Sunday , 22 October 2017

Home » खबर खास » देश का मौजूदा ढांचा और मजबूरी का कैशलेस इंडिया

देश का मौजूदा ढांचा और मजबूरी का कैशलेस इंडिया

December 21, 2016 11:44 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-
cashless india

cashless india

सुनिये सरकार जी

देश का मौजूदा ढांचा और आपकी मजबूरी का कैशलेस इंडिया।

स्मार्ट सिटी की बजाय स्मार्ट गाँव क्यों नहीं

देश में कुल 650000 गाँव है। जिनमे कुल आबादी का 67 परसेंट अवाम रहता है।

देश में कुल 200000 बैंक ब्रांच हैं जिंनमे से 40000 branches ही गाँवों में है। 6 लाख से ज्यादा गाँवों में बैंक ही नहीं है। देश में कुल 2 लाख एटीएम हैं। जो अधिकतर शहरों में हैं। इन एटीएम में 85 प्रतिशत में विंडो xp चल रहा है जिसकी updation अब माइक्रोसॉफ्ट नहीं देता। यानी पुरानी और बिना अपडेट हो सकने वाली तकनीक पर चल रहा है ढर्रा।

देश में कुल 34 करोड़ बैंक खाते हैं। जिसमे 25 करोड़ जन धन खाते हैं जो एक अभियान के तहत बैंक मित्र खोल गये। बैंक में उनमें से ज्यादातर लोग गये नहीं कभी।

देश में नेट users 31 प्रतिशत है। उन 31 प्रतिशत का 4 प्रतिशत लोग ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं। नेट बैंकिंग या इ वॉलेट उतने भी नहीं चलाते।

देश में डेबिट कार्ड साढ़े छह करोड़ है। क्रेडिट कार्ड ढाई करोड़ हैं

पोस्ट ऑफिस 139000 गाँव में हैं। कुल साढ़े छह लाख गाँवों में से।

आपने पिछले वित्त वर्ष में 9 लाख करोड़ रूपये का टेक्स बटोरा। जिसमें 3 लाख करोड़ डायरेक्ट टेक्स यानि इनकम टैक्स है। और 6 लाख करोड़ indirect tax यानी other than income tax हैं।

