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…आखिर बेगपुर में बन ही गई छोटी सरकार  

September 17, 2016 10:08 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

begpur

पुंडरी का बेगपुर गांव जो अपनी छोटी सी आबादी के बीच योग्य सरपंच की बाट जोह रहा था। वहां आखिर छोटी सरकार का गठन हो ही गया। यहां पर गांव में सर्वसम्मति से पढ़ी लिखी बेटी रीना देवी को गांव की चौधर की बागडोर सौंपी गई है तो दूसरी बेटी को सहयोग के रूप में पंच बनाया गया। यहां उल्लेखनीय है कि गांव बेगपुर में 25 सितम्बर को होने वाले उपचुनाव में सरपंच पद के लिए बेटी रीना देवी व बहू ईसरों देवी द्वारा नामांकन पत्र भरा गया था। उसके बाद हाल ही में नामांकन की जांच के दौरान सरपंच पद की उम्मीदवार ईसरों देवी ने गांव में सर्वसम्मति बनाते हुए अपना नामांकन पत्र वापिस ले लिया। जबकि वार्ड 5 में पंच पद के लिए सिर्फ शांति देवी ने नामांकन पत्र भरा था। इससे पूर्व गांव में सर्वसम्मति से सरपंच बनाने का सभी ग्रामीणों ने पक्ष व प्रस्ताव रखा था, जिस पर सभी ग्रामीणों ने अपनी सहमती जताई। इन सबके चलते शुक्रवार को रीना देवी को गांव का सरपंच और शांति देवी को पंच घोषित कर दिया गया है।

गांव का होगा विकास

बता दें कि दोनों को प्रशासन द्वारा 25 सितम्बर को सरपंच व पंच का प्रमाण पत्र सौंपा जाएगा। शुक्रवार हुई इस प्रक्रिया के दौरान मौके पर मौजूद गांव की नवनियुक्त सरपंच रीना देवी ने कहा कि गांव में सभी को साथ लेकर चलते हुए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, स्वच्छता अभियान, सामाजिक सहित विकास कार्य करवाए जाएंगे। ग्रामीणों द्वारा उन पर जो विश्वास जताया गया है उस पर खरा उतरते हुए गांव को विकास के मार्ग पर लाया जाएगा। इस मौके पर धर्म सिंह पंच, शिव कुमार, पंच श्याम लाल, पंच शांति देवी, पंच गुरमीत, पंच मनप्रीत, पंच सोनू देवी, पंच निर्मला देवी, पंच रवि, बलबीर सिंह, गुलाब सिंह, मदन लाल, राजेश कुमार, सुरेश कुमार, मोहन लाल, ओमप्रकाश, संदीप, मामराज, मंगत, बलदेव, सोनू, रीना देवी, दुलारी देवी, सुनहरी देवी, सुकड़ देवी, सोनू देवी सहित कई ग्रामीण मौजूद थे।

गांव में नहीं था कोई योग्य उम्मीदवार

गौरतलब है कि सरकार की नीति के अनुसार गांव में 8वीं पास महिला प्रत्याशी ना होने के कारण चुनाव नहीं हो सके थे, जिस कारण चुनाव आयोग द्वारा दोबारा घोषित तिथि के चलते शुक्रवार को पढ़ी लिखी बेटी रीना देवी गांव की सरपंच बनी है।

प्राईमरी स्कूल को अपग्रेड करने की मांग की 

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में आज भी सिर्फ प्राइमरी तक स्कूल है। लगभग 40 साल पहले भी लोग इसी स्कूल में शिक्षा ग्रहण करते थे और आज भी इसी स्कूल में। कई बार उन्होंने गांव के स्कूल को अपग्रेड करवाने की मांग रखी लेकिन किसी ने भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। सरकार ने पढ़ी लिखी पंचायत का नारा तो पूरे जोर-शोर से दिया लेकिन स्कूल व्यवस्था को नहीं सुधारा। आज भी कई गांवों में उच्च शिक्षा के लिए व्यापक प्रबंध नहीं हैं। 5वीं कक्षा पास करने के बाद लड़कियां आसपास के गांव में जाती हैं जो लगभग 6-7 किलोमीटर की दूरी पर गांव हैं। लेकिन सरकार ने उनके लिए ना साईकिल देने का कष्ट किया और ना कोई अन्य साधन का ही कोई प्रबंध है। जिसके चलते मजबूरी में उन्हें पढ़ाई से वंचित रहना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार से पुरजोर मांग की है कि गांव के प्राईमरी स्कूल का दर्जा बढ़ाकर अपग्रेड किया जाए।

-पत्रकार कृष्ण प्रजापति की रिपोर्ट पर आधारित

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