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बंसल परिवार के खात्में का गुनहगार कौन ?

September 29, 2016 10:30 pm by: Category: खबर खास 1 Comment A+ / A-

Additional Secretary-ranked officer in Ministry of Corporate Affairs who was arrested last week in corruption case produced at Patiala House Court in New Delhi on Friday. His Wife and Daughter committed suicide after his arrest on July 19. EXPRESS PHOTO BY PRAVEEN KHANNA 22 07 2016.

नई दिल्ली के कॉपोरेट मंत्रालय के महानिदेशक बाल कृष्ण बंसल का पूरा परिवार मात्र 70 दिन में सीबीआई के टॉर्चर का शिकार हो गया या कथित भ्रष्टाचार का, जिसका फैसला आना अभी बाकी है। क्या बंसल को फंसाया गया था? चैनल पर पत्नी व बेटी के लिए अंतिम संस्कार में भाग लेने के लिए आए बंसल बुरी तरह बिलखते हुए, आंसू बहाते हुए यह कहते नजर आ रहे हैं कि मुझे फंसाया गया है। इस रोने धोने पर सीबीआई ने बंसल परिवार को इतना टॉर्चर किया कि पहले मां सत्यबाला व बेटी नेहा ने पंखों से झूलकर जीवन लीला समाप्त कर ली और अब खुद बाल कृष्ण बंसल व उनके बेटे योगेश बंसल ने भी कुछ इसी राह का अनुसरण करते हुए अलग-अलग कमरों में दिल्ली के फ्लैट में आत्महत्या कर ली।

अब सवाल उठता है कि बंसल परिवार को भ्रष्टाचार ने लील लिया या सीबीआई के टॉर्चर ने या दोनों ने? मामला यह था कि इस वर्ष 16 जुलाई को सीबीआई ने कॉर्पोरेट मंत्रालय के महानिदेशक बालकृष्ण बंसल को नौ लाख रुपए की घूस लेते हुए एक होटल में रंगे हाथों पकड़ा था। उन्हें जेल भेज दिया गया था पर 19 जुलाई को ही उनकी पत्नी सत्यबाला व बेटी नेहा ने आत्महत्या कर ली और सुसाइड नोट में लिखा था कि सीबीआई के छापे से हमारी बदनामी हुई है। इससे आहत होकर आत्महत्या कर रही हैं। अंतिम संस्कार के लिए बंसल को अंतरिम जमानत दी गई। बंसल परिवार हिसार का मूल निवासी है। गांधी चौक  क्षेत्र में परिवार के इस तरह समाप्त हो जाने पर शोक की लहर फैल गई। सत्यबाला भी हिसार की ही बेटी थीं। मां-बेटी के लिए हिसार आकर पूजा-पाठ करवाकर पिता-पुत्र हिसार से दिल्ली गए थे।

अब बालकृष्ण बंसल का आत्महत्या से पहले मीडिया हाउस को भेजा गया सुसाइड नोट सीबीआई अधिकारियों के थर्ड डिग्री टॉर्चर की कहानी बयां करता है। बंसल का यह सुसाइड नोट यह बयान करता है कि किस तरह सीबीआई की महिला अधिकारियों ने बंसल की पत्नी को थप्पड़ मारे, नाखून चुभाए और गालियां दी। उनके सामने ही डीआईजी संजीव गौतम ने फोन पर महिला अधिकारियों को कहा- इतना टॉर्चर करो कि मां-बेटी मरने लायक हो जाएं। फिर कहा कि तेरी वाइफ और बेटी को जिंदा लाश नहीं बना दिया तो मैं सीबीआई का डीआईजी नहीं।

बंसल ने साफ लिखा है कि अगर मेरी गलती थी तो पत्नी व बेटी को क्यों सुसाइड करवाया गया? यह सिंपली मां-बेटी का मर्डर था। डीआईजी ने यहां तक कहा कि टुकड़े कर कुत्तों को डाल देंगे, पूरा परिवार मौत मांगेगा।

महाराज युधिष्ठिर और यक्ष का संवाद याद आता है, जब यक्ष पूछता है- दुनिया का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है? युधिष्ठिर जवाब देते हैं- सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि दूसरों की शवयात्रा में जाने वाला व्यक्ति यही विश्वास करता है कि वह तो जीवित रहेगा। यदि आज युधिष्ठिर और यक्ष में यही सवाल हो तो शायद इस मामले व अन्य अनेक मामलों को देखकर युधिष्ठिर उत्तर देते- सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि मनुष्य, खास तौर पर सरकारी अधिकारियों को दूसरों से घूस लेकर पकड़े जाने के बाद भी यही विश्वास बनाए रखता है कि उसे घूस लेते हुए कोई नहीं पकड़ पाएगा, मेरे तरीके अलग हैं। है न आश्चर्य! रोज अधिकारियों के यहां छापों में करोड़ों रुपए की संपत्ति, आभूषण मिलते हैं। मोहन राकेश की एक कहानी है ‘मिस्टर भाटिया’ जो उनके पुराने संकलन ‘जानवर और जानवर’ में सबसे पहली कहानी है। इसमें मिस्टर भाटिया बड़े अधिकारी हैं और परिवार ठाट-बाट से रहता है, आखिर रिश्वत लेते पकड़े जाते हैं। घर के सामान की नीलामी होती है और अंत में मिसेज भाटिया सीढिय़ां उतरती ग्लानि महसूस करती है, जैसे वे अंतिम चीज हैं। कुछ ऐसे ही ग्लानि से यह मामला जुड़ा है। सवाल वही है:-

भ्रष्टाचार के भस्मासुर ने मारा, या सीबीआई के टॉर्चर ने?

 

कमलेश भारतीय (लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष हैं)

बंसल परिवार के खात्में का गुनहगार कौन ? Reviewed by on . नई दिल्ली के कॉपोरेट मंत्रालय के महानिदेशक बाल कृष्ण बंसल का पूरा परिवार मात्र 70 दिन में सीबीआई के टॉर्चर का शिकार हो गया या कथित भ्रष्टाचार का, जिसका फैसला आन नई दिल्ली के कॉपोरेट मंत्रालय के महानिदेशक बाल कृष्ण बंसल का पूरा परिवार मात्र 70 दिन में सीबीआई के टॉर्चर का शिकार हो गया या कथित भ्रष्टाचार का, जिसका फैसला आन Rating: 0

Comments (1)

  • Kamlesh bhartiya

    सवाल तो यही है कि भ्रष्टाचार के भस्मासुर ने लील लिया बंसल परिवार को या सीबीआई के थर्ड डिग्री टाॅर्चर ने ? अधिकारियों के यहां छापे में अकूत सम्पति कहां से मिलती है ? कितने मामले उजागर हो रहे हैं , पर यक्ष प्रश्न यही हैं किया भ्रष्टाचार को देखकर भी रूकते क्यों नहीं ? सतपाल व हरियाणा खास डाॅट काॅम का आभार ।

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