देश के कुल 4 करोड़ 90 लाख लोग ही tax प्रदाता है।

आप जब 2014 में आये तब ही आपके दिमाग में होगा कि एक दिन आप देश को कैश लैस इकॉनमी की तरफ ले जाएंगे। यदि आपने ये काम मात्र 2 साल में ही कर देना था तो देश में नोट मुद्रण का प्रोजेक्ट बड़े जोर शोर से क्यों चलाया। तभी से आप डिजिटल इंडिया अभियान के तहत गाँव गाँव को डिजिटल कर देते। मेक इन इंडिया अभियान के तहत देश में ही चिप, डेबिट कार्ड, एटीएम मशीन, v set, sop मशीन, maalware, ऑपरेटिंग सिस्टम आदि का निर्माण करवा डालते। लेकिन ये सभी तो अब आप चीन से मंगवा रहे हैं। हमारी नोटबंदी का सबसे बड़ा फायदा तो चीन को हो रहा है जो दिवाली के त्यौहार के वक्त बहिष्कार का सबसे बड़ा निशाना था। देश पूछ रहा है कि जिस भी किसी देश ने खुद को digitalise किया है तो उसने लगातार एक्सपेरिमेंट किये हैं साइबर सुरक्षा के स्तर पर। आपकी साइबर सुरक्षा की तैयारी क्या है सरकार जी। जिस किसी देश ने कैशलेस किया है खुद को उन्होंने नोटबंदी नहीं की। कैशलेस व्यवस्था समानंतर खड़ी की और 10 सालो में धीरेधीरे नोट वाली मुद्रा हटाते रहे। जिस देश में कैशलेस सिस्टम है उनमें 70 प्रतिशत लोगों के पास कम से कम डेबिट कार्ड तो हैं। उन देशों में इंटरनेट की नूतन्तम स्पीड 50 एमबीपीएस है। हमारे देश में परम आदरणीय श्री मुकेश अम्बानी जी के jio 4g नेटवर्क पर एक साइट भी खुलने की गति चींटी जैसी है। आप ना जाने क्यों अम्बानी जी को नेट क्रांति का दूत बनाकर पेश करना।चाहते हैं जबकि ये तमाम कंपनियां जनता की सरकारी कंपनी बीएसएनएल के ढांचे को use और misuse करते हुए खड़ी हुई हैं। देश में बीएसएनएल का शेयर आज भी 67 प्रतिशत है लेकिन आपके डिजिटल अभियान की अगुआ वह कंपनी नहीं है ये आपकी नीतियों की दिशा बताती है।
आदरणीय सरकार जी। देश का ये आजतक का सबसे बड़ा फैसला माना जा रहा है। देश की प्रगति और देश का बेडा गर्क करने की दिशा में भी। मेरा सोचना है कि आपने उत्तर प्रदेश का चुनाव जीतने के लिए अनर्थशासत्रिय शॉट खेल दिया है अब उसे कवर करने के लिए दूसरा अनार्थशास्त्रिय शॉट खेल रहे हैं। आप फुल टाइम पॉलिटिशियन हैं ये सच है। पोलिटिकल तिकड़म में जन पिस गया है। बेशक आप को एक साल के बाद टैक्स भरपूर मिलेगा लेकिन 9 लाख करोड़ टैक्स हर साल ये देश आपको दे ही रहा है। देश की जनता टैक्स देने से कहाँ इंकार करती हैं। डीजल के एक लीटर में आपका टैक्स 20 रूपये से ज्यादा है। किस नैतिकता के आधार पर इतना टैक्स वसूला जाता है ये क्या जनता ने कभी पुछा आपसे। हर सर्विस पर आपकी 15 प्रतिशत टैक्स की पर्ची हाथ में होती है, हमने कब मना किया देने से सरकार जी। ये देश मिश्रित इकॉनमी के मॉडल पर खड़ा हुआ देश है जिसमे शिक्षा चिकित्सा जल सड़के बिजली सरकार ने अपने हाथ में रखी थी। लेकिन कब आपने ppp के तहत सड़के बनवाकर देश की जनता को कंपनियों के टोल टैक्स के हवाले कर दिया जो रोडवेज़ से भी ज्यादा per km का टैक्स बसूलती हैं। हमने कब विरोध क़िया। हमने कब विरोध किया शिक्षा चिकित्सा बिजली के लिए। कोई गाँव 24 घंटे बिजली क्यों नहीं ले पा रहा इसके लिए कब सवाल किए जन ने। आप आजतक हर गाँव में सरकारी चिकित्सालय नहीं दे पाए। बिमार तो गाँव का आदमी भी होता है ना सरकार जी। वह गाँव के अप्रशिक्षित डॉक्टर से मजबूरी में गोली इंजेक्शन लेना है। देश की 33 प्रतिशत आबादी की आमदनी 50 rs से भी कम है। ऐसे लोगों को मुख्यधारा में लाने का काम सरकार को करना था। देश मांग तो ये रहा है। आपने कैशलेश का झुनझुना पकड़ा दिया हमारे हाथ।

