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एक कविता मेरी भी………

December 3, 2017 8:52 pm by: Category: मनोरंजन खास Leave a comment A+ / A-

एक कविता मेरी भी…..

ना मैं अच्छा लेखक हूँ

न ही अच्छा कवि,
पर क्या करूँ?

मेरी भी कलम समुन्द्र की लहरों की तरह उफान पर थी,
डर था कि कहीं कुछ समय बाद शांत न पड़ जाए,
इसीलिए चाहा कि लिख दूँ वो सब कुछ,
जो मैं उनके बारे में जानता हूँ।

ताकि जान सकें वो नन्हीं, जोशीली मछलियाँ उस मगरमच्छ के बारे में,
कि कैसे उनके पुरखों को मारा गया?

रामायण खत्म हुई
महाभारत खत्म हुई
पर हमारे हुक्मरानों के हम पर जुल्म खत्म नहीं हुए।

फिर क्या
उनके ज़ुल्मतों को लिखते-लिखते स्याही खत्म हो गई
पर वो हमारे हुक्मरानों के हम पर जुल्म खत्म नहीं हुए।
और
न ही खत्म होंगे …..
जब तक हम खुद उनके खिलाफ जंग न छेड़ें।

अमनप्रीत सतीश जमावड़ी

 

 

लेखक परिचय – अमनप्रीत सतीश हांसी सरकारी कॉलेज के छात्र है जो छात्र यूनियन PSF में काम करते है।

 

नोट:- प्रस्तुत Poem में दिये गये विचार या जानकारियों की पुष्टि हरियाणा खास नहीं करता है। यह लेखक के अपने विचार हैं जिन्हें यहां ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है। Poem के किसी भी अंश के लिये हरियाणा खास उत्तरदायी नहीं है।

एक कविता मेरी भी……… Reviewed by on . एक कविता मेरी भी..... ना मैं अच्छा लेखक हूँ न ही अच्छा कवि, पर क्या करूँ? मेरी भी कलम समुन्द्र की लहरों की तरह उफान पर थी, डर था कि कहीं कुछ समय बाद शांत न पड़ ज एक कविता मेरी भी..... ना मैं अच्छा लेखक हूँ न ही अच्छा कवि, पर क्या करूँ? मेरी भी कलम समुन्द्र की लहरों की तरह उफान पर थी, डर था कि कहीं कुछ समय बाद शांत न पड़ ज Rating: 0

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