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बिजली बोर्ड में आये फाल्ट को ठीक करते समय हुई कर्मी की मौत

हर हफ्ते हो जाती है एक या दो बिजली कर्मचारियों की मौत

July 1, 2016 11:14 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

एक और बिजलीकर्मी जहां निजीकरण के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करते हुए हड़ताल पर थे तो वहीं दूसरी और फाल्ट को ठीक करने गया एक बिजलीकर्मी तारों के बीच उलझा व जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ते लड़ते हार गया। इतना ही नहीं रात भर उसका शव यूं तारों के बीच लटकता रहा और प्रशासन गहरी नींद में सोता भी रहा। हां कुछ प्रयास पुलिस की ओर से हुए भी लेकिन उनकी कोशिशें भी नाकाम नजर आयी।

bijli karamchari

चित्र प्रतीकात्मक है जिसे गूगल से लिया गया है

घटना पूंडरी के गाँव हाबड़ी की है। बिजली कर्मचारी तो दो दिन से हड़ताल पर थे ऐसे में गांव हाबड़ी के बिजली बोर्ड में फाल्ट हो गया। फाल्ट को ठीक करने के लिये बिजली विभाग के अधिकारी स्थानीय बिजली कर्मियों की सहायता ले रहे थे। गांव में ही बिजली का काम करने वाला युवक कर्मबीर बोर्ड में आये इस फाल्ट को ठीक करने के लिये खंभे पर चढ़ तो गया लेकिन खुद से उतर न सका। विभाग की लापरवाही कहें या चूक 11 हजार हाई वोल्टेज तारों के बीच कर्मबीर उलझकर रह गया। सरपंच सहित ग्रामीण मौके पर पंहुचे तो गांव के नौजवान को तारों पर लटका देख सबका कलेजा हिल गया। बिजली अधिकारियों सहित पुलिस को भी इसकी सूचना दी गई। पूंडरी थाना प्रभारी मौके पर पंहुचे और बिजली के आला अधिकारियों को फोन कर बिजली बंद करवाने के लिये कहा लेकिन किसी ने भी बिजली बंद करने की जहमत नहीं उठाई। देर रात तक पुलिस प्रयास करती तो नजर आयी लेकिन शायद उनकी सुनने वाला भी कोई नहीं था।

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ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली को ठीक करवाते समय अधिकारियों ने पिछे से बिजली बंद नहीं की जिसके कारण ऐसा हुआ है। चूक तो हुई है अब जांच में क्या सामने आता है और कार्रवाई क्या होती है और जिस घर का चिराग बुझा है उस घर के अंधेरे में रोशनी के लिये दिया जलेगा या नहीं यह तो समय ही तय करेगा।

हर सप्ताह एक या दो बिजली कर्मियों की जा रही है जान

हाल ही में झज्जर में सड़क चौड़ीकरण के चलते हाईंटेशन शिफ्टिंग का कार्य करते समय भी जींद के सिंध्वी खेड़ा निवासी रोहित की जान भी विभाग की लापरवाही के कारण जा चुकी है। जून महीने में ही नूंह (मेवात) के गांव नारियाला में बिजली के खंभे लगाते समय ठेके पर काम कर रहे खेड़ी कला निवासी 33 वर्षीय जाहुल की मौत भी हुई थी। जून में ही करनाल जिले के संगोहा गांव में भी बिजली का काम करते हुए गांव का ही 32 वर्षीय रामलाल विभाग की लापरवाही के कारण अपने प्राण गंवा चुका है।

मरने वाले कर्मचारियों में पक्के सरकारी कर्मचारियों से लेकर अनुबंध और ठेके पर भर्ती हुए कर्मचारी शामिल हैं तो गांव में बिजली का काम कर रहे युवक भी लापरवाही का खामियाज़ा भुगत चुके हैं। ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन यूनियन के अनुसार पिछले दो वर्षों में बिजली लाइन या कहीं आये फाल्ट को ठीक करते हुए 189 कर्मचारियों की मौत हो चुकी है यह आंकड़ा भी अब पुराना हो चुका है इसके बाद भी कई लोगों की मौत हो चुकी है। अमर उजाला की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में हर हफ्ते औसतन एक से दो कर्मियों की मौत हो रही है। करंट लगकर अपाहिज होने वाले कर्मचारियों की संख्या तो इससे भी कहीं ज्यादा है।

 

क्या है हादसों का कारण

बिजली का काम करने वाले अधिकतर कर्मचारियों की मौत 11 केवी की तारों में उलझ कर करंट लगने से होती है। दरअसल फीडर ओवर क्रोसिंग भी कई बार हादसों का कारण बनती है। बिजली निगमों ने नियमों को धत्ता बताते हुए एक पोल पर 11 केवी की कई लाइनें खींच रखी हैं। कर्मचारी कई बार अपना फीडर बंद कर लाइन पर चढ़ जाते हैं लेकिन दूसरे फीडर की तार में करंट होने से वे इसकी चपेट में आ जाते हैं। इसके अलावा निगम की अनुमति के बिना डायरेक्ट लाइन पर चलने वाले जनरेटर भी हादसों की वजह बनते हैं। सुरक्षा के लिहाज से लाइन पर काम करने वाले बिजली कर्मियों को पांच से सात फीडर बंद करवाने पड़ते हैं। जिसमें चूक होने से कईयों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। कई बार ठेके पर काम करने वालों को काम की पूरी जानकारी का न होना व सुरक्षा उपकरणों का न होना भी जानलेवा साबित होता है।

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हर हफ्ते एक या दो बिजली कमर्चारी हम सबके घरों में उजाला करने के लिये अपने घरों में अंधेरा कर जाते हैं। सरकारी कर्मचारियों के परिजनों को थोड़ी बहुत आर्थिक सहायता तो मिल भी जाती है हालांकि पैसे से व्यक्ति की कमी को पूरा नहीं किया जा सकता लेकिन रोजमर्रा के जीवन की मुसीबतें कुछ कम हो जाती हैं। निजी कंपनियों के तहत ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों के परिजन किस हाल में हैं कोई पूछने वाला नहीं है और जो कर्मबीर जैसे युवक जो सरकारी या ठेके पर किसी भी तरह से विभाग के साथ नहीं जुड़े और स्वतंत्र रुप से अपना कार्य करते हैं उनकी जान चली जाये उनके घर हुए अंधेरे में कोई दिया जलाकर रोशनी करेगा ऐसा अपवाद ही हो सकता है।

(पूंडरी से संवाददाता विरेंद्र पुरी के साथ ब्यूरो रिपोर्ट हरियाणा खास)

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