जिस दिन आप स्मार्ट गाँव की बजाय स्मार्ट सिटी का बाजा लेकर उतरे सरकस के मैदान में उसी दिन देश का एक वर्ग समझ गया था कि देश का शाषक देश के मिजाज के हिसाब से नहीं सोच रहा। लोग जब पूछते हैं कि खुद से कि हर शहर में तो सड़क है, सीवर है, स्ट्रीट लाइट हैं, कॉलेज हैं, हॉस्पिटल हैं, इंटरनेट है, पुस्तकालय है, ट्रांसपोटेशन है। और क्या देंगे आप स्मार्ट सिटी में। इतना कुछ एक बार हर गाँव को देने की जिद ठानिये। कृषि इस देश का सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता क्षेत्र है। शहर की और भागती बेरोजगारी की भीड़ को गाँव में रोकिये। खाद्य स्रोत 125 करोड़ लोगो की जरुरत है जो गाँव के लोगो की वजह से उपलब्ध हैं। इन लोगो को digitalise करिये। इन्हें मेक इन इंडिया का मतलब बताईये। इन्हें स्टार्टउपमनी दीजिये। इनके उत्पाद को मंडी दीजिये। इनके गाँव में क्लस्टर हब बनाइये जहाँ इन्हें तमाम जानकारियां ऑनलाइन मिलें और समाधान हो उनका। इतना कुछ करने के लिए 5 साल कम हैं सरकार जी। लेकिन आप शुरू करते तो जनता 50 साल देती क्योंकि यही एक काम है जो 2020 के भारत के लिए चाहिए। विज़न 2020 का भारत कोई और नहीं था। आप के डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया अभियान में मुख्य लाभार्थी विश्वगुरु श्री मुकेश अम्बानी, bussiness गुरु श्री रामदेव और स्किल्ड गुरु श्री paytm ही हैं। देश की जनता आपके विज़न की और देख रही है लेकिन देश की नब्ज पढ़ कर ये तीनो लाभार्थी चांदी कूट गये जबकि तीनो को बाकी के अभियानों से कुछ मतलब नहीं। paytm को मेक इन इंडिया से मतलब नहीं। अम्बानी जी को भी मेक इन इंडिया और स्किल्ड इंडिया से कोई मतलब नहीं और रामदेव जी को तो तीनों परियोजनाओं से कोई मतलब नहीं। बची आपकी startup इंडिया। तो आज के माहौल में जहाँ पुराने धंधे पिट रहे हैं वहां स्टार्टअप के लिये जो माहौल बन रहा था वह 100 फीसदी नकारात्मक हो गया है

आदरणीय सरकार जी। ये वह देश है जहाँ काला धन और भ्रष्टाचार से बड़े मुद्दे जीवन को थोड़ा सा आसान कर देने के हैं। आपकी पूर्ववर्ती सरकारों ने कुछ नहीं किया ये आपके बचने का रास्ता नहीं है। आपकी पार्टी की सरकारें भी रही है लगातार, उनके खाते में कोई बड़ी उपलब्धियां दर्ज नहीं है। दरअसल जन कुछ और चाहता था आपसे। आप किसी और दिशा ले चले उन्हें। यकीन मानिए सरकार जी। आप बेशक एक साल बाद बड़ा टैक्स वसूलने वाली सरकार हो जॉएंगे लेकिन जनता कई सालों तक उठने की स्थिति में भी नहीं आ पाएगी। आपको इस देश की गति को टॉप गियर देना था। आप तो रिवर्स गियर लगा बैठे। और ये तभी होता है जब गाडी में बैठने से पहले इस भ्रान्ति में रहते हैं कि हमें सब आता है ।

virender-bhatia

वीरेंदर भाटिया

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं व पूरा सच में स्तंभ लेखक रहे हैं, हरियाणा के साहित्यकारों में भी लेखक का नाम शुमार है। फेसबुक प्रोफाइल के अनुसार VUENOW Entertainment Pvt Ltd. के निदेशक भी हैं। यह लेख इनकी फेसबुक पोस्ट से साभार ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया जा रहा है, उक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं )

देश का मौजूदा ढांचा और मजबूरी का कैशलेस इंडिया Reviewed by on . [caption id="attachment_1484" align="aligncenter" width="630"] cashless india[/caption] सुनिये सरकार जी देश का मौजूदा ढांचा और आपकी मजबूरी का कैशलेस इंडिया। स्म [caption id="attachment_1484" align="aligncenter" width="630"] cashless india[/caption] सुनिये सरकार जी देश का मौजूदा ढांचा और आपकी मजबूरी का कैशलेस इंडिया। स्म Rating: 0

Leave a Comment

scroll to top