक पहुंचने का सफर तय किया शाहरुख खान ने। काका राजेश खन्ना ने लगातार पंद्रह सुपरहिट फिल्में दीं और फिर आशीर्वाद बंगले तक सीमित होकर रह गए। यह मुंबई की चनकीली दुनिया का दूसरा चेहरा है। इस चेहरे को कोई देखना नहीं चाहता पर यह चेहरा भी उतना ही सच्चा है, जितना सफलता का दमकता चेहरा। परवीन बॉबी भी एक होटल में रिसेप्शनिस्ट थी। मुंबई उन्हें खींच लाई और अंत कब और कैसे हुआ, किसी को पता नहीं चला। अवसाद और अकेलेपन ने परवीन बॉबी को गुमनाम मौत दी। दम मारो दम गर्ल के नाम से चर्चित जीनत अमान को बेटे ही पीटने लगे।

 

श्वेता तिवारी और राजा चौधरी की मारपीट, हंगामा और फिर अलगाव पर झेल गई श्वेता तिवारी। फिर से जिंदगी शुरु की, शादी की। मुंबई की इस चमक-दमक की दुनिया में बिन फेरे, हम तेरे यानी अंग्रेजी में बोले लिव इन रिलेशनशिप का बड़ा चलन है। बिपाशा बसु और जॉन अब्राहम कितने वर्ष लिव इन रिलेशनशिप में रहे फिर अलग हो गए यानी ब्रेकअप हो गया। फिल्मी गॉसिप इसी से बनते हैं। कोई मिलता है, कोई बिछुड़ता है। यह लिव इन ब्रेकअप का खेल चलता है रहता है। कोई सहता है, कोई नहीं सह पाता है। कोई टूट जाता है, कोई संभल जाता है।

 

दीवानी-मस्तानी दीपिका पादुकोण भी मानती हैं कि वे डिप्रेशन का शिकार हो गई थीं पर उनकी मम्मी ने सहानुभूति व प्रेम से उबार लिया। रितिक रोशन भी डिप्रेशन की लपेट में आने की बात मानते हैं। दीपिका पादुकोण तो अब ‘दोबारा पूछो’ अभियान चलाने जा रही हैं कि जो अवसाद में हो, उदासी में घिरा हो, उसे दोबारा पूछो, जैसे उनकी मां ने पूछा तो क्या पता जिंदगी गुलो-गुलजार हो जाए। पर बालिका वधू धारावाहिक से लोकप्रियता पाने और दर्शकों की वाहवाही बटोरने वाली मासूम प्रत्यूषा बनर्जी की किस्मत में ऐसा कोई नहीं मिला, जो उसे दोबारा पूछता। वह जमशेदपुर से कितने ख्वाब पलकों में सजा कर आई थी और एक पार्टी में जमशेदपुर के ही राहुलराज सिंह से टकरा गई। ऐसी आंखें मिली कि लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगी। जल्दी ही प्यार की परत नकली मेकअप की तरह उतर गई और प्रत्यूषा बनर्जी राहुल राज सिंह का डरावना चेहरा और घिनौने इरादों की भनक लग गई। वह लौट जाना चाहती थी अपनी मां की गोदी में पर ऐसा न हो सका। इस वर्ष अप्रैल में आत्महत्या करने से पहले प्रत्यूषा बनर्जी की राहुलराज सिंह से सिर्फ साढ़े तीन मिनट पहले हुई बातचीत बड़े काले रहस्य को उजागर कर रही है। वह कहती हैं- मैं यहां अपने आपको बेचने नहीं आई थी। मैं यहां अभिनय और काम करने आई थी पर तुमने मुझे आज कहां लाकर खड़ा कर दिया है? राहुल, तुम्हें पता भी नहीं कि मैं इस वक्त कितना बुरा महसूस कर रही हूं। मेरा नाम तुम खराब कर रहे हो। लोग मेरे बारे में गलत बातें कर रहे हैं। अब सब कुछ खत्म हो गया है। मर गई मैं।

 

प्रत्यूषा बनर्जी के वकील नीरज और माता-पिता का कहना है कि इस कॉल से यह इशारा मिलता है कि प्रत्यूषा बनर्जी यानी छोटे पर्दे की आनंदी को राहुल राज ने वेश्यावृति की दुनिया में धकेल दिया था। वकी का आरोप है कि पुलिस ने इस पहलू पर ज्यादा गंभीरता नहीं दिखाई इसलिए राहुल राज फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर है। सफलता की कहानियां होती हैं और असफलता व अवसाद झेलने वाली प्रत्यूषा बनर्जी जैसी कितनी सपनीली लड़कियां गुमनाम ही इस चमकीली दुनिया से कब विदा होती हैं, पता नहीं चलता। 

 

हम तो एक गज़ल की पंक्तियां ही गुनगुना सकते हैं:-

 तुम तो इतना मुस्कुरा रहे हो,

क्या गम है, जिसको छुपा रहे हो…

लेखक परिचय

kamlesh-bhartiya

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर ।

उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहायस हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

चमकीली दुनिया से वेश्यावृति तक का सफर Reviewed by on . मुंबई की मायानगरी महाठगिनी भी है। रात को जगमगाती है मुंबई और चमकते हैं अंबर पर असंख्या सितारे। दिन की उजली धूप में चमकते हैं फिल्मी सितारे। जिनकी एक झलक पाने के मुंबई की मायानगरी महाठगिनी भी है। रात को जगमगाती है मुंबई और चमकते हैं अंबर पर असंख्या सितारे। दिन की उजली धूप में चमकते हैं फिल्मी सितारे। जिनकी एक झलक पाने के Rating: 0

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