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‘अम्मा’ के किस्से हजार, जमाना रखेगा याद

December 7, 2016 9:52 am by: Category: खबर खास 2 Comments A+ / A-

jayalalitha

राजनीति की ब्रांड, फिल्मी नायिका जयललिता कैसे तमिलनाडु के लोगों के दिलों में ‘अम्मा’ की उज्जवल छवि के रूप में बस गईं? जयललिता के निधन के बाद राजनीति के गलियारों में इस जादू पर सभी हैरान हैं। लगभग अढ़ाई माह तक रहस्यमय बीमारी से जूझती हुई जयललिता आखिर कल रात अपने असंख्य समर्थकों को रोते-बिलखते छोड़ कर चली गईं। यह भी राजनीति का अजब रहस्य रहा कि रात्रि 11.30 बजे निधन हो जाने के बावजूद 12.12 तक यह समाचार क्यों रोके रखा गया? क्या उनके उत्तराधिकारी पन्नीरसेल्वम पर सहमति बनने और एफिडेविट भरवा लेने के लिए निधन का समाचार जारी नहीं किया गया? क्या अब राजनेताओं का ही अपने सहयोगियों से भरोसा उठ गया है। पहले पश्चिमी बंगाल में कांग्रेस ने एफिडेविट भरवाए थे, अब पन्नीरसेल्वम ने। पर असली सवाल यही है कि छह बार मुुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाने वाली फिल्मों की ग्लैमरस नायिका कैसे आम आदमी की ‘अम्मा’ बनकर उनके दिलों पर राज करती रही?

जयललिता के संघर्ष व दृढ़ इच्छा शक्ति के अनेक उदाहरण हैं तो साडिय़ों व आभूषणों के प्रति उनके लगाव के भी बहुत सारे किस्से हैं। दत्तक पुत्र की शादी पर सबसे बड़े पंडाल लगाने और 95 करोड़ रुपए खर्च करने का रिकार्ड लिम्का बुक में दर्ज है। अपने गुरु एमजीआर के साथ 28 फिल्में करने का भी रोचक रिकार्ड है, जिनमें से अधिकांश फिल्मों ने सिल्वर जुबली मनाई। फिल्मी नायिका के रूप में भी जयललिता लोगों के दिलों में बसी थीं लेकिन मुख्यमंत्री बनते ही वे उनके दिलों में अम्मा के रूप में बदल गई। आम जनता उनके अस्पताल में दाखिल किए जाने के बाद से जिस तरह बिना खाए-पिए खड़ी रही और अंतिम दर्शनों के लिए चार-पांच किलोमीटर तक लाइन में लगी रही, यह भी उनकी लोकप्रियता को साबित करने के लिए काफी है। विधानसभा में एक बार साड़ी का पल्लू डीएमके विधायक के खींचने से जयललिता गिर गई थी और द्रोपदी व चाणक्य की तरह कसम खाई कि अब मुख्यमंत्री बनकर ही विधानसभा में लौटेंगी। यह कारनामा लगभग दो वर्ष बाद करके भी दिखाया।

पश्चिमी बंगाल में ममता बनर्जी, उत्तर प्रदेश में मायावती और तमिलनाडु में जयललिता लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के खिलाफ थीं। पर जयललिता के करिश्मे के सामने मोदी भी नहीं टिक पाए। तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीटों में से 37 जयललिता के करिश्मे से पार्टी को मिली जबकि ममता व मायावती ऐसा कारनामा नहीं कर सकीं। फिल्मी नायिका होने के बावजूद राजनीति में आने के बाद मेकअप करना छोड़ दिया और फिल्मी मित्रों से दूरी बना ली। पूरी तरह राजनीति को समर्पित हो गई। बस यही समर्पण जयललिता का जादू कहा जा सकता है, जिससे उन्हें लोगों की अम्मा बना दिया। सस्ता खाना, राशन देने के लिए अम्मा ब्रांड नमक, कैंटीन और न जाने कितने प्रोडक्ट बाजार में उतार दिए। प्रतिशोध भी लिया करूणानिधि से, रात्रि के समय घर से उठवा कर और एक साथ दो लाख कर्मचारियों को बर्खास्त करने का साहस अम्मा के ही बस की बात थी। अपनी शर्तों पर केंद्र को समर्थन देने वाली अम्मा के नाम वाजपेयी सरकार गिराने में भूमिका निभाने की घटना भी दर्ज है। फिल्मों से राजनीति में कदम रखने वालों को जयललिता जैसा समर्पण सीखना चाहिए, नहीं तो हिंदी फिल्मी सितारे सिर्फ चुनाव जीत कर अपने चुनाव क्षेत्र को भूल जाते हैं। जयललिता ने यह साबित कर दिया कि जो कुछ भी करो, उसमें अपना श्रेष्ठ दो। जयललिता कितने रहस्य समेट कर विदा हो गईं।

नेता आते रहेंगे, जाते रहेंगे,

अम्मा जैसा प्यार कितने पाएंगे।

kamlesh-bhartiya

लेखक परिचय

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर । उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहाइस हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

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Comments (2)

  • kamlesh bhartiya

    amma brand banna kiske bute ki baat hogi? shashikala ya selvam? kaun hai sahi waris? harynankhas site aise hi barti rahe. shubhkamnayen.

  • kamlesh bhartiya

    haryanakhas ke liye badhai. lekin isme yeh bhi samne ho ki kitne log kya kehte hain. yani pathkon ki pratikriyayen bhi milen to achha lagega. phir se badhai.

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