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ब्लू व्हेल मौत का खेल – बच के रहना रे बाबा

August 23, 2017 9:30 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

बच के रहना रे बाबा बचके रहना रे, बचके रहना रे बाबा तुझपे नज़र है, तेरे पिछे आये तेरे ही दिवाने झूमे नाचे गाये आये रंग जमाने, क्या क्या तोहफे लाये, तू क्या जाने तू क्या जाने? ऊंम्महूं गाने के साथ मत बहकिये यह सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि उन नादानों के लिये ईशारा है कि सतर्क रहो सावधान रहो, ख़तरनाक खेल खेलने बंद करो। किसी के बहकावे में मत आओ, जाने किन-किन बहानों से सोशल मीडिया के बहाने कुछ साइबर अपराधी आपको अपने जाल में फंसाने के लिये प्रयासरत हैं। आपको उन्मादी बनाकर, सपने दिखाकर तरह तरह से रिझाने के लिये कोशिशें कर रहे हैं। दुनिया भर में मौत का यह खेल खिलाकर कईंयो को मौत की नींद सुला दिया गया है। इसी तरह की बला है यह ब्लू व्हेल। आइये जानते हैं मौत के इस खेल ब्लू व्हेल के बारे में।

कहां शुरु हुआ मौत का खेल

दुनिया भर से लेकर भारतीय मीडिया तक विशेषकर सोशल और वेब मीडिया पर इस ख़तरनाक खेल के बारे में कई रिपोर्ट्स और जानकारियां छप चुकी हैं। मसलन कहां पर ख़तरे का यह बीज रोपा गया? किसने किशोरों को अपने जाल में फांसकर उन्हें आत्महत्या करने पर मजबूर करने की सनक पाली? रिपोर्ट्स के अनुसार 2013 में रूस से मौत का यह खेल शुरु हुआ। वहां के एक विश्वविद्यालय से निष्कासित किये छात्र फिलिप बुदेकिन का दावा था कि वही मौत के इस खेल का जनक है। इस खेल की वजह से मौत का पहला मामला 2015 में सामने आया था। सोशल नेटवर्किंग साइट वीकोन्टेक्ट के एक समूह (ग्रुप) एफ57 जिसे डेथ ग्रुप भी कहा जाता था इस मौत की वजह बना। फिलिप बुदेकिन जैसे सनकी का मानना था कि जो लोग किसी के बहकावे में आ जाते हैं वे समाज के लिये मूल्यहीन यानि व्यर्थ हैं। उन्हें खुदकुशी के लिये उकसाकर समाज से उनका सफाया किया जा सकता है। बाद में 16 किशोरों को खुदकुशी के लिये उकसाने के आरोप में उसे रूस की ही एक अदालत ने 3 साल की सजा सुनाई है।

मौत की तरफ बढ़ते 50 कदम

मौत का यह खेल 50 दिनों तक चलता है। इसमें भाग लेने के नियम व शर्तें भी काफी कड़ी बताई जाती हैं। कुछ वेब पोर्टल की रिपोर्ट्स के अनुसार तो एक बार जो इस खेल को खेलने लगता है उसे पूरा खेलना पड़ता है बीच में छोड़ने पर उसे धमकियां दी जाती हैं। इस खेल में सेल्फि डालने से लेकर स्वयं को भिन्न प्रकार से हानि पंहुचाने के कार्य करवाये जाते हैं। एक बार कोई यदि इस मौत के इस खेल की चुनौति स्वीकार कर ले तो उसके पश्चात संदेशों के जरिये उसे प्रतिदिन निर्देश मिलते हैं कि आज उसे क्या करना है। 50वें दिन अंतिम कार्य खुदकुशी करने का होता है।

दुनिया में ब्लू व्हेल की दहशत

ब्लू व्हेल समुद्र का एक विशालकाय जीव है लेकिन मनुष्य को उससे कोई खतरा नहीं है लेकिन ब्लू व्हेल का शिकार मनुष्य अपने लाभ के लिये करता आया है। समुद्री मछली ब्लू व्हेल की दहशत भले ही मनुष्य की बस्तियों में न हो लेकिन उसके नाम से चल रहे गेम ने पूरी दुनिया की वॉट लगा रखी है। वेनेजुएला, ब्राजील, अर्जंटीना, इटली, कीनिया, पुर्तगाल, सऊदी अरब, चीन, रूस आदि दुनियाभर में इस खेल से लगभग 130 मौत हो चुकी हैं। भारत में भी इस खेल से मुंबई, जमशेदपुर, दिल्ली से लेकर कई अन्य शहरों से भी किशोरों के खुदकुशी करने की ख़बरे आने लगी हैं।

भारत में ब्लू व्हेल पर बैन की सिफारिश

भारत में सूचना प्रसारण मंत्री ने गूगल, फेसबुक एवं अन्य सोशल मीडिया एवं वेब मीडिया से इस खेल से संबंधित लिंक हटाने की हिदायत दी हैं। महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने इसे प्रतिबंधित करने की मांग की थी। लेकिन जानकार बताते हैं कि यह इतना आसान नहीं है क्योंकि इस खेल को मैसेजिंग के जरिये चलाया जाता है जिस पर निगरानी रखना थोड़ा मुश्किल है। बहरहाल हम अपनी सावधानी से ही इससे मुक्ति पा सकते हैं।

ब्लू व्हेल ही नहीं ये खेल भी हैं ख़तरनाक

गोस्ट पेपर चैलेंज, सिनमन यानि दालचीनी चैलेंज, चोकिंग चैलेंज, आइस एंड सॉल्ट चैलेंज, कार सर्फिंग चैलेंज जैसे खेल भी काफी ख़तरनाक हैं इनके प्रतिभागियों को भी अपनी सेहत, अपनी जान हथेली पर रखनी होती है बेहतर रहेगा कि आप इन बलाओं से दूर ही रहें।

अंत में सिर्फ इतना ही कहा जा सकता है सावधानी हटी दुर्घटना घटी।

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