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सीएम खट्टर की शर्मनाक टिप्पणी

September 18, 2016 3:04 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

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कहते हैं कि बड़े नेताओं को दलितों, मजदूरों, पीड़ितों और अल्पसंख्यकों की कोई खास परवाह नहीं होती। बात सही भी है, हरियाणा के सीएम खट्टर का हाल ही में आया बयान इस बात की पुष्टि भी करता है। दरअसल सीएम खट्टर गुड़गांव में हरियाणा की 50वीं सालगिरह पर एक कार्यक्रम में आए हुए थे। इस मौके पर जब उनसे पत्रकारों द्वारा मेवात गैंगरेप मामले और बीफ विवाद में सीबीआई जांच के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि ‘ये कोई मुद्दे नहीं हैं, मैं ऐसे छोटे मुद्दों पर ज्यादा ध्यान नहीं देता, आज हमें स्वर्ण जयंती के बारे में बात करनी चाहिए।‘ भले ही सीएम की दिनरात आरती उतारने वाले भक्तजनों के कान पर इस प्रतिक्रिया से जूं तक नहीं रेंगी होगी मगर बुद्धिजीवी वर्ग के लिए ये बयान मायने रखता है।

क्या है मेवात गैंगरेप मामला

आपको बता दें कि गत 24 अगस्त की रात मेवात के डिंगरहेड़ी में गैंगरेप और डबल मर्डर की घटना सामने आई थी। जिसे लेकर पुलिस ने काफी दिन तक कोई प्रभावी एक्शन नहीं लिया था और सरकार के नेताओं की ओर से भी इसे लेकर कोई अहम बयान सामने नहीं आया था। दिल्ली आए पीड़ित पक्ष ने ये भी कहा था कि इस गैंगरेप में आरएसएस के सदस्यों का हाथ है। उन्होनें कहा कि आरोपियों में दो लोग आरएसएस से जुड़े हैं और वे गोरक्षा दल से भी जुड़े  हुए हैं।

बीफ मामला और सरकार

डिंगरहेड़ी के इस वाकये के उपरांत जब सरकार पूरी तरह से घिर गई थी, तो अचानक से मीडिया जगत में बीफ को लेकर मामला जोरों पर उठा और एक बारगी तूल पकड़ गया। हुआ कुछ यूं था कि मेवात के ही फिरोजपुर क्षेत्र के  मुंडका गांव से एक शिकायत मिली थी कि यहां बिरयानी में बीफ मिलाया जा रहा है। मेवात में गौ रक्षा आयोग ने इस बात की शिकायत की, जिसके बाद यहां की सात दुकानों से बिरयानी के सैंपल्स लिए गए और हिसार की लाला लाजपत राय यूनिवर्सिटी ऑफ वेटरनरी एंड एनिमल साइंस में भेजे गए जहां जांच के बाद नमूने पॉजीटिव भी पाए गए। अहम बिंदु ये भी रहे कि क्या हिसार में क्या कोई ऐसा विश्वविद्यालय है जहां पके हुए मीट को बीफ यानि गाय का मांस बता दे ऐसा कोई उपकरण लगा हुआ हो, और क्या मेवात से जो बिरयानी के नमूने लिए गए थे उन्हें सील भी किया गया था या नहीं और मेवात ही क्यों हरियाणा के अन्य इलाकों से नमूने क्यों नहीं लिए गए? खैर…

इतना ही नहीं विवाद उस वक्त और ज्यादा भड़क गया जब हरियाणा गो-रक्षा टास्क फोर्स की इनचार्ज डीआईजी भारती अरोड़ा और गो-रक्षा सेवा आयोग के अध्यक्ष भनी राम मंगला ने ईद से पहले 8 सितंबर को मेवात में हाईवे किनारे पर बने भोजनालयों से बिरयानी के सैंपल लेने की मुहिम शुरू कर दी और बकरीद को लेकर भी सरकार ने प्रशासन को सख्त कर दिया गया कि इस बात का ध्यान रखें कि कहीं कोई गाय तो नहीं काटी जा रही। इससे पहले ये बता देना जरूरी होगा कि भनी राम मंगला और हरियाणा सरकार के मंत्री अनिल विज ने उन नमूनों में गौ-मांस होने की बात कही थी।

एक ओर जहां डिंगरहेड़ी के गैंगरेप और डबल मर्डर के बाद हरियाणा सरकार पूरी तरह से बैकफुट पर आ गई थी तो तुरंत बीफ का मुद्दा उठता दिखाई दिया था जिससे लोगों को यही लग रहा था ये हरियाणा सरकार द्वारा डिगरहेड़ी कांड की जोर-शोर से उठी बात को दबाने की चाल है।

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सरकार की इसे लेकर पूरी तरह से सख्ती दिखाई दी। सभी मंत्रियों के बयान भी इसे लेकर आने लगे। बार-बार गौ-रक्षा कानून की दुहाई दी जाने लगी। बकरीद पर मुस्लिम परिवारों द्वारा गाय काटे जाने की सुगबुगाहटों को लेकर प्रशासन को सख्त कर दिया गया। पुलिस को ये तलाशी लेने लायक बना दिया गया कि वे बकरीद पर जाकर लोगों की थालियां जांच करें कि उन्होनें भोजन में क्या बनाया हुआ है। क्या तब सीएम इसे लेकर गंभीर नहीं थे? यानि क्या प्रशासन बिना सरकार के आदेशों के ही काम कर रहा था?

इतना ही नहीं आपको बता देते हैं कि हरियाणा में राज्य सरकार ने पिछले ही साल गोवंश संरक्षण एवं गो-संवर्धन अधिनियम पास किया है जिसके तहत गोहत्या को 10 साल तक की जेल की सजा और 1 लाख रुपये के जुर्माने के साथ कठोर दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। क्या ये सरकार की गंभीरता नहीं है? बीफ और गैंगरेप को छोटे मुद्दे बताने वाले यशस्वी सीएम क्या ये भूल जाते हैं कि बीजेपी की सरकार आने के बाद ही गौहत्या के संबंध में कानून क्यों बनते हैं? क्या उन्हें ये नहीं पता कि पूरा संघ इन मुद्दों को एक ही नजर से देखता है। क्या वो नहीं जानते कि मेवात मे कथित गैंगरेप होनें से पहले आरएसएस सदस्यों द्वारा युवतियों को ये धमकी दी जाती है कि तुम बीफ खाती हो इसलिए तुम्हारे साथ ऐसा किया जा रहा है।

गंभीर बात तो ये है कि सरकार की स्वर्ण जयंती के असल मायने क्या है? आखिर कैसा गौरवशाली इतिहास रहा है हरियाणा का जिससे कि उस पर फक्र किया जा सके और स्वर्ण जयंती मनाते वक्त हमें गर्व महसूस हो सके। सीएम का बयान तो ये अर्थ भी देता है कि बेशक गायें कटती रहे, दलितों, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होते रहें, मर्डर होते रहें और बलात्कार होते रहें; उन्हें ऐसी बातों  से फर्क नहीं पड़ता। उनके लिए ये छोटी बात हैं उन्हें कोई खास परवाह नहीं है इसकी।

( लेखक एस.एस.पंवार हरियाणा खास के कंटेंट एडिटर हैं )

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