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चैत्र (CHAITRA) – चैत का चितचोर महीना

जानें चैत्र मास के व्रत व त्यौहार

March 10, 2017 12:13 am by: Category: तीज तयोहार Leave a comment A+ / A-

चैत का महीना चितचोर यानि के दिल नै चुराण आळा महीना मान्या जा है क्योंकि इस टेम प्रकृति की छटा भी न्यारै ढ़ाल की हो सै, नई-नई काच्ची काच्ची कोपल, पेड़ पौध्यां कै ऊपर आण लाग ज्या, दूसरा ऋतुराज बसंत का महीना भी चैत मान्या जा है जो कि बहुत ही रोमैंटिक ऋतु मानी जा है। सबतै खास बात इस महीनै की या सै के देसी साल का यू पहला म्हीना होवै सै यानि के आपणा नया साल तो इसे महीनै तै शुरू होवै सै। जन-जीवन लोग-बागां मैं एक नई ऊर्जा एक नया उत्साह इस टेम देखण नै मिलै है।

क्यों पड़या इस महीनै का नाम चैत (चैत्र नामकरण CHAITRA MAAS NAAMKARAN)

देसी महीनां के सारे नाम पणवासी के दिन चांद जिस भी नक्षत्र मैं हो उस महीने का नाम उसे पै धरया गया है। इसा ज्योतिष बतावै है कदे न्यू सोच ल्यो के हाम या नई जानकारी दे रे हां। अर ये नक्षत्र ऊ सूणण मैं तो नाम माणस बरगा लागै है पर हैं सारे चांद की पत्नी। पर आपां वा बात नहीं करांगे आपां बात कर रे हां चैत की तो पणवासी नै चांद चित्रा नाम के नक्षत्र मैं होण कै कारण इसका नाम पड़या है चैत्र यानि आपणै आळा चैत। हालांके इस महीने गेल और भी कई कहाणी जुड़ री हैं ज्यूकर न्यू मान्या जा है के सृष्टि की शुरुआत ब्रह्मा नै इसे महीनै के शुक्ल पक्ष यानि के चांदण लागदे करी थी। न्यू भी के ज्यब जग परळो माच री थी तो विष्णु नै मतस्य का अवतार लेकै मनु किसे ऊंचै टीलै पै छोड़या था ताकि वो बच सकै अर दुनिया आगै बढ़ सकै। आओ इब जाणा इसके खास दिनां कै बारै मैं।

चैत के बरत त्यौहार (चैत्र व्रत त्यौहार CHAITRA VRAT TYOHAR)

नया साल – वैसे तो सारी दुनिया एक जनवरी तै नया साल मनाया करै पर आपणै आळा यानि देसी हिसाब किताब वित्तिय वर्ष के लगभग गेल्यां चालै है यानि नया साल चैत के महीनै की पहली तिथि यानि प्रतिपदा फाल्गुन पूर्णिमा तै अगलै ए दिन शुरु हो ज्या है। इसनै संवत्सर भी कह दें  हैं। पर आपणा तो देसी साल कह्या जा है।

पापमोचिनी एकादशी – अंधेर की ग्यारस यानि चैत के महीने की कृष्ण एकादशी पापां का नास करण आळी मानी जा है। जो पाप करदे हों उन खातर बड़ा काम का दिन है जो नहीं करदे वैं ऐश करो, कोए टैंनसन बाजी नी। जिनकै धोरै बोळा पिस्सा है वैं किसे गरीब नै दान करदेंगें तो बड़ा पुन मिलैगा हालांकि जिसकै धोरै घणा है उसका दिल उतणा एक कमजोर भी पाया जा है या दान आळी मार भी गरीबवा पै पड़ै है। खैर देख लियो आपणी श्रद्धा कै अनुसार।

अमावस्या (चैती अमावस CHAITI AMAVASYA) – चैत की मौस भी खास दिन है क्योंकि मौस यानि अमावस्या तो सारे महीन्यां की खास मानी जां हैं। कुरूक्षेत्र तै लेकै नेड़ धोरै के तीर्थां पै न्हाण जाण आळी बुढ़ी-ठेरी तो इब भी बच ए रही हैं। अर जिस मौस नै ग्रहण लागैदा हो उस दिन तो तीर्थ के घाटां पै पां टेकण नै जगहां नी पांदी। खैर चैत की मौस नै इसा कुछ नहीं है। मेरी सलाह मानो तो ताजै पाणी की बालटी भर कै चार डोलू पाणी के उसे के गेर लियो क्यां नै किसे जोहड़ पै जाकै सड़े होड़ पाणी मैं डूबकी लगाओ

नवरात्र (NAVRATRI) नवरात्रे भी इसे महीनै मैं शुरु होया करैं। इननै वासंती नवरात्र भी कहदे हैं।

राम नवमी (RAM NAVAMI) रामनवमी यानि के राम नोमी भी इसे महीनै मैं चांदण की नौमी नै मनाई जा या करै। काम की बात या सै के जो ब्याह खातर साह्यै (विवाह मुहूर्त) की बाट देखता हो तो राम नोमी नै कुछ देखण की जरूत नी होंदी यो दिन अबूझ मुहूर्त का मान्या जा है।

कामदा एकादशी (KAMDA EKADASHI) चांदणी एकादशी का नाम कामदा लिया जा है। लोभी लालची यानि जो क्याएं की कामना राखदें हों अर जिननै खुद की मेहनत पै भरोसा ना हो वैं यो व्रत जरूर करैं। बाकि सुणी तो न्यू ए है कि हिम्मत का राम हिमाती हो सै। खूबैत करो बिना बरत के भी काम चाल ज्या गा। जिसी नीत राखोगे उसी बरकत हो जेगी।

चैत्र पूर्णिमा (CHAITRA PURNIMA चैती पूर्णमासी) – चैत की पणवासी इस दिन जिसा लेकै देसी नयै साल का पूरा चांद देखियो आच्छा लागैगा। बड़े बड़े शहरां मैं रहण आळे जिननै छात ए नसीब नहीं होंदी उन खातर या बात काम की कोनी फेर भी जै ललक हो तो रात नै अपणै पार्टनर गेल किसे पार्क मैं घूमण लिकड़ सको हो अर किसे खुली जगहां पै जाकै चांद नै थाम भी देख सको है।

चैत का चितचोर महीना आप सबनै मुबारक हो, हरियाणा खास की ओड़ तै प्यार भरी राम राम

 

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