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बकरीद के भोजन पर सरकार की निगाह

September 9, 2016 4:21 pm by: Category: खबर खास, तीज तयोहार 1 Comment A+ / A-

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कहा जाता है कि धर्म और राजनीति को अलग-अलग रखा जाना चाहिए। राजनीति करते वक्त धर्म की आड़ नहीं लेनी चाहिए और धर्म को मनाते वक्त भी राजनीति से अपेक्षा नहीं होती है कि बीच में कोई दखल दे। भारत में हिंदु, मुस्लिम, बोध, जैन, सिक्ख, ईसाई जैसे बहुत से धर्मों के लोग रहते हैं, भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और यहां के संविधान में भी किसी भी धर्म को मानने, प्रचार-प्रसार करने की आजादी दी गई है। यही कारण है कि यहां पर सारे धर्म आजाद हैं और अपनी मर्जी से वो अपने धर्म को प्रचार-प्रसार करते हैं,उसे मनाते हैं। लेकिन हिंदू धर्म मुस्लिम का इतना विरोधी हो जाएगा ये किसी ने सोचा नहीं था। शायद ये भी नहीं सोचा था कि बात-बात पर कभी पाकिस्तान भेजने की नसीहतें पैदा हो जाएगी, घर वापसियां हुआ करेंगी और सरकारें हिंदु धर्म अपनाने पर जोर दिया करेंगी।

भारत को भारत कहते हुए हमारा सीना भले ही गर्व से उंचा हो जाता है। लेकिन ये वही देश है जहां मंदिर में बीफ और मस्जिद सूअर का मांस फेंक देने सांप्रदायिक दंगे अपना हिंसक रूप ले लेते हैं। सरकारें तनाव में आ जाती है, समस्याएं और भी कई तरह की बढ़ जाती हैं। सरकारें मुद्दों पर चुप्पी तक साध लेती है। यहां के पीएम कभी मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार कर देते  हैं तो कभी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए सत्तारूढ़ पार्टी के नेता जो अपने आपको कट्टर मानते है; मुस्लिमों के साथ रोजा इफ्तियार पार्टी में वही टोपी लगाकर शामिल हो जाते हैं। यहां बीफ रखने के शक के आधार पर किसी अखलाक की पीट-पीटकर हत्या कर दी जाती है, तो कभी गांवों में मुस्लिमों के नमाज अदा करने के लिए बनने जा रही मस्जिदें हिंदु बाहुल्य लोगों द्वारा रोक दी जाती है।

क्या हिंदु भी खाते थे गौ मांस ?

खैर कोई बात नहीं, हिंदु और मुस्लिम के बीच का ये तनाव कोई नया नहीं है, शायद दोनों को इसे समझने का प्रयास करना चाहिए। मांस आखिर मांस होता है, चाहे वो गाय का हो भैंस का हो या बकरी का। हिंदु धर्म में भी मोटे तौर पर हर जीव-हत्या को पाप ही माना जाता है, बाकि धर्म भी ऐसा दावा करते हैं। लेकिन बीफ को लेकर जो विवाद और राजनीति होती है मौजूदा सरकार में ज्यादा देखी जा रही। अक्सर मान लिया जाता है कि ये राजनीति है। राजनीति से कहीं ये धर्मनीति ज्यादा मालूम पड़ती है। हिंदू धर्म के लोग गाय को माता मानते हैं और गाय का मांस खाने का विरोध करते हैं। पता नहीं सदा से करते थे या अब करते हैं ये अलग बात है पीछे के बुद्धीजीवियों की बातें पढ़ें तो हमारे संविधान को रचने वाले डॉ. बी आर अंबेडकर लिखते हैं कि प्राचीन हिंदु गौ मांस खाते थे। उन्होंने गोमांस के संबंध में एक निबंध लिखा था, ‘क्या हिंदुओं ने कभी गोमांस नहीं खाया?’

यह निबंध उनकी किताब, ‘अछूतः कौन थे और वे अछूत क्यों बने?’ में उल्लेखित भी हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर शम्सुल इस्लाम ने इस निबंध को संपादित कर इसके कुछ हिस्से बीबीसी हिंदी की वैबसाइट को दिए थे जहां इसे बखूबी पढ़ा जा सकता है। डॉ. अंबेडकर अपने इस लेख में हिंदुओं के इस दावे को चुनौती देते हैं कि हिंदुओं ने कभी गोमांस नहीं खाया। उनके मुताबिक, “गाय को पवित्र माने जाने से पहले गाय को मारा जाता था।

