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आशा वर्कर्स ने किया निरोध का विरोध ये है वजह

वे भद्दा मज़ाक करते हुए कहते हैं एक आशा देना और इस तरह हमें शर्मसार होना पड़ता है - आशा वर्कर्स अंबाला

July 12, 2017 12:45 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

बीबीसी हिंदी डॉट कॉम से राजेश डोबरिियाल की तस्वीर साभार

समाज में कई बार ऐसे मसले खड़े हो जाते हैं नाम होते होते बदनामी सिर चढ़ने लगती है। मुन्नी बदनाम हुई डार्लिंग तेरे लिये दबंग फिल्म का यह आइटम सोंग जब आया तो मुन्नी नाम की लड़कियों को घर से बाहर निकलते ही छींटाकशियों का सामना करना पड़ता। शीला की जवानी में शीला नाम वालियां निशाने पर रही। ये तो खैर पुरानी बात हो चुकी हैं नोटबंदी के दौरान ही देखलें। सोनम गुप्ता के नाम से क्या क्या खेल न हुए कितने प्रलाप न हुए। हाल ही में इसी तरह का लेकिन बहुत ही अलग मामला सामने आया है।

आशा निरोध में आशा नाम बना आशा वर्कर्स की परेशानी

सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में परिवार नियोजन के लिये वितरीत की जाने वाली कंडोम जो कि पहले डीलक्स निरोध के नाम से दी जाती थी उसका नाम बदलकर अब आशा निरोध रख दिया गया है। उस पर जुल्म की बात ये कि इनका वितरण भी आशा वर्करों द्वारा किया जाता है जो कि महिलाएं ही हैं।

अमर उजाला की खबर के मुताबिक अंबाला कैंट आशा वर्करों ने इस पर आपत्ति जताई है। आशा वर्करों का कहना है कि कंडोम का नाम आशा निरोध होने से उनके साथ छेड़खानी की जाती है। उन्हें टोंट मारे जाते हैं। एक आशा देना कहकर उनका मजाक उड़ाते हैं। यह सब बहुत ही असभ्य और भद्दे तरीके से होता है जिससे उन्हें शर्मसार होना पड़ता है। इतना ही नहीं सरकारी हिदायतें हैं कि निरोध जिसे भी दी जाये उससे एक रूपया भी कीमत के रूप में लिया जाये लेकिन शर्म के मारे वह यह भी नहीं ले पाती और इसका भुगतान अपनी जेब से करना पड़ता है।

सीएमओ व डीसी को सौंपा ज्ञापन

इसे लेकर जिलेभर की आशा वर्कर्स द्वारा डीसी व सीएमओ को ज्ञापन भी दिया गया है। उन्होंने निरोध के पैकेट से आशा शब्द को हटाने की मांग की है। आशा वर्कर्स युनियन की अध्यक्ष अंजू बाला का कहना है कि यदि सुनवाई नहीं होती है तो दिल्ली में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय के सामने भी प्रदर्शन किया जायेगा।

उत्तराखंड में लग चुका है आशा निरोध पर प्रतिबंध

ऐसा नहीं है कि आशा निरोध को लेकर कोई नया विवाद हुआ हो बल्कि इससे पहले उत्तराखंड में भी आशा कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध कर इनके वितरण से साफ मना कर दिया था। वहां तो आशा वर्कर्स की लीडर ने यहां तक कह दिया था कि स्वास्थ्य मंत्री यदि निरोध को स्वास्थ्य मंत्री निरोध नाम से जारी करें तो उनके परिजनों को कैसा लगेगा। आशा वर्कर्स के विरोध को देखते हुए राज्य सरकार को सारा स्टॉक केंद्र को वापस भेज दिया गया था। पंजाब में भी निरोध के इस नाम पर विरोध हुआ है। अब देखना होगा कि हरियाणा सरकार इसे किस तरह देखती है।

महिला विरोधी नज़रिया

निरोध का नाम आशा निरोध रखने से एक ओर जहां आशा वर्कस विरोध कर रही हैं वहीं इन्हें महिला विरोधी नज़रिये के तौर पर भी देखा जा रहा है। निशाना सीधा केंद्र सरकार की ओर है। कुछ महिला संगठनों का कहना है कि इससे केंद्र की बीजेपी सरकार का महिला विरोधी नज़रिया साफ झलकता है।

आशा वर्कर्स नहीं कुंठित सोच वाले हों शर्मसार

इस मामले में एक चीज़ तो साफ है कि लोगों के दिमाग में गंदगी अभी भी भरी पड़ी है। सामाजिक सोच का स्तर अभी तक निम्न है। निरोध के पैकेट से आशा नाम हो सकता है हटा भी लिया जाये लेकिन भद्दा मज़ाक करने वालों पर क्या इससे रोक लग जायेगी क्या उनके दिमागों की गंदगी दूर हो जायेगी। क्या उनकी कुंठाएं शांत हो जायेंगी। या फिर कुछ और रास्ते निकाल लिये जायेंगें। बेहतर हो कि इस मसले पर लोगों को सामाजिक रूप से जागरूक किया जाये। आशा वर्कर्स भी इसी समाज का हिस्सा हैं। निरोध का इस्तेमाल यौन शिक्षा का ही भाग है। लेकिन जहां महिलाओं की माहवारी पर अभी खुलकर बात नहीं होती वहां पर यौन संबंधों पर बात करना तो अश्लील ही माना जायेगा। और अगर कोई इस पर बात करना चाहेगा तो उसे या तो चरित्रहीन समझा जायेगा या फिर उसके साथ भद्दे मज़ाक किये जायेंगें।

आशा वर्कर्स ने किया निरोध का विरोध ये है वजह Reviewed by on . [caption id="attachment_1932" align="aligncenter" width="624"] बीबीसी हिंदी डॉट कॉम से राजेश डोबरिियाल की तस्वीर साभार[/caption] समाज में कई बार ऐसे मसले खड़े ह [caption id="attachment_1932" align="aligncenter" width="624"] बीबीसी हिंदी डॉट कॉम से राजेश डोबरिियाल की तस्वीर साभार[/caption] समाज में कई बार ऐसे मसले खड़े ह Rating: 0

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