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धनतेरस – लक्ष्मी आती नहीं जाती हैं इस दिन पढ़ें कहानी

October 28, 2016 4:36 pm by: Category: खबर खास, तीज तयोहार Leave a comment A+ / A-

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धनतेरस कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यानि तेरस के दिन मनाया जाने वाला बहुत ही खास त्यौहार है दरअसल इस दिन से ही दिवाली के त्यौहारों की शुरुआत होती है। इस दिन खरीददारी को बहुत महत्व दिया जाता है। खास तौर पर नये बर्तन खरीदना जरुर शुभ माना जाता है। इस दिन लक्ष्मी पूजा भी की जाती है इसकी एक बड़ी ही रोमांचक कहानी है।

धनतेरस पर लक्ष्मी पूजा से जुड़ी पौराणिक कहानी

वैसे तो धनतेरस से लेकर दिवाली तक सभी खरीददारी करते हैं लेकिन किसानों के लिये तो यह अवसर साल भर की रूकी हुई खरीददारी करने का होता है। दरअसल फसल पककर तैयार होती है और मंडियों में बेचने के लिये किसान लेकर जाते हैं। फसल बिकते ही उधारी चुकता कर परिवार में सबकी जरुरत के कपड़े, घर का जरुरी सामान सब इस अवसर पर ही खरीदा जाता है। लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है जिसकी कहानी सीधी किसान और लक्ष्मी से जुड़ी है। कहानी कुछ इस तरह है।

एक बार विष्णु का मन हुआ कि धरती की सैर की जाये। उन्हें सजता संवरता देख विष्णुप्रिया लक्ष्मी ने भी इच्छा जताई की नाथ आप भूलोक में जा रहे हैं तो मुझे भी अपने साथ ले चलें। विष्णु उन्हें साथ नहीं ले जाना चाहते थे लेकिन पत्नी के आगे थोड़े किसी की चली है विष्णु को भी मानना पड़ा लेकिन उन्होंनें एक शर्त रखी की जो मैं कहूंगा वही करना पड़ेगा। लक्ष्मी थोड़े जानती थी कि वह कब क्या मनवाने वाले हैं। उनके मन में तो धरती की सैर करने का चाव भर था। दोनों धरती पर पंहुच गये एक जगह पंहुचकर विष्णु रुक गये और लक्ष्मी को वहीं ठहरने की कही। उन्होंने लक्ष्मी को कहा कि आपको यहीं रुकना है मैं दक्षिण की तरफ जा रहा हूं जब तक न लौटूं आप यहीं रहना। अब लक्ष्मी को चिंता सताने लगी। इस सुनसान में विष्णु जी उन्हें अकेले छोड़कर क्यों जा रहे हैं। दक्षिण दिशा में ऐसा क्या है जो मुझे वहां नहीं ले जाना चाहते। लक्ष्मी मन ही मन यह सोचती रही कि भगवान विष्णु वहां निकल पड़े। लक्ष्मी से भी नहीं रहा गया और उनसे थोड़ी दूरी बनाकर आहिस्ता आहिस्ता उनके पिछे चल पड़ी। थोड़ा आगे जाकर सरसों के फूलों से सजे पीले खेत को देखकर लक्ष्मी का मन वहीं के वहीं अटक गया। पहले उन्होंने प्रकृति का ऐसा नजारा देखा नहीं था। वह फूलों को तोड़कर अपना श्रंगार करने लगीं। उसके बाद कुछ और आगे चली तो गन्ने के खेत आ गये वहां से गन्ने तोड़कर उन्हें चूसने लगी। उन्हें गन्नों के रस का स्वाद बहुत आनंदित कर रहा था कि विष्णु जी लौट आये उन्हें गन्ने चूसते हुए देखकर क्रोधित हुए। उन्हें ज्यादा गुस्सा इस बात पर आ रहा था कि लक्ष्मी ने उनकी बात नहीं मानी। बस इसी पर विष्णु ने लक्ष्मी को शाप दे दिया कि आपको मैं यहां शर्त पर साथ लाया था जिसका आपने उल्लंघन किया। सिर्फ उल्लंघन ही नहीं बल्कि किसान के खेतों में भी आपने फूल और गन्ने तोड़कर चोरी का अपराध किया है। अब आपको 12 साल तक इस किसान के घर रहकर इसकी सेवा करनी होगी। अब बेचारी लक्ष्मी भगवान के वचन का पालन करते हुए रहने लगी। कहते हैं लक्ष्मी के वास करने से किसान की भी मौज हो गई। उसका घर धन धान्य से भर गया। अच्छे समय वैसे भी जल्दी निकल जाता है पता ही नहीं चला कब 12 साल बीत गये। अब विष्णु जी लक्ष्मी को लेने आये तो। किसान उनके सामने अड़ गया कि नहीं मैं इन्हें नहीं जाने दूंगा। विष्णु जी बोले लक्ष्मी तो वैसे ही चंचला है इन्हें कोई नहीं रोक सकता पर किसान अड़ गया कि नहीं जाने दूंगा तो नहीं जाने दूंगा। अब लक्ष्मी भी 12 साल से वहां रह रही थी एक लगाव तो किसान से उन्हें भी हो गया था वह नहीं चाहती थी कोई अनिष्ट हो वह आगे आई और कहा कि यदि तुम मेरी पूजा करो तो मैं कहीं नहीं जाऊंगी हां बस तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी।

वो दिन है और आज का दिन है लक्ष्मी ऐसी गायब हुई कि दिखाई ही नहीं देती। हर साल पूजा भी किसान करते हैं लेकिन लक्ष्मी को तो बीच का रास्ता निकालकर लगता है बचना था वहां से सो निकल ली लेकिन किसान आज भी उसकी बाट जोहते हैं। उल्टा हर साल धनतेरस पर किसान के घर से लक्ष्मी निकल जाती है।

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