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मौत सींच रही है घग्घर

September 18, 2016 8:30 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

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सिधानी, खाबड़ाकलां और जांडलीकलां में खौफ़नाक हैं कैंसर के मामले

नदियां किसी भी देश की वे नसें होती हैं जिनमें देश का जीवन दौड़ता है। लेकिन यदि इन्हीं नसों के बहते रक्त में यदि नशीले या जहरीले टीके लगने लगें तो जीवन को संकट होना लाज़मी है। दरअसल मैं ये भूमिका ऐसी ही एक नदी के बारे में बांध रहा हूं जो जहरीली हो चुकी है और जिस जीवन के लिये उसे वरदान होना चाहिये उसके लिये अभिशाप बन गई है। यह नदी है घग्घर….

अब आप सोच रहें होंगें कि नदी कैसे जहरीली हो सकती है, नदियां तो पवित्र होती हैं गंगा सी, बिल्कुल सही सोच रहे हैं प्रकृति से जो भी चीजें हमें मिल रही हैं वह पवित्र और स्वच्छ ही मिल रही हैं लेकिन मनुष्य ही है जो अपने मुनाफे के लिये कुछ भी कर सकता है वह पवित्र नदियों को दूषित कर सकता है इतनी जहरीली कि एक परिवार क्या, एक गांव क्या, एक पूरा का पूरा इलाका उससे प्रभावित होकर धीमी मौत मरने लगे।

सिंधानी बुरी तरह प्रभावित

जाखल से महज 12 किलोमीटर दूर रतिया रोड़ पर स्थित है गांव सिधानी… घग्घर के जहर का कहर इस गांव पर पिछले कई दशकों से बरप रहा है। पिछले दस सालों में ही 66 लोगों की मौत यहां कैंसर से हो चुकी है। कैंसर के अलावा दूषित पानी से होने वाली अन्य बिमारियों से भी लोग यहां पीड़ित हो रहे हैं। पिछले कई सालों से लोग अपनी आवाज़ उठाते आ रहे थे लेकिन अब पानी बिल्कुल सर से गुजर जाने पर पूरा गांव लामबद्ध हुआ तो परिणामस्वरूप प्रशासन भी हरकत में आया। सर्वे हुआ तो गांव की यह भयानक तस्वीर भी सामने आयी और उन पीड़ित परिवारों के किस्से भी एक-एक कर अब सामने आ रहे हैं जिनके पूरे के पूरे परिवार कैंसर से तबाह हो गये।

आर्थिक संकट के साए में ग्रामीण

जिन लोगों की मौत हुई चलो वे तो मुक्ति पा चुके अपने दर्द से, अब उनकी तिमारदारी का बोझ कम से कम परिजनों को नहीं सहना पड़ेगा। लेकिन जिन लोगों की आर्थिक हालत ठीक नहीं है उनके घर में जो मरीज़ हैं उनकी दारुण कथाएं किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर देती हैं। आये दिन इलाज के लिये जाने से पहले उन्हें यह सोचना पड़ता है कि अब इलाज के लिये घर में बेचने को क्या बचा है।

कैंसर की वजह

यदि कैंसर का कारण जानने की कोशिश करें तो ऊपरी तौर पर पहला कारण यही लगता है कि लोग जिस पानी को पी रहे हैं वह इतना दूषित है कि उसके पीने से ही कैंसरग्रस्त हो रहे हैं। लेकिन अक्सर यह सवाल पिछे छूट जाता है कि पानी इतना दूषित कैसे हुआ? क्या कारण हैं? क्या सिर्फ सिधानी में ही कैंसर अपनी जड़ें जमा चुका है या इसकी गिरफ्त में अन्य गांव भी हैं?

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असल में असली वजह भी लगभग सभी को पता है, लेकिन राजनैतिक और प्रशासनिक स्तर पर उससे बचने की कोशिश की लगातार कोशिशें हो रही हैं। असल वजह पीने का पानी नहीं बल्कि उस पानी को दूषित करने वाली घग्घर है और उससे बढ़कर असल वजह घग्घर को दूषित करने वाले वे उद्योग हैं जो अपना जहरीला कचरा घग्घर में उड़ेलते हैं।

प्रशासन और उद्योगपतियों की मिलीभगत की एक तस्वीर इसी से सामने आ जाती है कि प्रदूषण नियामक बोर्ड जो मानक तय करता है। उन मानकों की या नदी के प्रदूषण स्तर की जांच क्यों नहीं होती? सिधानी गांव में कैंसर के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले संगठन सिधानी अगेंस्ट कैंसर के कार्यकर्ता गुरचरण (गैरी) बताते हैं कि यदि गांव के पास घघ्गर के प्रदूषण की जांच की जाये तो सच्चाई सबके सामने आ जाये लेकिन ऐसा अब तक हो नहीं पाया।

फिलहाल अच्छी बात यह है कि लंबे संघर्ष के बाद सिधानी के लोगों में एक चेतना जागी है और साथ ही घग्घर से लगते अन्य गांवों भी अब अंगड़ाई लेने लगे हैं। खाबड़ाकलां और जांडलीकलां में कैंसर की भयावह तस्वीर सामने आई है। जांडली कलां में गत दो वर्षों में 20 के करीब लो गों की मौत होना कोई सामान्य बात नहीं है 20 के करीब कैंसर के मरीज मौजूद होना भी महज संयोग या स्वाभाविक बात नहीं है। खाबड़ा कलां में भी कई मरीज मिले हैं। जैसे-जैसे घघ्गर से लगते अन्य गांवों में जांच की जायेगी सच्चाई और सामने आयेगी।

सिंधानी से सबक की जरूरत

हालांकि सच्चाई सबको पता है कि बिमारी की जड़ घग्घर है और घग्घर को दूषित कौन कर रहा है? क्या घग्घर को जहरीली करने वाले इन लोगों की मौत के जिम्मेदार नहीं हैं? और यह हालत सिर्फ घघ्गर की नहीं है अन्य नदियों के साथ भी ऐसा ही हो रहा है यमुना से लगते दिल्ली और उत्तर प्रदेश के इलाकों में भी इसी तरह से कैंसर फैलने के मामले सामने आये हैं। जहां-जहां नदियां जहरीली की जा रही हैं वहां-वहां ऐसे मामले सामने आयेंगें ही और जब तक लोगों को यह अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिये यह कोई खतरा नहीं दिखाई देगा तब तक यह होता भी रहेगा। जरुरत है सिधानी गांव की तरह एक उदाहरणीय सामूहिक लड़ाई के रूप में बदलने की और जब तक यह नहीं होता तब तक सकारात्मक परिणामों की कल्पना महज एक कल्पना ही समझिये…….

मौत सींच रही है घग्घर Reviewed by on . सिधानी, खाबड़ाकलां और जांडलीकलां में खौफ़नाक हैं कैंसर के मामले नदियां किसी भी देश की वे नसें होती हैं जिनमें देश का जीवन दौड़ता है। लेकिन यदि इन्हीं नसों के बह सिधानी, खाबड़ाकलां और जांडलीकलां में खौफ़नाक हैं कैंसर के मामले नदियां किसी भी देश की वे नसें होती हैं जिनमें देश का जीवन दौड़ता है। लेकिन यदि इन्हीं नसों के बह Rating: 0

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