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डर्टी पोलिटिक्स: कमल के लिये कीचड़ जरुरी

November 4, 2016 6:17 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

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किसी मुद्दे को चुनावी मुद्दा कैसे बनाया जाये यह देश की सत्तासीन भाजपा सरकार से सीखना चाहिये। लोगों को भावनात्मक रूप से अपने पक्ष में कैसे किया जाये यह तो बहुत ही अच्छे से भाजपा से सीखा जा सकता है। धर्म के नाम पर लोगों की आंख कैसे बंद करनी है यह कला भी इन्हें अच्छी तरह आती है। हाल ही में घटे कुछ घटनाक्रमों से तो यही साबित होता है।

जेएनयू को आम धारणा में देशद्रोही अड्डा स्थापित करने में कामयाबी हासिल होने के बाद हर विद्रोही स्वर को देशद्रोही बनाया गया। उससे पहले देश में बढ़ती असहिष्णुता पर अपना विरोध जताने वालों का जो मजाक बनाकर आम धारणा में उन्हें जिस तरह बतौर खलनायक प्रस्तुत किया वह भी सराहनीय है। इतना सराहनीय की आगे से कोई इस आतंकित माहौल में अपने बीवी-बच्चों की आशंकाओं को भी प्रकट करने में पहले सौ बार सोचेगा।

ताजा उदाहरण जो इनके गौरव की गाथा कहता है वह सर्जिकल स्ट्राइक और भोपाल जेल के कैदी और प्रतिबंधित संगठन सिमी के 8 कार्यकर्ताओं के एनकांउटर का ले लिजिये।

सर्जिकल स्ट्राइक कहा जा रहा है कि पहले भी होती रही हैं लेकिन उनका बखान नहीं किया गया था लेकिन इस सर्जिकल स्ट्राइक को तो विशेष रूप से चुनावों को देखते हुए अंजाम देने के आरोप लग रहे हैं। आरोपों में दम भी लग रहा है क्योंकि प्रधानमंत्री से लेकर गृहमंत्री तक को यूपी में लगे पोस्टरों में एवंजेर ऑफ उड़ी घोषित किया गया।

भोपाल जेल से भागने के बाद कथित आतंकवादियों का जिस प्रकार एनकाउंटर किया गया उस पर हर तरफ से सवाल उठ रहे हैं। मानवाधिकार आयोग भी संज्ञान ले रहा है लेकिन राज्य से लेकर केंद्र तक के मंत्री कह रहे हैं कि एनकांउटर पर सवाल मत उठाओ। वहीं यहां भी यह आम राय बनाने में कामयाब रहे कि एनकांऊटर सही किया, कब तक इन्हें बिरयानी खिलाते रहते।

लेकिन कमाल की बात है प्रज्ञा साध्वी से लेकर असीमानंद जैसे को तो खूब मटर पनीर खिलाया जा रहा है। यदि आरोप से ही आतंकवादी होते हैं तो इन पर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के ही आरोप हैं और आश्चर्य नहीं होगा अगर निकट भविष्य में इन्हें बाइज्जत बरी कर दिया जाये।

हालांकि ऐसा नहीं है कि सरकारी धमकियों से लोग घबरा गये हैं। आवाज़े तो उठ रही हैं। चाहे गुजरात में गौरक्षा के नाम पर हो रहे दलितों पर अत्याचार के खिलाफ लोगों का फूटा गुस्सा हो या फिर जेएनयू से कन्हैया जैसे जन नेता का उभर कर सामने आना, रोहित वेमुला को न्याय दिलाने के लिये सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब हो। लेकिन ये कौशिशें अभी बहुत कम हैं और खतरा लगातार बढ़ता ही जा रहा है। पठानकोट की रिपोर्टिंग को लेकर एनडीटीवी पर एक दिवसीय प्रतिबंध भी इसी खतरे की घंटी है। बुद्धिजीवी तो इसे अघोषित आपातकाल का नाम तक देने लगे हैं।

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भोपाल एनकांउटर कांड विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में चुनावी लाभ के लिये की गई कार्रवाई लगती हैं। इससे मैं शहीदों की शहादत को कम नहीं आंक रहा हूं बल्कि मुझे बहुत गहरा दुख इस बात का है कि राजनीति की बिसात में एक दल चुनावी लाभ के लिये देश के रक्षा तंत्र तक का इस्तेमाल कर रहा है। हमारे जवानों की जान को जाया कर रहा है। देशभक्ति की कीमत लगाई जा रही है। अगर हमारे सैनिकों के प्रति राजनेता इतने ही संवेदनशील होते भिवानी के बामला निवासी पूर्व सैनिक को अपने प्राण त्यागने का फैसला नहीं लेना पड़ता।

भले ही ये कथित आंतकवादी कल को दोषी ठहरा दिये जाते लेकिन देश का संविधान, देश का कानून उनका न्याय करता उन्हें सजा देता। लेकिन आपने कानून का रास्ता ही बंद कर दिया। एक लोकतंत्र की सेहत के लिये यह बिल्कुल भी ठीक नहीं कहा जा सकता। वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल में यह खेल और भी खतरनाक होता जा रहा है।

इससे पहले तक यह इतना भर होता था कि भ्रष्टाचार करके कमाये पैसे को चुनाव अभियान में प्रचार के लिये इस्तेमाल कर लिया हो। उद्योगपतियों से पैसा ऐंठ कर आम जनता की कमर तोड़ने के कानून बना दिये हों। लेकिन सांप्रदायिक सद्भाव बचा हुआ था। अब पूंजीपतियों को तो लाभ दिया ही जा रहा है साथ ही देश की एकता और अखंडता के लिये भी लगातार खतरा पैदा होता जा रहा है। धार्मिक रूप से उन्माद फैलाकर, धार्मिक और जातीय ध्रुवीकरण के जरिये सांप्रदायिक दंगों की जमीन तैयार की जा रही है। निश्चित तौर पर यह कमल खिलाने के लिये देश में कीचड़ बनाने की प्रक्रिया है।

डर्टी पोलिटिक्स: कमल के लिये कीचड़ जरुरी Reviewed by on . किसी मुद्दे को चुनावी मुद्दा कैसे बनाया जाये यह देश की सत्तासीन भाजपा सरकार से सीखना चाहिये। लोगों को भावनात्मक रूप से अपने पक्ष में कैसे किया जाये यह तो बहुत ह किसी मुद्दे को चुनावी मुद्दा कैसे बनाया जाये यह देश की सत्तासीन भाजपा सरकार से सीखना चाहिये। लोगों को भावनात्मक रूप से अपने पक्ष में कैसे किया जाये यह तो बहुत ह Rating: 0

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