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पिछले 8 माह से बिना सरपंच वाला गांव बेगपुर

August 16, 2016 8:55 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

न गांव में उच्च शिक्षा का स्कूल, दूर भेजने में इज्जत का डर, ऐसे कैसी पढ़ेगी और बढ़ेगी बेटियां ! ये कहना है बेगपुर गांव की रहने वाली रेखा का। वहीं गांव की रीना कहती है कि ‘सरकार पढ़ी लिखी पंचायत तो चाहती है लेकिन आज तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ सुधार’ जी हां! ऐसा हो सकता है। बताया जा रहा है कि ढांड के बेगपुर गांव में 8वीं पास सरपंच उम्मीदवार ढूंढने से भी नहीं मिल रही। जबकि सरपंच पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।

फिलहाल इस जरूरत को पूरा करने के लिए गांव के जो लोग बाहर जाकर बस गए थे, उनके यहां कोई आठवीं पास महिला की पड़ताल की जा रही है। दूसरा विकल्प लोगों ने उम्र व योग्यता पूरी करने वाली बहू का रिश्ता ढूंढना शुरू कर दिया है। प्रदेश सरकार ने 11 अगस्त को शैक्षिक योग्यता तय की थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने 28 अगस्त तक इस पर रोक लगा दी थी। गांव बेगपुर के लोगों को लगा था कि हाईकोर्ट से राहत मिल जाएगी।

लेकिन अब सरकार हाईकोर्ट में पेश किए गए 70 पेज के हलफनामे में कहा था कि दो सितंबर 2015 को शुरू हो रहे मानसून सत्र में सरकार बिल लाएगी। जिसके बाद बेगपुर के लोगों ने भी सरकार के रुख को देखते हुए दोबारा पढ़ी-लिखी बहू की तलाश शुरू कर दी थी । तीन हजार की आबादी वाले गांव मे सारे राजनीतिक गणित प्रदेश सरकार ने बिगाड़ दिए हैं।

एक योग्य उम्मीदवार का अंदेशा

महिला निर्मला ने दावा किया था कि वह आठवीं पास है और दो दिन में मायके से मार्कशीट मंगवा लेगी। लेकिन अब वह भी आठवीं फेल निकली। पंच दरिया राम के लड़के का रिश्ता पहले से ही तय था। उनकी होने वाली बहू दसवीं पास थी । उसे चुन्नी ओढ़ाकर लाने की बातचीत सिरे नही चढ़ पाई थी। ऐसे में सभी उम्मीदवार सरपंची की दौड़ से बाहर हो गए थे।

यह है समस्या

गांव के पूर्व सरपंच राजसिंह, ग्रामीण राजकुमार, गुरदेव सिंह कार्यकारी सरपंच के पति, सिंघा राम कार्यकारी महिला सरपंच के ससुर आदि ग्रामीणों ने बताया कि जनवरी में उनके गांव में कोई भी महिला प्रत्याशी 8 वीं पढ़ी लिखी नही थी जिसके कारण गांव में कोई भी सरपंच नही बन  पाई। उसके बाद मई 2016 में प्रशाशन द्वारा 7 पंचों  वाल्मीकि समुदाय की 7 वीं क्लास पास निर्मल देवी को कार्यवाहक सरपंच बना दिया गया। उसने सफाई करवाई, गांव में कुछ गलियां बनाई, जोहड़ का घाट पक्का करवाया गया, पंचायत फंड से ही गांव में पेयजल के लिए पाइप लाइन बिछवाई गई। ग्रामीणों ने बताया कि अगर गांव में सरपंच होता तो शायद ज्यादा विकास होता।

ये है अनपढ़ता की असली वजह

गांव की कुछ पढ़ी लिखी महिला रेखा और विद्यार्थी लड़की रीना ने बताया कि इस गांव में कोई भी 8 वीं पास महिला सरपंच प्रत्याशी ना होने का सबसे मुख्य कारण है गांव में आज भी सिर्फ प्राइमरी तक स्कूल होना। लगभग 40 साल पहले भी लोग इसी स्कूल में शिक्षा ग्रहण करते थे और आज भी इसी स्कूल में। कई बार उन्होंने गांव के स्कूल को अपग्रेड करवाने की मांग रखी लेकिन किसी ने भी इस तरफ कोई ध्यान नही दिया जिसका नतीजा ये रहा कि गांव में कोई भी आठवी पास कैंडिडेट नही मिल रहा और पुरे हरियाणे में गांव का नाम इस कमी को लेकर चर्चाओं में हैं।

व्यवस्था में नहीं हुआ सुधार

सरकार ने पढ़ी लिखी पंचायत का नारा तो पूरे जोर शोर से दिया लेकिन स्कूल व्यवस्था को नहीं सुधारा। आज भी कई गाँवो में उच्च शिक्षा के लिए व्यापक प्रबन्ध नही हैं। पांचवी करने के बाद लडकिया आसपास के गांव में जाती हैं जो लगभग 6-7 किलोमीटर की दूरी पर गांव हैं। लेकिन सरकार ने उनके लिए ना साईकिल देने सौगात दी और ना कोई अन्य साधन का ही कोई प्रबन्ध है। मजबूरी में उन्हें पढ़ाई से वंचित रहना पड़ता है।

गांव में विकास कार्य रुके,  गन्दगी का साम्राज्य

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सरपंच न होने के कारण बेगपुर गांव के सभी विकास कार्य ठप्प पड़े हुए हैं। गांव में गन्दगी है। हर तरफ नाले टूटे हुए हैं ,गलियों में भी पानी बहता रहता है। ग्रामीण परेशान हैं, समस्या बताएं तो किसे बताएं ?  एक ग्रामीण ने बताया कि कार्यवाहक सरपंच अपने पति से झगड़ कर मायके में चली जाती है। मई से लेकर अब तक काफी बार वो साईन करवाने के लिए भी बुलानी पड़ती है।

गांव की साक्षरता दर बहुत कम

गुर्जर बहुल गांव में साक्षरता दर बहुत कम है। तीन हजार की आबादी वाले गांव में आज भी प्राइमरी स्कूल है। वाल्मीकि समाज के 50 परिवार हैं। पूरे गांव के 1070 वोटर हैं। अनुसूचित जाति के 133 वोटर हैं।

जल्द करवाया जायेगा सरपंच का चुनावः बीडीपीओ

इस बारे में सम्पर्क करने पर कैथल के बीडीपीओ सुरेंद्र शर्मा और ग्राम सचिव विनोद कुमार ने बताया कि अगस्त तक सारी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएँगी और सितम्बर के प्रथम सप्ताह तक गांव बेगपुर में  सरपंच पद का चुनाव करवा दिया जायेगा। जिला कैथल में ये अकेला गांव बिना चुनाव के रह गया था।

( हरियाणा खास के लिए ढांड से कृष्ण प्रजापति की स्पेशल रिपोर्ट )

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