Saturday , 18 November 2017

Category: शख्सियत खास

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शख्सियत खास

  • शायर-ए-मशरीक़ सर मुहम्मद इक़बाल

    शायर-ए-मशरीक़ सर मुहम्मद इक़बाल

      यूनान-मिस्र-रोमा सब मिट गए जहाँ से अब तक मगर है बाक़ी नामो-निशाँ हमारा कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता ...

  • राममनोहर लोहिया – गांधी और मार्क्स के बीच की कड़ी

    राममनोहर लोहिया – गांधी और मार्क्स के बीच की कड़ी

    अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।। संस्कृत के इस श्लोक में वर्णित ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की कसौटी पर खरा उतरता था भारतीय समाजवादी विचारक राम मनोहर लो ...

  • क्या वाल्मीकि, कबीर व रैदास के साथ खड़े हो सकते हैं ?

    क्या वाल्मीकि, कबीर व रैदास के साथ खड़े हो सकते हैं ?

    आज वाल्मीकि जयंती है। पूरे देश मे सरकार इसे धूमधाम से मना रही है। जगह-जगह सरकार कार्यक्रम कर रही है। पिछले 2-3 दिनों से वाल्मीकि जयंती की बधाइयों व कार्यक्रमो के सन्देश भी सोशल मीड ...

  • शहीद-ए-आज़म भगत सिंह और इंक़लाब

    शहीद-ए-आज़म भगत सिंह और इंक़लाब

    23 मार्च 1931 भारत की क्रांति के  इतिहास का वो ऐतिहासिक दिन है जिस दिन इंग्लैंड की साम्राज्यवादी सरकार ने साम्राज्यवादी इंग्लैंड के खिलाफ भारत ही नही पुरे विश्व की मेहनतकश जनता द्व ...

महेंद्र कपूर की आवाज और हरियाणवी फिल्में

महेंद्र कपूर की आवाज और हरियाणवी फिल्में

कुछ आवाजें कुछ कलाकारों को अमर कर देती है, या कहें कि कुछ कलाकार अपनी आवाज देकर शब्दों या गीतों को अमर कर देते हैं, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। 9 जनवरी 1934 को अमृतसर में जन्में ...

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जनता के हक की लड़ाई को न्याय-युद्ध कहते थे ताऊ

जनता के हक की लड़ाई को न्याय-युद्ध कहते थे ताऊ

हरियाणा के निर्माता रहे स्वर्गीय चौधरी देवीलाल सिर्फ  स्वतंत्रता सेनानी, किसानों, गरीबों, मजदूरों और कमेरे वर्ग के मसीहा ही नहीं थे बल्कि एक युगपुरुष थे। उनकी करनी और कथनी में कोई ...

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चौ. देवीलाल जयंती विशेषः देश के विकास का रास्ता खेतों से होकर गुज़रता है

चौ. देवीलाल जयंती विशेषः देश के विकास का रास्ता खेतों से होकर गुज़रता है

प्रदेश की लालों से लबरेज राजनीति का दूसरा चेहरा था चौ. देवीलाल। ताऊ के नाम प्रख्यात चौ. देवीलाल चौ. बंसी लाल के बाद प्रदेश में दूसरे लाल के रूप में भी जाने जाते हैं। एक समाजसेवी.. ...

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बाबुल का ये घर बहना, कुछ दिन का ठिकाना है…

बाबुल का ये घर बहना, कुछ दिन का ठिकाना है…

बाबुल का ये घर गोरी बस कुछ दिन का ठिकाना है दुल्हन बनके तुझे पिया घर जाना है बापू तेरे आँगन की मैं तो खिलती कली हूँ इस आँगन को छोड़ क्यों किसी और का घर सजाना है   बेटी बाबुल के घर ...

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राजेंद्र यादवः साहित्य के ‘द ग्रेट शो मैन’

राजेंद्र यादवः साहित्य के ‘द ग्रेट शो मैन’

लम्बी जिंदगी से रूखसती यूं अच्छी तो नहीं गर तीरगी-सा हो जाता सुबह का सितारा कोई   84 साल की उम्र में कलमकार राजेन्‍द्र यादव का चला जाना इतना दर्द नहीं देता अगर वे सुबह के सितारों ...

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साहित्य जगत को अपूर्णनीय क्षति, नहीं रहे प्रोफेसर गुरदयाल सिंह

साहित्य जगत को अपूर्णनीय क्षति, नहीं रहे प्रोफेसर गुरदयाल सिंह

ज्ञानपीठ, पद्मश्री, सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार, चार बार बेस्ट फिक्शन बुक अवॉर्ड एवं पंजाब साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार प्रोफेसर गुरदयाल ...

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तुलसीदास पर विमर्श की जरूरत

तुलसीदास पर विमर्श की जरूरत

विभिन्न धर्मों, भाषाओं, मतों, सम्प्रदायों के देश को समझने के लिए विभिन्न दृष्टियों की भी जरूरत होती है; इसमें कोई दो राय नहीं है पर विधि और कानून को देखें तो समझ ये भी लेना चाहिए ...

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भीष्म साहनीः एक प्रगतिशील कथाकार

भीष्म साहनीः एक प्रगतिशील कथाकार

कहते हैं लेखन जब मानवीय मूल्यों के पक्ष की बात करे तभी वो ‘लेखन’ है। यूं तो हिंदी रचनाकारों के इतिहास में साहित्य के नाम पर खुद के लिए लिखने वालों की भी कमी नहीं रही, मगर जनहित के ...

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वरिष्ठ लोककवि, गायक पंडित जगन्नाथ समचाना से रोशन वर्मा की बातचीत

वरिष्ठ लोककवि, गायक पंडित जगन्नाथ समचाना से रोशन वर्मा की बातचीत

जिले रोहतक म्हं आ जाईये एक बसै गाम समचाणा हेरै के बुझैगी खटक लगी सुण्या जगन्नाथ का गाणा ______________________________________ हरियाणा प्रदेश के लोक संगीत एवं लोक साहित्य के संदर् ...

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लोक कवि कृष्ण चंद – 22 जुलाई को सिसाना में हुआ जन्म

लोक कवि कृष्ण चंद – 22 जुलाई को सिसाना में हुआ जन्म

कृष्ण चंद्र इनका जन्म 22 जुलाई 1922 को लोक कवियों की धरती सोनीपत जिले के सिसाना गांव में हुआ। बाजे भगत और पंडित मांगेराम जैसे लोक कवि भी इसी गांव में जन्में हैं। कविताई के मामले म ...

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