Tuesday , 21 August 2018

Category: साहित्य खास

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साहित्य यानि कि कविताएं, कहानियां, पुस्तक समीक्षाएं, फिल्म समीक्षाएं, लोकगीत, रागनी आदि साहित्य से जुड़ी तमाम विधाओं के लिये यह सेक्शन है।

साल का पहला सपना

साल का पहला सपना

साल का पहला सपना              किसी महान आदमी का कथन है कि सपने वो नहीं होते जो हमें नींद में आते है बल्कि सपने वो होते है जो हमें सोने नहीं देते। पर सपने तो सपने होते है। हर रोज न ...

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एक हमारी और एक उनकी

एक हमारी और एक उनकी

एक हमारी और एक उनकी एक हमारी और एक उनकी मुल्क में हैं आवाजें दो अब तुम पर है कौन सी तुम आवाज सुनों तुम क्या मानो हम कहते हैं जात धर्म से इन्सा की पहचान गलत वो कहते है सारे इंसा एक ...

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ए! नए साल

ए! नए साल

ए! नए साल   - संदीप कुमार   ए! नए साल कुडे के ढेर से खाना बटोरकर खाने की चाह मेरी नहीं है कड़कड़ाती ठंड में नंगे बदन ठिठुरने की चाह मेरी नहीं है नहीं है मेरी चाह रात खुल ...

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नया वर्ष हो ऐसा 

नया वर्ष हो ऐसा 

नया वर्ष हो ऐसा  नया वर्ष हो ऐसा  कि बचे रहें सपने  बची रहें उम्मीदें  बची रहे फिर से उड़ने की चाहत  बचा रहे कुछ हरापन, थोड़ा भोलापन, थोड़ी शिशुता  थोड़ा युवापन और क्षितिज पर थोड़ी लाल ...

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कैसे हो कवि

कैसे हो कवि

कैसे हो कवि तुम प्रतिबंधित नहीं हो  तुमसे है प्रतिबंध तुम्हारे शब्दों से डर जाती है सरकार तुम्हारी उपस्थिति से कानून के पैर होने लगते हैं कमजोर पुलिस की सांस अटक जाती है छाती में ...

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मैं हैरान हूँ

मैं हैरान हूँ

मैं हैरान हूँ यह सोच कर किसी औरत ने उठाई नहीं ऊँगली तुलसी पर जिसने कहा --- “ढोल गवांर शूद्र पशु नारी ये सब ताड़ना के अधिकारी!” . मैं हैरान हूँ किसी औरत ने जलाई नहीं ‘मनुस्मृति’ पहन ...

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पैरों से निकलने वाले

पैरों से निकलने वाले

      वर्ण-व्यवस्था   जो जांघ से निकले थे, वे थोड़ा करीब पहुंचे थे सत्य तो वो भी नहीं थे,   मुख से निकलने वाले बचपन के दिनों के उस सफेद झूठ की तरह थे जिसम ...

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सबसे खतरनाक होता है, हमारे सपनों का मर जाना

सबसे खतरनाक होता है, हमारे सपनों का मर जाना

सबसे खतरनाक होता है, हमारे सपनों का मर जाना #Pash मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती ग़द्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती बैठे-बिठ ...

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“चेतावनी परजीवी जौंको को”

“चेतावनी परजीवी जौंको को”

"चेतावनी परजीवी जौंको को" --- रामधारी खटकड़ कर उस दिन को याद महल पै तेरै चढाई हो ज्यागी भूखी जनता काट्टैगी तनै , सिर करड़ाई हो ज्यागी...(टेक) महंगाई तनै बढा-बढाकै मोटा माल कमाया र ...

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तुम बिल्कुल हम जैसे निकले

तुम बिल्कुल हम जैसे निकले

पाकिस्तान जो पिछले लम्बे समय से धार्मिक कट्टरपंथ कि जकङन के कारण मानव मुल्यों कि बर्बादी पर खङा है। पाकिस्‍तान के आम लोग, साहित्‍यकार, संस्‍कृतिकर्मी,  कट्टरपंथ से आजिज हैं। लेकिन ...

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