Saturday , 25 November 2017

Home » साहित्य खास » अनैतिकता के ठेकेदार म्हारे रूखाले

अनैतिकता के ठेकेदार म्हारे रूखाले

December 5, 2016 10:20 pm by: Category: साहित्य खास Leave a comment A+ / A-

anaitikta-ke-thekedar

एक चाला आजकाल कसूता देख्या अक असल मैं जो म्हारा सबतै बड्डा बैरी सै ओ हमनै सबतै प्यारा लागै सै अर असल मैं जो म्हारा भला चाहवै सै ओ हमनै अपणा पक्का बैरी दीखै सै। भाषा सबकी एक फेर काम न्यारे-न्यारे ढाल के। एक आवैगा अर कहवैगा अक भाई अपणा मारै छां मैं गेरै। हम भी सैड़ दे सी बिना सोचे-समझें हां मैं हां मिलाद्या सां। कदे सोची सै अक जिब माणस मरे लिया तो उसनै घाम किसा अर छां कीसी? उसकै लेखै चाहे घाम रहो अर चाहे छां रहो। इसे तरियां तम्बाकू म्हारे सरीर का जमा नास करदे सै फेर हमनै बहोत प्यारा लागै। दारू म्हारा सरीर ढाह के गेरदे, घरनै तबाह करदे, बालकां की बर्बादी का कारण बणै फेर हमनै कितनी प्यारी लागै सै। ट्रक ड्राइवरां नै बेरा सै अक पराई बीरबानी धोरै जावांगे तो एड्ज बीमारी ले कै आवांगे फेर सारी जिन्दगी का रोना पूरे कुण्बे का। फेर कोए छिदा ए ड्राइवर बचता होगा। बेरा सै हमनै अक न्यूण जावांगे तो झेरा सै उसमैं जरूर पड़ांगे फेर जाणा जरूर अर पड़ना बी जरूर झेरे मैं।

दूसरी तरफ या किस्मत हमनै परजीवी इन्सान बणावण मैं अर म्हारी मेहनत की लूट करवावण मैं लूटेरयां के हाथ मैं बहोत काम्मल हथियार सैं अर हम इसकी कौली भरे बैठे सां। किमै बात होज्या, एक्सीडैंट तै होवै ज्यां करकै अक सड़क खराब, अर टायर डुप्लीकेट, अर इंजन घटिया। अर न्यों कहवांगे अक के करया जा सकै सै, उसकी राम जी नै इतनी ए सांस लिख राखी थी। बालक दस्तां तै मरज्या तै कहवांगे अक किस्मत माड़ी थी। सारी दुनिया नै बेरा सै अक बालक कै दस्त साफ पानी ना हो अर नेड़े धोरै गन्दगी हो उस करकै लागैं सैं। बालक की मौत का कारण दस्त अर दस्त का कारण खराब पाणी तै म्हारे बालक की मौत का कारण खराब पाणी हुया अक म्हारी किस्मत हुई? साफ पाणी खात्तर हम संघर्ष ना करां, मांग ना करां, इस खात्तर म्हारै किस्मत की बेड़ी घाल राखी सैं। जै इन बेड़ियां नै तोड़ कै आपां साफ पाणी खात्तर संघर्ष करां तो फेर पुलिस, फौज की बेड़ी सैं उन धोरै। जड़ या किस्मत हमनै भकावण का अर अपणे काले कारनामे छिपावण का बहोत पैना हथियार सै लुटेरयां के हाथां मैं। जो म्हारे दुखां का कारण सै उसकी हम घणी कसूती कौली भररे सां। भरें रहो खूंटा ठोक के करै? समझाए सकै सै और ओ 25 साल तै समझावण लागरया सै, ईब ना समझया चाहो तै थारी मरजी।

