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ढींगरा आयोग रिपोर्ट – अनियमितताएं हैं इसलिये रिपोर्ट में हैं 182 पेज

August 31, 2016 11:45 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

कहते हैं राजनीति में अगर मुद्दा खत्म हो जाये तो फिर राजनीति किस बात की हो। वाड्रा लैंड डील मामले में भी हालात कुछ इसी तरह के है। ढींगरा आयोग कि रिपोर्ट तो सरकार को मिल गई लेकिन रहस्य अभी बरकार है।

Dhingra Aayog report
लगभग 14 महीने बाद आखिरकार ढींगरा आयोग ने अपनी रिपोर्ट हरियाणा सरकार को सौंप दी है। जिसके बाद से हरियाणा के साथ-साथ केंद्र में भी कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। एक और कांग्रेस नेता रिपोर्ट से जानकारियां लीक कर कांग्रेस व रॉबर्ट वाड्रा को बदनाम करने की साजिश बताते हुए बदले की कार्रवाई के रुप में उठाया गया कदम बता रहे हैं तो दूसरी और बीजेपी नेता पलटवार कर रहे हैं कि यह परंपरा कांग्रेस की रही है। यदि कांग्रेस पाक साफ है तो फिर उसमें छटफटाहट क्यों?

182 पेज की रिपोर्ट में क्या लिखा गया है इसका खुलासा तो तभी होगा जब सरकार रिपोर्ट को सबके सामने लायेगी। लेकिन पूर्व जस्टिस एस.एन ढींगरा ने अनियमितताओं के होने का ईशारा जरुर किया है। उन्होंनें कहा है कि यदि वाड्रा मामले में अनियमितताएं नहीं होती तो वह यही लिख देते के कुछ नहीं हुआ। मेरी रिपोर्ट में 182 पेज हैं इसका मतलब ही यह है कि गड़बड़ियां हुई हैं। सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर अनियमितताओं के आरोप हैं। रॉबर्ट वाड्रा पर आयोग ने क्या टिप्पणी की है यह तो रिपोर्ट सामने आने के बाद ही पता चलेगा।

गौरतलब है कि कांग्रेस शुरु से ही आयोग के गठन पर सवाल उठाती रही है। इतना ही नहीं हरियाणा में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कैप्टन अजय यादव ने तो जस्टिस ढींगरा पर रिश्वत लेने तक के आरोप लगाये थे। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाल ने आरोप लगाये थे कि ढींगरा आयोग कैबिनेट में पास किये बिना ही बनाया गया है। जिसके जवाब में बीजेपी नेताओं ने कहा कि 1 जून 2015 की कैबिनेट में ढींगरा आयोग को मंजूरी दी गई थी और 15 अगस्त 2015 की कैबिनेट मे आयोग की शर्तों में संशोधन किया गया था। उस समय मुख्यमंत्री खट्टर ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि रिपोर्ट आने से पहले सवाल उठाने का मतलब है कि दाल में कुछ काला है। फिलहाल रिपोर्ट मिलने पर मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा है कि रिपोर्ट का अध्ययन कर उचित कार्रवाई की जायेगी।

रिपोर्ट को लेकर जिस तरह की चर्चाएं हैं उसमें हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें बढ सकती हैं। हुड्डा फिर से वही बात दोहरा रहे हैं कि ये बदला बदली की सरकार है और यह आयोग भी वैधानिक नहीं है इसकी कोई मान्यता नहीं। राजनीतिक दुर्भावना के साथ सरकार काम कर रही है। सिर्फ एक नहीं कई मामलों में प्रतिशोध नजर आ रहा है। प्रदेश की जनता सब जानती है। उधर रॉबर्ड वाड्रा का कॉन्फिडेंस भी बरकार है और वे हमेशा की तरह कह रहे हैं कि पिछले दस साल से उन्हें राजनीतिक हितों के लिये इस्तेमाल किया जा रहा है उन पर लगे आरोप सरासर गलत हैं।

कहते हैं राजनीति में अगर मुद्दा खत्म हो जाये तो फिर राजनीति किस बात की हो। वाड्रा लैंड डील मामले में भी हालात कुछ इसी तरह के हैं अभी तो रिपोर्ट सार्वजनिक भी नहीं हुई और विवाद रिपोर्ट के बनने से पहले से शुरु हैं। तो जब इसकी कार्रवाई करने की बात आयेगी तो एक आरोप प्रत्यारोप का दौर फिर से चलेगा। वाड्रा तब तक कई और सौदे कर चुके होंगें और प्रदेश सरकार भी तब तक कुछ और मुद्दों पर लीपा-पोती कर चुकी होगी। लेकिन मुद्दा खत्म तो राजनीति खत्म इसलिये शो मस्ट गो ओन…. मामला लंबा चलेगा दोस्त अभी से किसी नतीजे पर मत पंहुचो बाकि जो हुआ है और जो हो रहा है वो आप हम और ये भी जानते ही हैं।

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