Wednesday , 17 January 2018

Category: शख्सियत खास

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शख्सियत खास

  • रेड सेल्यूट ! कॉमरेड अजीत सिंह ज्याणी

    रेड सेल्यूट ! कॉमरेड अजीत सिंह ज्याणी

      आदमी की महानता बाजार और भीड़ ही तय करे ये जरूरी नहीं, बुद्धिमता या व्यक्तित्व तौर पर कुछ आदर्श हमारे आसपास भी हो सकते हैं। हमारे पास किसी की कितनी भी यादें हो, जिए हुए पल हो, ...

  • प्रो. जीएन साईबाबा का केंद्रीय जेल नागपुर से अपनी माँ को पत्र

    प्रो. जीएन साईबाबा का केंद्रीय जेल नागपुर से अपनी माँ को पत्र

    प्रो. जीएन साईबाबा का केंद्रीय जेल नागपुर से अपनी माँ को पत्र यह कविता प्रो. जीएन साईबाबा ने केंद्रीय जेल नागपुर में अपने अण्डा सेल से लिखी गई है। आशा है कि योग्य दोस्तों को इस महा ...

  • काश मैं सिर्फ एक इंसान होता

    काश मैं सिर्फ एक इंसान होता

    काश मैं सिर्फ एक इंसान होता काश मैं सिर्फ एक इंसान होता मां हिंदू होती, बाप मुसलमान होता या मां मुसलमान होती, बाप हिंदू होता मेरे मौला इससे क्‍या फर्क पड़ता आखिर मालिक तो दोनों का ...

  • पसीने के बल सृजन

    पसीने के बल सृजन

    किसी व्यक्ति को बढ़ी दाढ़ी व घिसे कपड़ों में ऊंटगाड़े पर बैठ नित खेत जाते देख कौन कह सकता है कि यह राजस्थानी का बड़ा कथाकार और कवि है। पर यह सच है। रामस्वरूप किसान राजस्थानी कथा-सा ...

रेड सेल्यूट ! कॉमरेड अजीत सिंह ज्याणी

रेड सेल्यूट ! कॉमरेड अजीत सिंह ज्याणी

  आदमी की महानता बाजार और भीड़ ही तय करे ये जरूरी नहीं, बुद्धिमता या व्यक्तित्व तौर पर कुछ आदर्श हमारे आसपास भी हो सकते हैं। हमारे पास किसी की कितनी भी यादें हो, जिए हुए पल हो ...

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प्रो. जीएन साईबाबा का केंद्रीय जेल नागपुर से अपनी माँ को पत्र

प्रो. जीएन साईबाबा का केंद्रीय जेल नागपुर से अपनी माँ को पत्र

प्रो. जीएन साईबाबा का केंद्रीय जेल नागपुर से अपनी माँ को पत्र यह कविता प्रो. जीएन साईबाबा ने केंद्रीय जेल नागपुर में अपने अण्डा सेल से लिखी गई है। आशा है कि योग्य दोस्तों को इस मह ...

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काश मैं सिर्फ एक इंसान होता

काश मैं सिर्फ एक इंसान होता

काश मैं सिर्फ एक इंसान होता काश मैं सिर्फ एक इंसान होता मां हिंदू होती, बाप मुसलमान होता या मां मुसलमान होती, बाप हिंदू होता मेरे मौला इससे क्‍या फर्क पड़ता आखिर मालिक तो दोनों का ...

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पसीने के बल सृजन

पसीने के बल सृजन

किसी व्यक्ति को बढ़ी दाढ़ी व घिसे कपड़ों में ऊंटगाड़े पर बैठ नित खेत जाते देख कौन कह सकता है कि यह राजस्थानी का बड़ा कथाकार और कवि है। पर यह सच है। रामस्वरूप किसान राजस्थानी कथा-स ...

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सबसे खतरनाक होता है, हमारे सपनों का मर जाना

सबसे खतरनाक होता है, हमारे सपनों का मर जाना

सबसे खतरनाक होता है, हमारे सपनों का मर जाना #Pash मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती ग़द्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती बैठे-बिठ ...

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जनता के साथ खड़े रहने को ही तो वे देशद्रोह कहते हैं!

जनता के साथ खड़े रहने को ही तो वे देशद्रोह कहते हैं!

जनता के साथ खड़े रहने को ही तो वे देशद्रोह कहते हैं!      (देशद्रोह के आरोप में साढ़े छह साल से कानपुर जेल में बंद रहे 73 वर्षीय शिवराज सिंह बगड़वाल अभी 23 अगस्त को जमानत पर छूटकर पर ...

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तू किधर ?

तू किधर ?

तू किधर ? रामधारी खटकड़ ओ महा कवि !  कविता को नीलाम न कर मत रख गिरवी लेखनी को छोड़ चाटुकारिता का साज मत बजा चिरौरी की डफली आश्रय न खोज , ये राजभोग न चख..... कह दे खुलकर जमाने की प ...

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हम सभी के भीतर होते हैं सृजन के बीज: वाजदा खान

हम सभी के भीतर होते हैं सृजन के बीज: वाजदा खान

एस.एस.पंवार : वाजदा मैम आप एक चित्रकार है और चित्रकार होने के साथ-साथ आप एक कवयित्री भी हैं। यानि एक साथ दो कलाओं से आपका जुड़ाव रहा है, तो किसे आप अपना प्रेरणा स्त्रोत मानते हैं, ...

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सर छोटूराम: कैसे बने राम रिछपाल से रहबर ए आजम

सर छोटूराम: कैसे बने राम रिछपाल से रहबर ए आजम

रहबर ए आजम, दीनबंधु, सर, चौधरी छोटूराम शारीरिक रूप से छोटे से कद के इस व्यक्ति के व्यक्तित्व का कद बहुत बड़ा था। वे दीन दुखियों गरीबों के बंधु, रहबर ए आज़म, अंग्रेजी हुकूमत के लिय ...

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शायर-ए-मशरीक़ सर मुहम्मद इक़बाल

शायर-ए-मशरीक़ सर मुहम्मद इक़बाल

  यूनान-मिस्र-रोमा सब मिट गए जहाँ से अब तक मगर है बाक़ी नामो-निशाँ हमारा कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा देशभक्ति और राष्ट्रीय एकत ...

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