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तिरंगा यात्रा – क्या देशभक्ति में तिरंगे का सम्मान नहीं होता?

August 23, 2016 12:57 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

9 अगस्त का दिन बहुत महत्वपूर्ण दिन है इसलिये नहीं कि यह दिन एक हारे हुए देश पर मात्र अपने शक्ति प्रदर्शन के लिये परमाणु बम गिराकर पूरे शहर के विनाश और आने वाली नस्लों में विकृतियों के बीजारोपण का दिन है बल्कि इसलिये कि हमारे देश में देशभक्ति की अलख जगाने के लिये तिरंगा यात्राओं का आयोजन इसी दिन से शुरु हुआ है। देशभक्ति के संदेश को प्रतीकों के जरिये ले जाने वाली भाजपा देश भर में देशभक्ति का कितना रंग भर पायेगी यह तो पार्टी के आकलन का सवाल है लेकिन हरियाणा में तो तिरंगा यात्रा से संदेश कुछ ठीक नहीं जा रहा।

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कहीं लहराया उल्टा तिंरगा तो कहीं तिरंगे में हैं चार-पांच पट्टियां

देशभक्ति का भाव जगाने की अलख लेकर निकली यात्रा में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला के सामने ही तिरंगे के सम्मान की जो धज्जियां उड़ी हैं उन पर इन नेताओं से कुछ बोलते नहीं बन रहा। एक और मंच से देशभक्ति भरे भाषण जारी होते हैं तो वहीं दूसरी ओर बेढ़ंगे बने तिरंगे अपने अपमान से शर्मसार झुके नजर आते हैं। इतना ही नहीं फतेहाबाद में तो तिरंगे को औंधा कर लहराया गया। जिन शहीदों की कुर्बानी से तिरंगे का केसरिया रंग सबसे ऊपर गर्व करते हुए लहराता है वहीं इस यात्रा में केसरिये को निचले पायदान पर रख दिया। खैर देशभक्ति के उन्माद हो सकता है ऐसी छोटी मोटी गलती कार्यकर्ताओं से हो गई हो।

जान-बूझ कर नहीं किया कार्यकर्ताओं ने तिरंगे का अपमान – संजीव बाल्याण

प्रदेशाध्यक्ष तो खूब कहते हैं कि हमने तो सबको तिरंगे के सम्मान की सख्त हिदायतें दी हैं। लेकिन बात सिर्फ इतनी भी नहीं है कई जगहों पर तिरंगे को बनवाने में भी लापरवाही दिखती है तिरंगे में तीन की जगह चार रंग कर दिये गये हैं तिरंगे के तीजे रंग यानि हरे में केसरिया भी नजर आता है किसी में किसी कौने में तो किसी में पूरी पट्टी के किनारे पर। हिसार में तिरंगा यात्रा के दौरान केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री संजीव बाल्याण भी शामिल हुए उन्होंने भी कहा कि किसी ने जानबूझ कर तिरंगे का अपमान नहीं किया।

लेकिन जो कार्यकर्ता दूसरों की देशभक्ति का पोस्टमार्टम प्रतिकों के जरिये ही करते हैं और उपराष्ट्रपति तक की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के मौके ढूंढते रहते हैं ऐसे में जब वे खुद इस तरह की गलतियां करें तो सवाल उठने भी लाजमी हैं। एक और बात यह भी है कि तिरंगे को यदि आप किसी प्रतीक के रुप में इस्तेमाल करना चाहते हैं तो उसके भी कुछ कायदे-कानून हैं यदि संविधान की किताब से उन्हें एक बार दोहरा लिया जाये तो शायद कार्यकर्ता ऐसी गलती न करें और हां कार्यकर्ताओं ने तिरंगे अपने घर से कतई नहीं बनवाये होंगे यह काम तो संगठन और पार्टी के स्तर पर ही होता है अब जल्दबाजी में आप इस तरह की गलतियां करेंगें तो आपके आयोजन के लिये तिरंगे के सम्मान के साथ समझौता क्यों हो?

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