Saturday , 18 November 2017

Home » खबर खास » अटल बिहारी वाजपेयी – 13 दिन 13 महीने 13 तारीख

अटल बिहारी वाजपेयी – 13 दिन 13 महीने 13 तारीख

13 अक्तूबर 1999 को तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बने थे अटल बिहारी वाजपेयी

October 13, 2017 10:39 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

जीवन की ढ़लने लगी सांझ

उमर घट गई

डगर कट गई

जीवन की ढ़लने लगी सांझ

देश के प्रधानमंत्री रह चुके माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की ये पंक्तियां भले ही हाल-फिलहाल उन्हीं जीवन की ढलती हुई उम्र की ओर इशारा करती हो, मगर लगता यूं है कि इस उम्र में भी इस सूरज के ढलने की नियति शायद ही किसी को मंजूर हो।

आज से ठीक 17 साल पहले यानि सन् 1999 में 13 अक्तूबर के दिन माननीय अटल बिहारी वाजपेयी ने तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति श्री के. आर. नारायणन ने इन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस कार्यकाल में ऐसा पहली बार हुआ कि कोई गैर कांग्रेसी सरकार ने अपनी सत्ता के 5 साल पूरे किए हों।

ओजस्वी वाणी के धनी अटल जी 25 दिसंबर 1925 को ग्वालियर में पैदा हुए। विदेशी हुकूमत के ख़िलाफ़ भारत छोड़ो आंदोलन से अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत करने वाले अटल जी देशहित और समाजहित के लिए हमेशा आगे आए ये अलग बात है कि कुछ लोग आज भी इन पर क्रांतिकारियों का साथ न देने और अंग्रेजों को लिखित में माफीनामा दिये जाने के आरोप लगाते हैं।

भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के वे काफी निकट रहे। 1953 में कश्मीर मसले पर मुखर्जी के आंदोलन के दौरान भी वे उनके साथ थे। बताया जाता है कि संघ की पत्रिका निकालने के लिए उन्होनें अपनी वकालत की पढ़ाई छोड़ दी थी। संघ में रहते इन्होंने आजीवन शादी न करने का भी प्रण लिया।

1957 में वे पहली बार लोकसभा पहुंचे। संसद सदस्य के रूप में लगभग चार दशक के सफ़र में वे पाँचवीं, छठी, सातवीं और फिर दसवीं, ग्यारहवीं, बारहवीं और तेरहवीं लोकसभा के भी सदस्य रहे।

अटल बिहारी वाजपेयी और 13

चार दशक तक विपक्ष में बैठने के बाद 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन 13 दिन तक ही इनकी सरकार चल पाई। 1998 में दूसरी बार 13 महीने की सरकार जयललिता के समर्थन वापस लेने के कारण गिरी और 1999 में 13 अक्तूबर के दिन तीसरी बार जब ये प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे तो पूरे पांच साल सत्ता में बने रहे। इस काल में आर्थिक सुधारों की नीति, संतुलित विदेश नीति, आर्थिक विकास की स्वर्णिम चतुर्भुज योजना और अमेरिका के साथ भारतीय संबंधो को सुधारने जैसे कई कामों के लिए ये जाने गए। इनकी सादगी, नैतिकता, काव्य कला और उच्च आदर्शों से हर कोई प्रभावित हुए बिन नहीं रहता।

1998 में पोखरण परीक्षण करवाकर इन्होंनें अपने दृढ़ नेतृत्व का परिचय दिया और समूचे विश्व को भारत की परमाणु क्षमता का अहसास करवाया। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बाद इनको देश का दूसरा स्टेट्समैन कहा जाता है।

भारत और पाकिस्तान के बीच तल्ख रिश्तों को सुधारने के लिए भी ये काफी प्रयासरत रहे। राजनीति में अमूल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने इन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया है। इसके अतिरिक्त ये पद्म विभूषण से भी सम्मानित हैं।

लेखक परिचय – एस.एस पंवार एवन तहलका हरियाणा, तख्तीडॉटइन, हरियाणा खास, खबरफास्ट, हरियाणा न्यूज सहित कई समाचार चैनल एवं वेबपोर्टल के लिये पत्रकारिता कर चुके हैं। वर्तमान में वह फतेहाबाद के एम.एम कॉलेज में सहायक आचार्य (एसिसटेंट प्रोफेसर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफोर्म और विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में इनके लेख, कविताएं, पुस्तक समीक्षाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी – 13 दिन 13 महीने 13 तारीख Reviewed by on . जीवन की ढ़लने लगी सांझ उमर घट गई डगर कट गई जीवन की ढ़लने लगी सांझ देश के प्रधानमंत्री रह चुके माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की ये पंक्तियां भले ही हाल-फिलहाल उन् जीवन की ढ़लने लगी सांझ उमर घट गई डगर कट गई जीवन की ढ़लने लगी सांझ देश के प्रधानमंत्री रह चुके माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की ये पंक्तियां भले ही हाल-फिलहाल उन् Rating: 0

Leave a Comment

scroll to top