उन्होंने हिन्दू धर्मशास्त्रों के विख्यात विद्वान पीवी काणे का हवाला देते हुए लिखा है कि ऐसा नहीं है कि वैदिक काल में गाय पवित्र नहीं थी, लेकिन उसकी पवित्रता के कारण ही बाजसनेई संहिता में कहा गया कि गोमांस को खाया जाना चाहिए। (मराठी में धर्म शास्त्र विचार, पृष्ठ-180) अंबेडकर लिखते हैं कि ऋगवेद काल के आर्य खाने के लिए गाय को मारा करते थे, जो खुद ऋगवेद से ही स्पष्ट है।

खैर, इतिहास अपनी जगह है, हम अपनी जगह हैं। बीफ के संबंध में ताजा घटनाक्रम मेवात, हरियाणा के मुंडका गांव में फिरोजपुर झिरका क्षेत्र का है। जहां से शिकायत मिली थी कि यहां बिरयानी में बीफ मिलाया जा रहा है। मेवात में गौ रक्षा आयोग ने इस बात की शिकायत भी की, जिसके बाद बिरयानी के सैंपल्स लिए गए। ताजा जानकारी के अनुसार बिरयानी के सैंपल पॉजिटिव पाये गये हैं। जिला प्रशासन मेवात द्वारा इन सैंपल्स को जांच के लिए हिसार की लाला लाजपत राय यूनिवर्सिटी ऑफ वेटरनरी एंड एनिमल साइंस में भेजा गया था।

बिरयानी के नमूने पॉजिटिव

यूनिवर्सिटी सूत्रों के अनुसार यहां पहुंचे सातों के सात सैंपल पॉजिटिव मिले हैं और बिरयानी में गाय का मांस मिला है। इस संबंध में यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर रिसर्च रविंद्र शर्मा ने इतना तो माना है कि बिरयानी के सैंपल आये थे और उनकी रिपोर्ट मेवात प्रशासन को भेज दी गयी है। पॉजिटिव या नैगिटिव के बारे में उन्होंने बिना वीसी की परमिशन के कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। शर्मा ने ये तो माना कि इस तरह के सैंपल टेस्ट करने की तकनीक पीसीआर (पॉलिमर चेन रिएक्शन) हरियाणा में इस यूनिवर्सिटी के पास ही है। वहीं इस मामले में युनिवर्सिटी के वीसी ने भी बात करने से मना कर दिया।

क्या कहा केंद्रीय राज्य मंत्री ने

बता दें कि इसे लेकर कुछ नेताओं द्वारा राजनीतिक मसला बताया जा रहा है तो दूसरी तरफ केन्द्रीय राज्य मंत्री संजीव बाल्यान ने इस मामले को राजनीतिक से प्रेरित होने के आरोपों को नकारते हुए कहा है कि इस मामले में कोई राजनीति नहीं की जा रही है। उन्होनें कहा कि सैंपल लेने का काम जिला प्रशासन का है और वैज्ञानिकों ने इसके सैंपल किये हैं। विदित हो कि बीफ को लेकर हरियाणा में सख्त कानून भी बना है।

हरियाणा में बीफ पर है प्रतिबंध

आपको बता दें कि हरियाणा सरकार ने गौरक्षा और गौ संवर्धन एक्ट के तहत गाय की हत्या, बीफ को बेचने और किसी भी प्रकार से इसके उपभोग करने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। ऐसा करना हरियाणा में अपराध है और इसके लिए 10 साल जेल की सजा और जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है।

बकरीद की वजह से पुलिस मुस्तैद

मुस्लिमों का त्योहार बकरीद अगले सप्ताह में है। जानकारी के लिए बता दें कि कुर्बानी का त्योहार बकरीद रमजान के दो महीने बाद आता है और कुर्बानी के लिए इसका विशेष महत्व है। मुस्लिम धर्म में बकरे की कुर्बानी देकर इस त्यौहार को मनाया जाता है। वहीं इस दिन गाय, बकरी भैंस ऊंट इत्यादि की भी कुर्बानी दी जा सकती है; ऐसा माना जाता है। इसी को मध्यनजर रखते हुए पुलिस और गौरक्षक मुंडका गांव में नजर रखे हुए है ताकि बकरीद के अवसर पर यहां बीफ से जुड़ी कोई घटना न हो। वहीं मेवात का पशुपालन विभाग भी इसे लेकर सजग है।

खैर, जो भी है बिरयानी की इस घटना के बाद सरकार और प्रशासन की तेज दृष्टि बकरीद पर घरों में बनने वाले भोजन पर तो बन ही गई है, कभी सोचा नहीं की धर्मनिरपेक्षता की बात करनी वाली सरकारें त्योहारों के मौके पर लोगों की थाली तक चली जाएगी। अब ये देखना अहम होगा कि आने वाले 13 सितंबर को बकरीद के दिन किस तरह की खबरें सामने आती है और धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र की सरकार उस पर क्या एक्शन लेती है।

-एस.एस.पंवार, कंटेंट एडिटर, हरियाणा खास

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