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क्यों उड़ाया गया दोपदी का फेसबुक अकाउंट ?

August 13, 2016 2:30 pm by: Category: साहित्य खास Leave a comment A+ / A-

“कवि हूं, आदीवासी हूं, संघर्षों भरी अपनी कथा रही“ बस ! इतना सा परिचय… और इतना काफी भी था सियासत की रंगत फीकी करने करने के लिए। नाम दोपदी सिंघार। व्यवसाय- निजि स्कूल में अध्यापिका। पुराने फेसबुक अकाउंट के मुताबिक आलीराजपुर में स्कूल और बस्तर विश्वविद्यालय में पढ़ाई हुई है। जब से नाम चला, तो बस चलता ही गया। फेसबुक की दुनियां में जिस खाते पर दोपदी सिंघार लिखा था, उस पर कतार बंध गई मैत्री अनुरोध भेजने वालों की। तारीफों, समीक्षाओं के अंबार लग गए वाल पर… और समीक्षाएं जब होने लगी तो आलोचना भी आई।

समाज के लचर रवैये, दलितों से होने वाले अत्याचार, प्रशासन, व्यवस्था, कानून इत्यादि पर करारा प्रहार करने वाली दोपदी की कविताओं ने जो रफ्तार पकड़ी… उसने देश के नामचीन कवियों को भी दोपदी के अकाउंट से जोड़ दिया। कविताओं में इतना गुस्सा था, इतना आक्रोश था, व्यवस्था पर ऐसी चोट थी कि मात्र तीन दिन में ‘फलक के चांद सितारे’ लिखने वालों को ये लगने लग गया कि तुम आखिर हो कहां? शब्दजाल गूंथने वाले कुछ नामी कवियों ने वहां तक जाने का भी प्रयास किया, कलम चलाई, मगर वो चीज नहीं उतार पाए। कयास यही लगाए जा रहें हैं कि जो कथित बुद्धिजीवी वर्ग दोपदी के टिप्पणी-बॉक्स में आलोचनाएं लिखता था, उन्हीं लोगों ने दोपदी का अकांउट बंद करवाया है।

dopadi singhar account

सोशल मीडिया पर सालों से लिख रहे कुछ वरिष्ठ कवियों का गुस्सा भले ही उनकी नजरों में जायज हो, और होगा भी क्यों नहीं क्योंकि मात्र दो दिन में अपनी बिना चांद सितारों और प्रेम-बेवफाई की कविताओं से, जिनकी व्याकरण भी पूरी तरह से ठीक न हो; वो कविता भी बड़े कवियों को मात दे दे, तो गुस्सा बनता है। दोपदी की कविताओं की खासियत यही थी कि उनकी रचनाएं सच्चाई भरी और यथार्थ भाव की रचनाएं थी। जैसे ठीक अपनी आपबीती को शब्दों में उतार दिया गया हो। कविता में को अतिरिक्त प्रयोग नहीं, कलिष्ठ शब्दावली भी नहीं, मगर फिर भी प्रसार की इस रफ्तार ने शायद दोपदी का अकाउंट बंद करवा दिया। हालांकि उसके बाद दोपदी के नाम से फेसबुक पेज और ब्लॉग भी आए मगर उन पर मात्र पुरानी कविताएं घूम रही है, पाठकों को नया कुछ भी नहीं मिल रहा।

हालांकि इस नाम से लिखने वाले अकाउंट धारक को प्रत्यक्ष शायद कोई न जानता हो। उसके मैसेज और टिप्पणी बॉक्स में जाने वाले सवालों का भी कोई जवाब नहीं आता था। कुछ जानकारों की माने तो ये भी हो सकता है कि दोपदी सिंघार नाम से लिखने वाले इस कवि या कवियित्री ने खुद अपना अकाउंट बंद कर दिया हो, मगर सवाल उठता है कि अकाउंट की जगह जो पेज बना हुआ है उसमें दोपदी की नई कविताएं नहीं आ रही। जिसका अर्थ ये भी निकाला जा रहा है कि ये काम दोपदी के द्वारा नहीं किया गया। उसके पूर्व अकाउंट से ‘आखिरी सलाम आखिरी कविता’ यहां चस्पा रहा हूं, आशा है आपको पसंद आए…

कोई कविता आखिरी नहीं होती दोस्तों

जब तक पुकारते रहोगे तुम अपने प्रेमियों को

बची रहेगी मेरी कविता

तुम्हारे गले में नसों में

जब तुम्हें मिलेगी खबर कि तुम माँ बनने वाली हो

समझना दोपदी की कविता जिंदा हो गई

कोई सलाम आखिरी नहीं होता

बादल बनके आ जाऊँगी किसी रोज

गेहूँ की बाली में दाना बनके आऊँगी

लाश दिखे कभी कोई जवान

तो समझ लेना दोपदी जा रही है

मगर दुखी मत होना गुस्सा होना

कभी कोई खड़ा हो जाए अन्याय के खिलाफ

तो आँख की लाली परखना

दोपदी की कविता बहुत दूर नहीं जा पाएगी

रहेगी हमेशा तुम्हारे पास

और मरना मत और डरना मत

परेम करना जैसा मैंने किया

कि दे दी अपनी जान

सुना है दोपदी के नाम का वारंट निकला है

सुना है दोपदी को

15 अगस्त पर आजादी दे दी जाएगी।

बहुतेरे लोगों ने इसे किसी नक्सली की चाल भी बताया। इसकी कविताएं प्रसारित करने वालों पर जमकर भड़ास निकाली, धमकियां भी दी, उन्हें भी नक्सली बताने की हिमाकत की। मगर रचना लिखने और फैलाने से भला कौन रोक सकता है। लोगों ने कहा कि ये लड़की नहीं है, ये औरत नहीं, ये आदमी नहीं है। समर्थन करने वालों ने कहा कि क्या लड़की नहीं तो क्या रिश्ता लेकर जाना था इनके भाव पर जाइए, अभिव्यक्ति पर जाइए, काव्य की जीवंतता देखिए। खैर जो भी हो भी हो अकाउंट चला भी खूब, और बंद भी हो गया। लोगों ने तो इसे दलित कवयित्री कहकर सम्मान दिए जाने की भी मांग की मगर बिना जान-पहचान, क्या सम्मान ? खैर जो भी अपेक्षा यही रहेगी दोपदी सिंघार नाम का कोई भी प्राणी जनता के बीच आए और अपनी कविता कहे।

क्यों उड़ाया गया दोपदी का फेसबुक अकाउंट ? Reviewed by on . “कवि हूं, आदीवासी हूं, संघर्षों भरी अपनी कथा रही“ बस ! इतना सा परिचय... और इतना काफी भी था सियासत की रंगत फीकी करने करने के लिए। नाम दोपदी सिंघार। व्यवसाय- निजि “कवि हूं, आदीवासी हूं, संघर्षों भरी अपनी कथा रही“ बस ! इतना सा परिचय... और इतना काफी भी था सियासत की रंगत फीकी करने करने के लिए। नाम दोपदी सिंघार। व्यवसाय- निजि Rating: 0

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