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इसे ही नए युग में बहुमत और सर्वमत कहते हैं

March 22, 2017 9:58 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

bjp in goa manipur

पांच राज्यों के चुनाव में उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड में पूर्ण बहुमत से जीतने और मणीपुर, गोवा में बहुमत जुटा कर सरकारें बनाने से उत्साहित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बात बहुत अच्छी कही कि बहुमत मितला है सरकार बनाने के लिए पर सरकार चलती है सर्वमत से। यह तो ऐसी बात है जो सबका साथ, सबका विकास से ही जुड़ी है। बहुमत को सर्वमत में बदलना तो बड़ा शुभ विचार है, लेकिन अल्पमत को बहुमत में बदलने की कला सिर्फ भाजपा ही जानती है। मणिपुर और गोवा में कांग्रेस सिंगल लारजेस्ट पार्टी होते हुए भी सरकार बनाने से चुक गई। भाजपा दूसरे नम्बर पर होते हुए भी बहुमत जुटा कर सरकार बना गई। शिवसेना के सामना ने इस पर टिप्पणी की कि जीतकर हारने वाले को राहुल कहते हैं और बिना चुनाव लड़े मुख्यमंत्री बनने वाले को पर्रिकर कहते हैं।

                दिग्विजय सिंह कहते रह गए कि हम तो राज्यपाल के न्यौते का इंतजार करते रहे और भाजपा ने सरकार बना ली। कांग्रेस के विश्वजीत राणे ने विश्वासमत में भाग ही नहीं लिया। बाद में कांग्रेस की सदस्यता और विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। जहां नितिन गणकरी गोवा में रातोंरात भाजपा को बहुमत में लाने की सफलता की कहानी बयां कर रहे हैं, वहीं पंजाब में अमरेंद्र ङ्क्षसह के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने पहुंचे कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मीडिया से कहा कि मणिपुर व गोवा में भाजपा ने हमारी सरकारें चुरा ली। नहीं, नहीं, राहुल बाबा, इसे ही नए युग में बहुमत और सर्वमत कहते हैं। अब देखों ना पर्रिकर कह रहे हैं कि गोवा में कांग्रेस के प्रभारी दिग्विजय सिंह बस सैर करने आए थे। विधायकों ने अमूल्य सहयोग दिया। वैसे विश्वजीत राणे के पिता प्रताप राणे को रज्यपाल बनाने की चर्चाए हैं। इसलिए शिवसेना ने गोवा में भाजपा सरकार को लोकतंत्र की हत्या बताया है। शिवसेना के मुखपत्र सामना में साफ शब्दों में लिखा है कि गोवा में भाजपा द्वारा फैलाई गई राजनीतिक अराजकता को लोकतंत्र की हत्या के अलावा कोई दूसरा नाम नहीं दिया जा सकता। दिग्विजय तो पहले ही कह चुके हैं कि मंत्री, पैसा और गाड़ी का प्रलोभन देकर विधायकों से बहुमत जुटाया गया है। राहुल गांधी ने भी संसद के बाहर पूछा कि भाजपा ने मणिपुर और गोवा में कितना पैसा फैंका बहुमत जुटाने के लिए?

                किसी वरिष्ठ पत्रकार ने भी टिप्पणी की है कि मणिपुर में भाजपा को स्वच्छ राजनीति की नई शुरूआत करने का अवसर मिला था, लेकिन गवां दिया। कई दलों के नेता कह रहे हैं कि इस तरह सरकारें बनाकर भाजपा कांग्रेस से अलग कहा हैं? क्या फर्क है भाजपा और कांग्रेस में? राज्यपालों को तो और भी जल्दी थी, अपनी कारगुजारी करने के लिए। वे भाजपा के दावों पर विश्वासमत करवाए बिना ही पूरी तरह संतुष्ट थे। महात्मा गांधी कहते थे कि साधन भी पवित्र होना चाहिए। तभी साध्य पाने से बल मिलता है। पर राजनीति एक अंधी दौड़ में बदल चुकी है। जैसे टी-20 में जैसी भी शाट लगा दो, बस जीत मिलनी चाहिए। ऐसे ही राजनीति में कोई नियम, कायदा, गरिमा यह स्वच्छता की नहीं, सिर्फ बहुमत जुटाने की दौड़ है। कल जीता विधायक, आज इस्तीफा दे देता है। यह कैसी आस्था है? यह कैसी विचारधारा है?

                फिल्म मुझे जीने दो का बड़ा प्यारा गाना याद आ रहा है, इस तरह के बहुमत पर :

                तेरे बचपन को जवानी की दुआ देती हूं

                और दुआ देके परेशान सी हो जाती हूं

                ऐसी बहुमत के बल पर टिकी सरकारों को दुआएं देने को दिल तो करता है, पर परेशान इस लिए हूं ये टिकें गी कब तक?

kamlesh-bhartiyaलेखक परिचय

कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर । उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहाइश हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

 

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