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अन्ना कर रहे फिल्म प्रमोशन नहीं हटी करप्शन 

October 14, 2016 3:03 pm by: Category: खबर खास, मनोरंजन खास Leave a comment A+ / A-

 anna hazare movie

आजकल मुंबइया फिल्मनगरी में बायोपिक बनाने की धुन सवार है। फरहान अख्तर द्वारा अभिनीत ‘भाग मिल्खा भाग’ फिल्म सफल क्या हुई, जैसे फिल्म निर्माता-निर्देशकों के हाथ मानों अल्लाद्दीन का चिराग लग गया। वैसे भी एक फिल्म सफल होती है तो उसे सफलता का पैमाना मान कर फिल्में बननी शुरु हो जाती हैं, जिसे आम भाषा में फॉर्मूला फिल्में कहा जाता है। मुंबइया फिल्म निर्माताओं के पास वैसे भी अच्छी कहानियों का अकाल है। या तो विदेशी सफल फिल्मों की कहानी चुराने के आरोप लगते हैं या फिर दक्षिण भारत की सफल फिल्मों के रीमेक बनते हैं। ऐसे में बायोपिक बनाना आसान है। किसी की लोकप्रियता के सहारे फिल्म अच्छी खासी कमाई करके निर्माता की तिजोरी भर देती है। हालांकि क्रिकेटर अजहरुद्दीन पर बनी फिल्म प्रमोशन के बावजूद पानी भी नहीं मांग सकी पर क्रिकेट टीम के मौजूद कप्तान एमएस धोनी पर बनी फिल्म धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी आश्चर्यजनक रूप से सफल रही और सौ करोड़ की कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हो गई। इस फिल्म के सहारे सुशांत सिंह राजपूत भी सितारे बन गए। शाहरुख खान के बाद सुशांत टीवी के छोटे परदे से निकल कर बड़े परदे पर भी सफल रहे। 

इसी बायोपिक के दौर में फिल्म आ रही है प्रसिद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे के जीवन को लेकर। इसे युवा निर्देशक व एक्टर शशांक उदापुरकर ने बनाया है और संगीतकार रवींद्र जैन के भाई ने भी सहयोग दिया है। आजकल फिल्मों की प्रमोशन का नया फॉर्मूला भी चला है। फिल्म रिलीज से पहले अलग-अलग रियल्टी शोज व अन्य तरीकों से सितारों को समय देना पड़ता है। इसलिए अन्ना हजारे से भी शशांक ने फिल्म की प्रमोशन करवाई। एबीपी न्यूज चैनल की प्रैस कांफ्रैंस व कपिल शर्मा शो में भी अन्ना दिखाई दिए। बाकायदा फिल्म का प्रचार करते हुए। एबीपी में संचालक दिवांग ने सवाल पूछा कि अन्ना जी, नरेंद्र मोदी व अरविंद केजरीवाल में से किसे ज्यादा ईमानदार मानते हैं? इस पर अन्ना ने जवाब नहीं दिया, बस मुस्करा कर रह गए। कपिल शर्मा ने अपने अंदाज में अन्ना हजारे के सोफे पर बैठ जाने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू को कहा कि पाजी, मेरा दिल कहता है कि एक बार आकर आप अन्ना जी की बगल में बैठ जाओ क्योंकि उनकी बगल में बैठने वाले मुख्यमंत्री बन जाते हैं। साफ संकेत अरविंद के लिए था। एबीपी के दिवांग ने पूछा कि कभी-कभी मन नहीं करता कि जाकर अरविंद केजरीवाल के कान पकडक़र पूछूं कि ये क्या कर रहे हो? इस पर अन्ना का जवाब था कि राजनीति का नशा इतनी जल्दी नहीं उतरता। शादी न करने के सवाल के जवाब में कहा कि पच्चीस साल की उम्र में ही फैसला कर लिया था, विवाह न करवाने का। अब कुछ गलत नहीं लगता। मेरा परिवार कितना बड़ा हो गया। सारा देश मेरा परिवार बन गया। वैसे वे नए दौर के शाहरुख खान व दीपिका को पहचान नहीं पाए। 

कपिल शर्मा ने पूछा कि कभी आपको लगता था कि आप हमारे शो में आएंगे? इस पर अन्ना ने कहा कि रालेबन सिद्धी के मंदिर में रहने वाले फकीर पर कोई फिल्म भी बनाएगा यह भी सोचा नहीं था। खैर, एक समय मुन्ना भाई फिल्म में संजय दत्त ने देश को फिर से गांधी के विचारों के प्रति जागरूक किया था। इंडिया अंगेस्ट करप्शन के बापू गांधी की समाधि से रामलीला मैदान से देश को भ्रष्टाचार के खिलाफ और स्वच्छ राजनीति का विश्वास दिलाया। लेकिन ‘आप’ ने लोगों को निराश किया। मोह भंग कर दिया, विश्वासघात कर दिया। अन्ना तो दुखी होकर यहां तक कहते हैं कि कहीं मुझे ही ‘आप’ की हरकतों को देखकर विरोध न करना पड़े। मुन्ना भाई की गांधीगिरी के बाद देखते हैं कि अन्ना फिल्म से अन्नागिरी की हवा चलती है? नहीं तो देश में दादागिरी कब तक चलती है? जरा-जरा सी बात पर पार्टियां ही नहीं आम आदमी भी दादागिरी पर उतर आते हैं। अनेक घटनाएं गवाह हैं। 

अन्ना के बारे में इतना ही:-

मैं अकेला ही चला थाजानिबे मंजिल मगर,

लोग आते गए, कारवां बनता गया। 

लेखक परिचय

kamlesh-bhartiya

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर ।

उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहायस हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

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