तीसरी बात जिननै गंगा जी मैं परदूसण फैला कै उसका पाणी काला जहर कर दिया, कोए ऊनमान नहीं कारखान्यां का कितना जहर रोज गंगा के पाणी मैं रलज्या सै। इन कारखान्यां मां तै अर कितने और गन्दे नाले इसमैं आवैं सै, के कोए गिनती सै इनकी। अर हम इस जहर मैं लाखां लोग डुबकी लावण जावां अपणे पाप धोवण जावां। अर जो इसमैं जहर घोलैं रोज वेहे इसकी पवित्रता के ठेकेदार बणै हांडैं। इसके बारे मैं कोए किमै कैहदे तो उसकै मारण भाजैं। यातै वाहे बात हुई अक चिट बी मेरी अर पिट भी मेरी। पाछै सी ‘वाटर’ फिल्म के बणावण पै तहलका मचा दिया था इन अनैतिकता के ठेकेदारां नै। जो खड़या ए अनैतिकता की कुरड़ी पै हो ओ नैतिकता की सीख तड़के तै सांझ ताहिं देन्ता हांडै यो इस महान भारत देस मैं ऐ हो सकै सै। म्हारे गुरू जी, म्हारे बाबू जी, म्हारे फलाणे जी ये सारे ईसे खाते मैं आवैं सैं।

चौथी बात, अक आजकाल म्हारे राजनीतिक नेतावां कै भी म्हारी संस्कृति की, म्हारी परम्परावां की, समाज के नैतिक पतन की घणी चिन्ता होगी दीखै सै। जिसनै देखो ओहे नैतिकता का पाठ पढ़ान्ता हांडै सै। जिब एक नेता मैं जितने ऐब इस दुनिया के तख्ते पै गिनाये जा सकैं सैं वे सारे ऐब हों अर औ हमनै नैतिकता का पाठ पढ़ावै अर हम भी उसकी गैल दो सेर का सिर हां मैं हां मिलाण ताहिं हिलाद्यां सां। अनैतिकता का डामचा हो अर म्हारे ये रूखाले हों तो जो बणैगी अर बणण लागरी सै समाज की ज्यादातर महिलावां गेल्यां, दलितां गेल्यां अर नौजवानां गेल्यां उसका दोस किसनै देवां? दोस म्हारा सै, म्हारे मैं पैनी नजर की कमी का सै, म्हारी नजर मैं कई ढाल के खोट सैं उनका सै। ना ते चौड़े पड़ी दीखै सै अक इस समाज नै नरक बणावण के कारखाने कित-कित सैं अर उनके मालिक कूण सैं। अर वे म्हारा बेकूफ बणारे सैं। रक्षक बणगे भक्षक।

dr-ranbeer-dahiya

लेखक परिचय

डॉ. रणबीर सिंह दहिया पीजीआई रोहतक के सेवानिवृत सर्जन हैं और हरियाणवी साहित्य व समाज की गहरी समझ रखते हैं…. फौजी मेहर के गांव बरौणा में पैदा हुए डॉ. दहिया उनकी विरासत को रागनी लेखन के जरिये आगे बढ़ा रहे हैं। वर्तमान में भी निशुल्क ओपीडी की सेवाएं जरुरत मंद लोगों के लिये देते हैं और समाज के प्रति समर्पित एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका अदा कर रहे हैं।

अनैतिकता के ठेकेदार म्हारे रूखाले Reviewed by on . एक चाला आजकाल कसूता देख्या अक असल मैं जो म्हारा सबतै बड्डा बैरी सै ओ हमनै सबतै प्यारा लागै सै अर असल मैं जो म्हारा भला चाहवै सै ओ हमनै अपणा पक्का बैरी दीखै सै। एक चाला आजकाल कसूता देख्या अक असल मैं जो म्हारा सबतै बड्डा बैरी सै ओ हमनै सबतै प्यारा लागै सै अर असल मैं जो म्हारा भला चाहवै सै ओ हमनै अपणा पक्का बैरी दीखै सै। Rating: 0

Leave a Comment

scroll to top