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कालाधन कैशलेस – आंध्या की माखी राम उडावै

December 22, 2016 10:04 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

aarthik-aapatkal

काळेधन पर तै बात इब कैशलेस पै ल्याई जा री है। काळा धन तो किते पाया नी जूणसै नै टोह्वैं थे ओ आ लिया बैंका मैं बचे होड़ पिसे भी जमा ना होज्यां इसके भी इंतजाम बांधण की कोशिश करी पर नाकाम अगलै दिन पलटी मारणी पड़ी। नोटबंदी कै दिन 8 नवंबर तै लेकै चालीसमैं इकतालीसमैं दिन तक हालत या है कि 70 कानून छांट लिये पर बात काबू नहीं आयी। न्यून देखां तो लोगां की करड़ाई इतणी चढ़गी के 100 तै 150 के बीच तो लोग जमां सीधे इस फैसलै कै कारण मर लिये। कितणे भूख अर बेकारी मैं दिन तोड़ण लाग रे हैं इसका तो अंदाजा ए नी लाया जा रह्या। लोगां नै एक-एक नयै पिस्सै की तंगी झेलणी पड़ री है तो न्यून किसे किसे पै करोड़ों भी ठ्या रे हैं। घूम फिर कै टीरी खां नै बचावैंगे अर न्यू कंहगे के बैंक आळ्यां नै बट्ठा गोळ कर दिया… बिच्यारा एकला मोदी कित-कित मरै। मखां इस तुर्रमखां नै के बेरा कोनी था। यो तो छाती ठोकै के रुके मारदा सुण्या है, मैं खाऊं न खाण द्यूं। अर न्यू बी सुणी के बै इसकी मर्जी बिना तो पत्ता भी नी हालै फेर या ओड कहाणी क्यूकर होई।

खैर बात या सै के इननै पकड़ लिये ये ‘बोळी गादड़ी के कान, इब छोड़ दें तो मरैं अर ना छोड़ तो भी स्यात। ‘कांध बीच अर खोद बीच आणा’ भी इसी ए सिचुएशन खातर बण्या है। कई उड़ता तीर पकड़णा भी कह दें हैं।

कहण नै तो न्यू भी कैंह हैं के 30 दिसंबर पाच्छै नया सूरज लिकड़ैगा अर सब किमे सही हो ज्यागा। पर लिखवाल्यो या स्थिति इब काबू आण मैं टेम ब्होत लागैगा। मेरै बरग्यां की जिनकी सर री है उननै तो लागै है या जरा सी बात बाकि फर्क ब्होत पड़ रह्या है। देश के कोटिल्य यानि के म्हारे अर्थशास्त्री ऊंवे कोन बरड़ांदे। उननै दिखण लाग री है के देश पै मंदी का साया छाण लाग रह्या है। 5 लाख हजार करोड़ के नुक्सान का अनुमान लगा रहे हैं। आपनै बस या एक रकम लागै है… पर इस रकम तै लाखों लोगां की रोजी रोटी चाल री थी जो खत्म होगी। धंधे ठप्प होगे लोग माथा पकड़े बैठे हैं… पर हां ट्विटर चलाण आल्यां नै इसकी सोधी कौन है इबै हालांकि कुछ तो ट्विटर, फेसबुक अर व्हटस एप पै भी रोवैं हैं पर उनका रोणा गुणगान तळै दबाया जा रह्या है। इब या तो सबनै बेरा है कि जिसकी खाइये बाकळी उसके गाइये गीत यानि के सोशल मीडिया तै ले कै अखबार अर टीवी चैनल तक सारे बाकळी खुवा कै काबू मैं कर राखे हैं। जो थोड़े ब्होत सरमां-सरमीं मैं कोये साची बात दिखावैं हैं वैं देशद्रोही।

अर यें जिक्र करैं हैं कैशलेस का तो आपणै तो कैशलेस नै नंगड़ कह्या करैं मतलब जिसकै ‘धोरै नी आन्ना अर जाणै सारा पान्ना। कोए इन भले आदमियां नै बताणियां हो के पहलां कैशलेस खातर आपणा जुगाड़ तो बांध ल्यो। बैंकां मैं कंप्यूटर तक तो बाबा आदम कै जमानै के पड़े हैं.. आखर तांहि सबनै पढ़णे नी आंदे… कैशलेस बणावैंगे.. चलो मान लिया नौकरीपेशा करण आळे शहरी तबके तो फेर भी क्यूकरे न क्यूकरे इसनै पुगा लेंगें पर गामां की बैंक, क्रेडिड, डेबिट कार्ड अर इंटरनेट तै दूर रहण आळी आबादी किसकै सहारै दिन काटैगी। या फेर इन ‘आंध्यां की माखी राम उड़ावैगा सवा सौ करोड़ की आबादी मैं 2 लाख बैंक बताईये हैं उनमैं भी घनखरे शहरां मैं सैं। इसका के राह लिकड़ैगा?.. ये फेर आच्छे दिनां की ढ़ाळ इसकी भी बाट देखणी पड़ैगी? कुछ और कड़वे घूंट पीणे पड़ैंगें? और मन की बात सुणनी पड़ैंगी? अर पाच्छै गुल्लक सा मुंह बणाकै कंहगे अक यो तो जुमला था।

कालाधन कैशलेस – आंध्या की माखी राम उडावै Reviewed by on . काळेधन पर तै बात इब कैशलेस पै ल्याई जा री है। काळा धन तो किते पाया नी जूणसै नै टोह्वैं थे ओ आ लिया बैंका मैं बचे होड़ पिसे भी जमा ना होज्यां इसके भी इंतजाम बांध काळेधन पर तै बात इब कैशलेस पै ल्याई जा री है। काळा धन तो किते पाया नी जूणसै नै टोह्वैं थे ओ आ लिया बैंका मैं बचे होड़ पिसे भी जमा ना होज्यां इसके भी इंतजाम बांध Rating: 0

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