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कट गए सर मगर, सर हिमालय का न झुकने दिया

November 1, 2016 5:04 pm by: Category: खबर खास, तीज तयोहार Leave a comment A+ / A-

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दीपावली का दिन। भारतीय त्यौहारों में सबसे बड़ा त्यौहार। इस दिन श्रीराम अपनी पत्नी सीता व भाई लक्ष्मण के साथ चौदह वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे। अमावस्या की काली रात थी पर अयोध्या की जनता ने इतने दीये जलाए कि अंधेरे का नाम-ओ-निशान मिट गया। लेकिन हरियाणा के गांव अंटहेड़ी में दीपावली के पावन पर्व पर शहीद मनदीप का पार्थिव शरीर पहुंचा। गांववासी जहां मनदीप की शहादत पर गर्व महसूस कर ‘अमर रहे, अमर रहे मनदीप’ के नाम के नारे लगाते रहे, वहीं नम आंखों से उसे बधाई देने पहुंचे और परिजनों को ढांढ़स बंधाया, सरकार की ओर से सहायता राशि और एक नौकरी देने की घोषणा की गई। अजीब इत्तेफाक है कि मनदीप के परिवार ने नया घर बनवाया था और आज के दिन गृहप्रवेश करने का कार्यक्रम रखा गया था। पर हुआ कुछ ऐसा जिस पर परिवारजन विश्वास नहीं कर पा रहे। यह क्या हुआ? गृह प्रवेश की बजाए मनदीप का पार्थिव शरीर लाया गया। सेना के जवानों ने मातमी धुन के साथ सलामी दी और अंतिम विदाई दी। पुष्प चक्र अर्पित किए गए! पाकिस्तान की बर्बरता पर मुर्दाबाद के नारे लगे। इससे दो-चार दिन पहले ही पिहोवा के मूल निवासी सुशील कुमार भी देश की सीमा की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे और उन्होंने आखिरी बार मां से बात की थी फोन पर और कहा था गोलीबारी पर कि मां, यहां तो रोज दिवाली होती है पर उसे ये नहीं पता था कि आज शहादत देने वालों की लिस्ट में उसका नाम लिखा जाने वाला है! इस तरह हरियाणा के दो सपूत एक प्रकार से यही पंक्ति गाते शहीद हो गए: 

 

कट गए सर मगर, सर हिमालय का हमने न झुकने दिया!

 

आज माखनलाल चतुर्वेदी की प्रसिद्ध कविता ‘पुष्प की अभिलाषा’  बहुत याद आ रही है। जिसमें पुष्प न तो देवों को मंदिर में अर्पित करने और न ही किसी सुरबाला के गहनों में गूंथे जाने पर गर्व महसूस करता है, बल्कि यही अभिलाषा व्यक्त करता है-

 

मुझे तोड़ लेना वनमाली,

उस पथ पर तुम फेंक देना।

मातृभूमि पर शीश चढ़ाने,

जिस पथ जावें वीर अनेक!

 

हरियाणा ने कारगिल के युद्ध में भी अपने पुष्प अर्पित किए थे जवानों के रूप में और अब जम्मू कश्मीर की सीमा की रक्षा करते हुए भी इस राज्य के दो पुष्प दीपावली से पहले अर्पित कर दिए। इस अर्पण और तर्पण के सामने सर्जिकल स्ट्राइक की सारी बहसें बेकार हैं और पाक कलाकारों के बहिष्कार, किसी फिल्म का विरोध और विरोध हटाने के लिए आर्मी वैलफेयर फंड में राशि जमा करवाने की बातें भी पूरी तरह फिजूल हैं। हमें गर्व होना चाहिए अपने उन शहीदों पर जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने शीश ही अर्पित कर दिए। हमें सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए एकजुट होना चाहिए। किसको इनकी शहादत का श्रेय मिला, किसको नहीं, इन तुच्छ विचारों के कोई मायने नहीं। वे देश के लिए शहीद हुए हैं, किसी भी राजनीतिक दल के लिए नहीं। वे पूरे देश के सपूत हैं, किसी भी जाति, धर्म या समुदाय और राजनीतिक दल के नहीं। जरा जाति, धर्म, समुदाय और राजनीति से ऊपर उठिए और अपने-अपने घर में एक दीया शहीदों के लिए जलाएं और कुछ पैसा ‘आर्मी वैलफेयर फंड’ में जमा करवाएं, जिससे उनके परिवारजनों की सही सहायता हो सके। कहने को तो बहुत कुछ है पर सब कुछ कहा नहीं जाता, बहुत कुछ संकेतों में ही समझ लिया जाता है, समझ लिया जाना चाहिए।

अंत में क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग की अपील पर:-

 

एक दीया जलाओ शहीदों के नाम,

एक सैल्यूट ठोको वीर सैनिकों के नाम।

लेखक परिचय

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लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर ।

उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहायस हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

कट गए सर मगर, सर हिमालय का न झुकने दिया Reviewed by on . दीपावली का दिन। भारतीय त्यौहारों में सबसे बड़ा त्यौहार। इस दिन श्रीराम अपनी पत्नी सीता व भाई लक्ष्मण के साथ चौदह वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे। अमावस्या क दीपावली का दिन। भारतीय त्यौहारों में सबसे बड़ा त्यौहार। इस दिन श्रीराम अपनी पत्नी सीता व भाई लक्ष्मण के साथ चौदह वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या लौटे थे। अमावस्या क Rating: 0

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