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कम कोनी हरियाणा की धाकड़ छोरियां

चाइना की तरफ से एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाली पहली भारतीय महिला बनी अनिता कुंडू

May 31, 2017 8:08 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

दिल है कि मानता नहीं। हरियाणे की धाकड़ छोरियों की वाहवाही करना चाहता है। म्हारे हिसार की छोरी अनीता कुंडू ने एवरेस्ट पर तिरंगा फहरा दिया। जिद्द की, मंजिल पाई। एक बार असफल रही पर जिद्द नहीं छोड़ी, हौंसला नहीं छोड़ा। वैसे भी एवरेस्ट चढऩे का चीन की तरफ से एक कठिन रास्ता चुना। दो दिन तो अनीता कुंडू का पता ही नहीं चला। हाथ दुआओं के लिए उठे और दुआएं कुबूल हुईं। चीन नेपाल के रास्ते से एवरेस्ट फतह करने वाली अनीता कुंडू पहली भारतीय महिला बन गई। अनीता से पहले हरियाणा की संतोष यादव और ममता सौदा भी एवरेस्ट पर तिरंगा फरहा चुकी हैं। संतोष यादव रेवाड़ी से हैं और उन्हें बचपन से ही पड़ा बहुत लुभावने लगते थे। वैसे एवरेस्ट पर चढ़ते समय ही शायद जिंदगी में सांसों का मोल पता चलता हो। एवरेस्ट पर सबसे पहले हिलेरी और तेनसिंध ने कदम रखे थे। तेनसिंध एक शेरपा थे और पर्वतारोही दल में सहायक के रूप में शामिल थे। आखिर हिलेरी के साथ वही चोटी तक पहुंच सके। खैर, एवरेस्ट की कहानी फिर सही।

हिसार, हरियाणा और भारत का गौरव अनीता कुंडू ने बढ़ा दिया। हरियाणे की छोरियां हर जगह धाकड़ हैं। दंगल में ही भिवानी, रोहतक की चर्चित छोरियों के साथ हिसार की गीता फोगाट और पूजा ढांडा का नाम चर्चा में रहता है। हॉकी में हिसार की सविता पूनिया श्रेष्ठ गोलकीपर हैं। बेशक शाहाबाद मारकंडा हरियाणा में महिला हॉकी की नर्सरी के तौर पर जाना जाता है जबकि सिरसा का जीवननगर पुरुष हॉकी के लिए वैसे ही मशहूर है जैसे कभी पंजाब के जालंधर का संसारपुर गांव। संभवता: युवा पीढ़ी को मुख्यधारा में बनाए रखने का यही अच्छा तरीका है। खेलो, कूदो और बन जाए नवाब। हॉकी में तो रोहतक की ममता खरब भी खूब चर्चित रही। शाहरुख खान की फिल्म चक दे इंडिया ने महिला हॉकी की धूम मचा दी और उसमें भी एक रोल कोमल चौटाला नाम से था। इसके बाद से हॉकी की दशा पर देश का ध्यान गया और टीम इंडिया बन गई।

महिलाओं को पहलवानी में बड़ी मुश्किल से नाम मिला, नहीं तो महिला पहलवान के परिवार को ताने सहने पड़ते थे। खास तौर पर ड्रैस को लेकर। अब भी एक ऐसा धारावाहिक आ रहा है ‘बड़ो बहू’ जिसमें बहू को ससुर पहलवानी सिखाना शुरू करते हैं तो जमकर विरोध होता है। न केवल ससुराल, बल्कि मायके से भी। खेल पर संभवत: यह पहला धारावाहिक है और इसमें भी हरियाणा के शहर सिरसा और गांवों का जिक्र है।

हरियाणा की छोरियां धाकड़ हैं पर सरकार को छोरियों के खेलों की ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। अब अनीता कुंडू ने एवरेस्ट की चोटी को जीत लिया, उसे पुरस्कार भी मिल सकता है पर जब वह चोटी पर जाने के लिए पैसा जुटा रही थी, तब कौन आगे आया? कैसे उसने वह खर्च जुटाया? कैसे एक अभियान रद्द हो जाने के बावजूद हौंसला नहीं छोड़ा। फिर तैयारी की। फिर पैसे जुटाए। सरकार का, प्रदेश का नाम रोशन करने पर अनीता कुंडू की भरपाई हो सकेगी? पुरस्कार या पैसे लिए कोई एवरेस्ट पर नहीं चढ़ता। यह तो एक जुनून होता है। इस जुनून और जज्बे को सलाम, अनीता कुंडू।

लेखक परिचय

kamlesh-bhartiya

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर ।उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहाइश हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

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