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हड़ताल – क्या एस्मा इस मर्ज की दवा है

हर जोर जुल्म की टक्कर में हड़ताल हमारा नारा है - बिजली कर्मचारी

June 26, 2016 10:57 pm by: Category: खबर खास 1 Comment A+ / A-

देश का संविधान एक और हमें अभिव्यक्ति की आजादी देता है तो अन्याय, शोषण अथवा अपनी असहमति दर्ज करवाने के लिये अपनी आवाज़ उठाने का अधिकार यानि धरना, प्रदर्शन अथवा हड़ताल आदि करने की स्वतंत्रता भी लेकिन हर चीज का एक दायरा या कह लें हद भी कानूनों के जरिये खींच रखी है। 29-30 जून को बिजली कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल को एस्मा लगाकर अवैध घोषित कर दिया है। आइये समझने की कोशिश करते हैं बिजली कर्मचारियों के आंदोलन और सरकार की मजबूरियों को।

 

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क्यों हो रहा है बिजली कर्मचारियों का आंदोलन

 

दरअसल प्रदेश सरकार ने बिजली निगमों के निजीकरण की योजना बना रखी है जिसके पहले चरण में रोहतक, सोनीपत, झज्जर, पानीपत, पंचकुला और हिसार की दो-दो, फरीदाबाद की चार, गुड़गांव की पांच, और करनाल एवं यमुनानगर की एक एक सब डिवीजन यानि कुल मिलाकर 23 सब-डिवीजन में निजीकरण कर दिया गया है। इन सब-डिवीजन में शिकायत से लेकर रखरखाव तक का पूरा काम पूरी तरह से निजी हाथों में सौंपा गया है हालांकि इस सरकार से इस कदम से कर्मचारी तो एंग्री यंगमैन बने ही हुए हैं आम लोग भी इससे संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि निजी कर्मचारियों को जब यह तक पता न हो कि कौनसी लाइन कहां से बिछी है तो वे फाल्ट कैसे ढूंढेंगें घंटों तक खामी दुरुस्त नहीं होते लोग अंधेरे में रहते हैं और गुस्सा बढ़ता जाता है।

 

निगमों में आउट सोर्सिंग या ठेका प्रथा पर कर्मचारियों की भर्ती को लेकर भी कर्मचारी विरोध में है और नियमित भर्तियों की मांग कर रहे हैं।

 

निजीकरण का कदम उठाने के बाद कर्मचारियों ने जब इसका विरोध किया तो सरकार ने आंदोलनकारी नेताओं का दूर-दराज के इलाके में तबादला तो किया ही साथ ही 127 कर्मचारियों को बर्खास्त भी कर दिया इसके अलावा ठेके पर भर्ती हुए 7 हजार कर्मचारियों को भी हटा दिया।

 

इसके अलावा लंबे समय से जो कर्मचारी कच्चे हैं उन्हें भी नियमित करने की मांग कर्मचारी कर रहे हैं इन्हीं सब मांगों को लेकर कर्मचारी पिछले लंबे समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और 29-30 को प्रदेशव्यापी हड़ताल का फैसला ले रखा है।

 

सरकार की दुविधा

निजीकरण करने के पिछे की वजह क्या है यह सपष्ट रुप से कह पाना मुश्किल है लेकिन पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल को बढ़ावा देना, सेवाओं में सुधार और सरकारी घाटे को कम करना हो सकता है लेकिन क्या वाकई निजीकरण की यह वजहें हो सकती हैं। क्या कॉरपोरेट लॉबी का इसमें कोई हाथ नहीं? जिन सेवाओं की दुरुस्ती का वादा सरकार कर रही है वे तो और बदहाल होती जा रही हैं। हां निजी कंपनियों का मुनाफा जरुर बढ़ने लगा है और साथ ही लोगों पर बिलों का बोझ।

 

हड़ताल पर लगा एस्मा

हरियाणा सरकार ने बिजली कर्मचारियों की हड़ताल पर एस्मा लगाकर हड़ताल को अवैध घोषित कर दिया है। सरकार ने सभी जिला उपायुक्तों को हर हाल में बिजली आपूर्ति बनाये रखने के निर्देश दिये हैं। वहीं बिजली कर्मचारियों ने भी कहा है कि सरकार चाहे कुछ कर ले हड़ताल होकर रहेगी।

 

ये एस्मा क्या बला है

 

एस्मा सरकार के पास एक ऐसा हथियार है जिससे वह जब चाहे कर्मचारियों के आंदोलन को कुचल सकती है विशेषकर हड़ताल पर प्रतिबंध लगा सकती है और बिना वारंट के कर्मचारी नेताओं को गिरफ्तार कर सकती हैं। एस्मा लागू होने के बाद यदि कर्मचारी हड़ताल में शामिल होता है तो यह अवैध एवं दंडनीय माना जाता है।

वैसे एस्मा का तात्पर्य है एसेंशियल सर्विसेज मैनेजमेंट एक्ट जिसे हिंदी में अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून का नाम दिया गया है। हालांकि यह कानून केंद्रीय है और 1968 में इसे लागू किया गया था। राज्य सरकारें इस कानून को लागू करने के लिये स्वतंत्र हैं थोड़े बहुत परिवर्तन कर राज्य सरकारों ने इसे अपना कानून भी बना लिया है और अत्यावश्यक सेवाओं की सूची भी अपने अनुसार बनाई है। हरियाणा में सरकार ने बिजली व पानी को अत्यावश्यक सेवाओं में शामिल किया हुआ है इसलिये सरकार ने बिजली कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल को देखते हुए एस्मा लगाया है।

 

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अपने स्तर पर सरकार भी पूरी कोशिश में है कि हड़ताल न हो हालांकि बातचीत के रस्ते भी खुले रखने की बात सरकार कहती है लेकिन जब भी कर्मचारी सरकार से बातचीत करते हैं तो बात सिरे नहीं चढ़ती। हड़ताल से कर्मचारियों की मांगे पूरी हो जायेंगी इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। और अगर सरकार या प्रशासन एस्मा लगाने में ही आंदोलन को दबाने की सोच रहा है तो नहीं भूलना चाहिये की आंदोलन तो आपातकाल के दौरान भी नहीं रूकते। इसलिये बेहतर विकल्प यही है कि उचित मांगों को पूरा किया जाये और जो मांगे अव्यावहारिक लगती हैं या पूरी नहीं हो सकती उस बारे में कर्मचारियों को विश्वास में लिया जाये और पूरी न होने के कारण बताये जायें तभी सही मायनों में सरकार की नियत और नीति साफ नजर आयेगी।

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