Sunday , 21 January 2018

Category: साहित्य खास

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साहित्य खास

  • रेड सेल्यूट ! कॉमरेड अजीत सिंह ज्याणी

    रेड सेल्यूट ! कॉमरेड अजीत सिंह ज्याणी

      आदमी की महानता बाजार और भीड़ ही तय करे ये जरूरी नहीं, बुद्धिमता या व्यक्तित्व तौर पर कुछ आदर्श हमारे आसपास भी हो सकते हैं। हमारे पास किसी की कितनी भी यादें हो, जिए हुए पल हो, ...

  • अपराधी पेड़

    अपराधी पेड़

    अपराधी पेड़ हमारी जड़े पहचान ली गई हैं  वे सारी चीजें खोज ली गई हैं जो हमें बचाती थी तेज घूप में जलने से बरसात में बहने से ह्यूंन में बर्फ बनने से यह भी खोज लिया गया है नदी कैसे लेती ...

  • विलक्षण प्रतिभा के धनी थे भारतेंदु हरिश्चंद्र

    विलक्षण प्रतिभा के धनी थे भारतेंदु हरिश्चंद्र

    हिंदी साहित्य के इतिहास में आधुनिक काल का आरंभ जिस विलक्षण प्रतिभा के धनी साहित्यकार के ज़िक्र से शुरू होता है, वह सुप्रसिद्ध चर्चित नाम है- भारतेंदु हरिश्चंद्र। एक ऐसे साहित्यकार ज ...

  • सोशल साईट पर अनपढ़ों की जमात

    सोशल साईट पर अनपढ़ों की जमात

    सूचना-तकनीक का विकास वरदान भी है, और अभिशाप भी। पिछले कुछ सालों में मैं देख रहा हूं मेल-मिलाप, बातें, चिंतन, लेखन और पठन की ओर रूझान लगभग खत्म सा होता जा रहा है। तो वहीं फेसबुक, व् ...

मैं हैरान हूँ

मैं हैरान हूँ

मैं हैरान हूँ यह सोच कर किसी औरत ने उठाई नहीं ऊँगली तुलसी पर जिसने कहा --- “ढोल गवांर शूद्र पशु नारी ये सब ताड़ना के अधिकारी!” . मैं हैरान हूँ किसी औरत ने जलाई नहीं ‘मनुस्मृति’ पहन ...

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पैरों से निकलने वाले

पैरों से निकलने वाले

      वर्ण-व्यवस्था   जो जांघ से निकले थे, वे थोड़ा करीब पहुंचे थे सत्य तो वो भी नहीं थे,   मुख से निकलने वाले बचपन के दिनों के उस सफेद झूठ की तरह थे जिसम ...

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सबसे खतरनाक होता है, हमारे सपनों का मर जाना

सबसे खतरनाक होता है, हमारे सपनों का मर जाना

सबसे खतरनाक होता है, हमारे सपनों का मर जाना #Pash मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती ग़द्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती बैठे-बिठ ...

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“चेतावनी परजीवी जौंको को”

“चेतावनी परजीवी जौंको को”

"चेतावनी परजीवी जौंको को" --- रामधारी खटकड़ कर उस दिन को याद महल पै तेरै चढाई हो ज्यागी भूखी जनता काट्टैगी तनै , सिर करड़ाई हो ज्यागी...(टेक) महंगाई तनै बढा-बढाकै मोटा माल कमाया र ...

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तुम बिल्कुल हम जैसे निकले

तुम बिल्कुल हम जैसे निकले

पाकिस्तान जो पिछले लम्बे समय से धार्मिक कट्टरपंथ कि जकङन के कारण मानव मुल्यों कि बर्बादी पर खङा है। पाकिस्‍तान के आम लोग, साहित्‍यकार, संस्‍कृतिकर्मी,  कट्टरपंथ से आजिज हैं। लेकिन ...

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कबीर- धार्मिक आंडम्बरो के खिलाफ लङने वाले महान समाज सुधारक

कबीर- धार्मिक आंडम्बरो के खिलाफ लङने वाले महान समाज सुधारक

कबीर- धार्मिक आंडम्बरो के खिलाफ लङने वाले महान समाज सुधारक विभिन्न साक्ष्यों और विद्वानों के मतानुसार यह ज्ञात होता है कि कबीर अनपढ़ थे, अतः उन्होंने स्वयं कोई भी रचना लिपिबद्ध नही ...

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मैं रोऊंगा नहीं

मैं रोऊंगा नहीं

मैं रोऊंगा नहीं संदीप कुमार  मैं EVM पर भी आरोप नहीं लगाऊंगा मैं नहीं कहूंगा वो धोखे से जीते हैं क्योंकि पूरी चुनावी प्रक्रिया धोखे पर ही टिकी है मैं बस इतना कहूंगा इन हार जीतों क ...

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एक कविता मेरी भी………

एक कविता मेरी भी………

एक कविता मेरी भी..... ना मैं अच्छा लेखक हूँ न ही अच्छा कवि, पर क्या करूँ? मेरी भी कलम समुन्द्र की लहरों की तरह उफान पर थी, डर था कि कहीं कुछ समय बाद शांत न पड़ जाए, इसीलिए चाहा कि ...

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आह्वान

आह्वान

मेरे देश के नौजवानों सच्चाई को समझो दुश्मन को पहचानो शांति सेना का नहीं जनसेना का निर्माण करो।। सन्दीप कुमार अपनी कविता के माध्यम से आवाज उठा रहे है कि रोजाना हो रहे सैनिको और आदि ...

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सीढियों पर

सीढियों पर

तब प्रिंट पत्रकारिता के प्रशिक्षण पर था मैं। शहर के बस स्टैंड से टाउन पार्क के पास बने ऑफिस तक रोज पैदल चलना होता था। बीच में रेलवे लाईन के उपर पुल बना हुआ था जिसे पार करना पड़ता ...

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