Sunday , 22 October 2017

Home » खबर खास » काला धन – कहां से आता है कहां को जाता है

काला धन – कहां से आता है कहां को जाता है

December 22, 2016 3:49 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

black-money

-गिरीश मालवीय

इस देश मे काला धन सिर्फ 6% ही नकद रूप मे बच पाता है क्योकि ब्यूरोक्रेट और बड़े पूंजीपति और व्यापारी अपना काला धन साल दर साल विदेशो मे अधिकृत रूप या अनाधिकृत रूप से भेजते रहे है। इस पोस्ट में हम इन अधिकृत रूप और अनाधिकृत दोनों रूपो को समझने की कोशिश करेंगे और यह भी जानेंगे क़ि मोदी सरकार अपने ढाई वर्ष के कार्यकाल मे काले धन के बाहर भेजे जाने के प्रति कितनी गंभीर रही है।

हम पहले काले धन के बाहर भेजे जाने के अधिकृत तरीके (यानी उपहार, दान, चिकित्सा आदि खर्च के रूप में) की चर्चा करेंगे। आप को यह जान कर बेहद आश्चर्य होगा क़ि मोदी जी काले धन के बाहर भेजे जाने के प्रति इतने उदार रहे है क़ि, मोदी सरकार ने सत्ता मे आते ही सबसे पहले यह काम किया कि विदेश मे पैसा भेजने की लिमिट बढ़ा दी। सरकार ने अपने शुरूआती समय में ही विदेशों को धन भेजने की योजना से राशि सीमा सवा लाख डॉलर तक कर दी। लेकिन इतने से ही इनका मन नहीं भरा तो 26 मई 2015 को मोदी सरकार ने इसकी सीमा और आगे बढाकर ढाई लाख डॉलर कर दी। इसका परिणाम यह हुआ क़ि मोदी सरकार आने के बाद भारत से विदशों में भेजी जाने वाली राशि में 130 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। जहाँ मनमोहन सिंह के दौर में साल 2013 में इन रास्तों से विदेश भेजी जाने वाली राशि 10,400 करोड़ थी वहीँ अब यह राशि 2015 -16 में बढ़कर 30 हजार करोड़ पुहंच गयी।

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों की माने तो मोदी सरकार के दौर में ही साल 2016 की बात करें तो अब तक देश से 4.6 बिलियन डॉलर की रकम को विभिन्न तरीकों से देश से बाहर भेजा गया। यानी काला धन बाहर भेजने वालो ने इस छूट का भरपूर लाभ उठाया।

यह तो रही अधिकृत तरीके की बात अब जरा अनधिकृत तरीके से काला धन विदेश भेजे जाने की चर्चा कर ली जाये..सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने 2015 की शुरुआत मे एक बड़े मामले की जांच शुरू की थी आरोप था कि 6,172 करोड़ रुपये की राशि बैंक आफ बड़ौदा से हांगकांग भेजी गई। यह राशि काजू, दलहन और चावल निर्यात के रूप में भेजी गई, जबकि वास्तव में निर्यात हुआ ही नहीं था। कांग्रेस नेता आर एन सिंह ने इस वक्त यह आरोप लगाया था कि 59 कंपनियों से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा में खाते खुलवा करके काजू, चावल तथा दालें खरीदने के लिय यह पैसा हांगकांग भिजवाया गया। घोटाले की यह प्रक्रिया डेढ़ साल से चल रही थी और केंद्र सरकार की नाक के नीचे यह सब कुछ होता रहा लेकिन उन्हें रोका नहीं गया। इसी प्रकार ओरिएंटल बैंक आफ कामर्स की गाजियाबाद स्थित शाखा के माध्यम से भी 550 करोड रूपए हांगकांग भेजे गए। इन मामलों में कार्यवाही के नाम पर बैंक अधिकारियों का निलंबन जैसी कार्यवाही कर कर्तव्य की इति श्री कर ली गयी। इसी संदर्भ में प्रसिद्ध पनामा पेपर लीक को भी याद कीजिये जहाँ पनामा की एक कानूनी फर्म मोसेक फोंसका के कुछ दस्तावेज उजागर हुए थे जिसमें कई भारतीयों द्वारा कागजी कंपनी स्थापित करने एवं बैंक खाता खोलने के मामले सार्वजनिक हुए हैं… और ऐसे ही निजी और सार्वजनिक बैंकों के अनेक मामले अब नोटबंदी के बाद खुल कर सामने आये है।

कहने का तात्पर्य बस इतना है कि ऐसा नहीं है कि कांग्रेसी सरकार के समय काला धन विदेशो मे नहीं भेजा गया होगा पर मोदी सरकार के ढाई साल के कार्यकाल मे भी इस प्रकार की मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने की कोई कार्यवाही नहीं की गयी बल्कि बढ़ावा दिया गया यदि यह खेल पहले दिन से रोक दिया जाता तो मोदी जी का नोटबंन्दी का डिजास्टर स्ट्रोक खेलने की कोई जरुरत ही नहीं होती।

गिरीश मालवीय की फेसबुक टाइमलाइन से साभार

(लेख में दिये विचार लेखक के अपने विचार हैं किसी भी ऊंच-नीच के लिये हरियाणा खास जिम्मेदार नहीं है। यदि आपके पास भी अपने विचार हैं तो उनका स्वागत है आप लेख पर टिप्पणियां कर सकते हैं या फिर जवाबी लेख भी लिखकर हमें मेल कर सकते हैं।)

काला धन – कहां से आता है कहां को जाता है Reviewed by on . -गिरीश मालवीय इस देश मे काला धन सिर्फ 6% ही नकद रूप मे बच पाता है क्योकि ब्यूरोक्रेट और बड़े पूंजीपति और व्यापारी अपना काला धन साल दर साल विदेशो मे अधिकृत रूप या -गिरीश मालवीय इस देश मे काला धन सिर्फ 6% ही नकद रूप मे बच पाता है क्योकि ब्यूरोक्रेट और बड़े पूंजीपति और व्यापारी अपना काला धन साल दर साल विदेशो मे अधिकृत रूप या Rating: 0

Leave a Comment

scroll to top