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चौधरी चरण सिंह जयंती – जानें चौधरी चरण सिंह का हरियाणा कनेक्शन

December 23, 2016 11:56 am by: Category: शख्सियत खास Leave a comment A+ / A-

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आज पूरा देश किसान दिवस मना रहा है। यह अलग बात है कि किसानों की दुर्दशा आज किसी से छुपी नहीं है। लेकिन ऐसे विकट समय में ही आज के नेता चौधरी छोटूराम व चौधरी चरण सिंह जैसे नेताओं से सीख ले सकते हैं कि कैसे किसानों के दिल में अपनी जगह बनाई जा सकती है। 23 दिसबंर का दिन पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती का दिन है। वे मानते थे किसानों के साथ कृतज्ञता से पेश आना चाहिये और उन्हें उनकी मेहनत का फल अवश्य मिलना चाहिये। चौधरी छोटूराम की तरह ही चौधरी चरण सिंह भी किसानों के सर्वमान्य नेता रहे हैं। देश के पांचवे प्रधानमंत्री बने लेकिन बतौर प्रधानमंत्री उन्हें कुछ खास करने का मौका नहीं मिला और संसद में गये बिना ही पद से इस्तीफा देना पड़ा था लेकिन केंद्र में वित्त मंत्री व उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी नीतियों के केंद्र में किसान जरुर रहे। उन्होंनें देश में भूमि सुधारों पर भी काम किया।

चौधरी चरण सिंह संक्षिप्त परिचय

पूर्व प्रधानमंत्री रहे चौधरी चरण सिंह को किसानों के विकास में अहम योगदान के लिये जाना जाता है। उनका मानना था यदि किसी भी देश व प्रदेश के विकास के लिये किसानों की खुशहाली बहुत जरुरी है। किसानों को फसलों के वाज़िब दाम मिल सकें, इसके लिये भी वह प्रतिबद्ध थे। उनका जन्म 23 दिसंबर 1902 को उत्तर प्रदेश के नूरपुर गांव में हुआ था। हालांकि जब उन्होंने होश संभाला यानि उनके जन्म के लगभग 6 साल बाद उनके पिता चौधरी मीर सिंह सपरिवार जानी खुर्द गांव आकर बस गये। फिर इसी गांव की मिट्टी में वे पले बढ़े।

चौधरी चरण सिंह का हरियाणा से नाता

हरियाणा से भी उनका गहरा नाता है। 1925 में उनका विवाह रोहतक के गांव कुंडल में कट्टर आर्यसमाजी परिवार में चौधरी गंगाराम की पुत्री गायत्री देवी से हुआ जो उस समय जालंधर कॉलेज से स्नातक थी।

उन्होंने मेरठ कॉलेज से कानून की पढ़ाई करने के बाद गाज़ियाबाद में वकालत शुरु की। उनके बारे में यह प्रचलित है कि वे उन्हीं लोगों का मुकदमा लड़ने के लिये तैयार होते थे जिनमें उनका पक्ष न्यायपूर्ण लगता था। 1929 में लाहौर के कांग्रेस अधिवेशन के बाद उन्होंने गाजियाबाद में ही कांग्रेस कमेटी का गठन किया। 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन के चलते नमक कानून तोड़ने पर उन्हें 6 महीने की सजा भी हुई। इसके बाद वे पूर्ण रूप से आज़ादी की जंग में कूद गये।

चौधरी चरण सिंह ने किसानों के लिये क्या किया

आजादी के बाद उन्हीं की बदौलत उत्तर प्रदेश में 1 जुलाई 1952 जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ। पटवारी राज को खत्म कर लेखापाल के पद का सृजन भी इन्होंने ही किया।

इन्होंने ही 1954 में उत्तर प्रदेश भूमि संरक्षण कानून पारित करवाया।

3 अप्रैल 1967 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने लेकिन 17 अप्रैल 1968 पद से इस्तीफा दे दिया मध्यावधि चुनाव में उन्हें पुन: सफलता मिली और 17 फरवरी 1970 को वे दौबारा यूपी के मुख्यमंत्री बने

आपात काल के बाद इंदिरा गांधी की हार हुई और जनता पार्टी की सरकार बनीं जिसका नेतृत्व मोरारजी देसाई कर रहे थे। इस सरकार में चौधरी चरण सिंह को गृहमंत्री व उप-प्रधानमंत्री बनाया गया। इस समय उन्होंनें मंडल व अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना की।

जब वे केंद्र में वित्त मंत्री (1979) बने व नाबार्ड (NABARD – National Bank for Agriculture and Rural Development) यानि राष्ट्रीय कृषि व ग्रामीण विकास बैंक की स्थापना की।

28 जुलाई 1979 को उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने संसद में बहुमत पेश करने के लिये उन्हें 20 अगस्त तक का समय दिया लेकिन इंदिरा गांधी द्वारा 19 अगस्त को समर्थन वापस लेने के कारण उन्हें अपना त्यागपत्र देना पड़ा।

लेखक भी रहे हैं चौधरी चरण सिंह

चौधरी चरण सिंह एक अच्छे लेखक भी थे, वे कानून से पहले विज्ञान के विद्यार्थी भी रहे हैं। अंग्रेजी भाषा पर उनका अच्छा अधिकार था। अबॉलिशन ऑफ ज़मींदारी, लिजेंड प्रोपराइटरशिप एवं इंडियाज़ पावर्टी एंड इट्स सोल्यूशंस नामक पुस्तकें उन्होंने लिखी हैं।

चौधरी चरण सिंह का निधन 29 मई 1987 को हुआ। अब उनके बेटे अजीत सिंह ‘राष्ट्रीय लोक दल’ पार्टी के अध्यक्ष हैं जो कि पूर्व में केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में अजीत सिंह की पकड़ मजबूत मानी जाती है।

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