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Falgun – फागण आरह्या रंग भरया पर….

फाल्गुन मास - बुढ़ी ए लुगाई मस्ताई फागण म्हं

February 27, 2017 11:51 pm by: Category: तीज तयोहार, साहित्य खास Leave a comment A+ / A-

फागण का म्हीनां भी कमाल का म्हीनां हो सै सब पै मस्ती का इसा खुमार छावै है के छोटै तै लेकै बड़े बडेरे तक मस्ती मैं झूमदे पांवैगे ज्यांए तै तो लोकगीतां मैं भी कह्या जावै है के

बूढ़ी ए लुगाई मस्ताई फागण मैं
काची अमली गदराई फागण मैं

असल मैं यू म्हीना देसी साल का आखरी म्हीना हो सै अर इसमैं दो बड़े त्यौहार मनाये जां हैं एक तो मनाया जा है भोलेनाथ का त्यौहार महाशिवरात्री जिसनै आपां शिवजी का बरत नाम तै भी जाणां सां। तो महाशिवरात्रि तो फागण नै खास बणावै ए सै पर फागण के असली रंग भरे जां हैं होळी अर फाग कै कारण, हालांके देश मैं कई जगहां पै अलग-अलग ढाळ की होळी खेळी जां हैं किते लट्ठमार होळी तो किते फूलां की होळी, कोये बरसाणै की होळी पर आपणै हरियाणा मैं तो पलवल के बंचारी अर पानीपत के नौळथा गांव की होळी ब्होत मसहूर सै। हालांके असली लठमार होळी के नजारे भी हरियाणां मैं देखण नै मिलज्यां हैं अगलै दिन कई थाणैं मैं तो कई अस्पतालां मैं दाखिल होये भी मिलैं हैं। तो कुल मिलाकै फागण का म्हीना काफी रंगीन म्हीनां है।
देवर भाभी के प्रेम का नज़ारा फाग पै ए देखण नै मिल्या करदा हालांके टेम गेल इब ब्होत कुछ बदल भी गया इब ना तो वो प्रेम रह रह्या हालांकि पहलां आळा बड़े बडेरयां पै सुण्या है ज्यांए तै करैक्टर की सौ प्रतिशत गारंटी तो उस टेम भी नहीं ली जांदी तळै ए तळै उस टेम भी ब्होत कुछ होंदा होगा पर इब कुछ ज्यादा ए उभर कै स्याहमी आ ज्या सै अर फाग का त्योहार रंग लाण कै चक्कर मैं बहू छोरियां नै छेड़ण का भानां ज्यादा होग्या।
दूसरा पहले बड्डे कूणबे होया करदे मिल जुल कै रह्या करदे सारे काम माणसां गेल थे सब एक दूसरै कै भरौसै पै थे पर इब आदमी आत्मनिर्भर होग्या दूसरयां पै निर्भरता कम होगी। हालांकि सामाजिकता की जरूरत तो सदा तै पड़दी रहवैगी क्योंकि माणस माणस हो सै मशीन नहीं पर जो मेल जोल के ब्हाने थे वैं कम होगे।
फागण मैं ज्यब दामण पैहर पैहर छोरी आंगणां मैं नाच-नाच खड्डे करद्या करदी आज ताड़ियां की थाप पै उन एडियां की वाज़ आणी बंद होगी। किसे छिदै ए गाम मैं कोये फागण के गीतां पै नाचण आळी नई पीढ़ी हो तो हो पर लागदा तो कोनी। शायद इस ढ़ाळ की आच्छी चीज़ तो आपणै अतीत तै हामनै संभाल लेणी चहिये थी। इब तो किसे किताब मैं इन गीतां नै पढ़ ल्या तो पढ़ ल्यां पर कागज के पन्यां मैं फागण के दामण चक्कर, बाजते एड, अर ताड़ियां आळी ताल पै गाये जाण आळे मीठी मीठी धुनां आळे गीत कड़तै ल्यावां।

Falgun – फागण आरह्या रंग भरया पर…. Reviewed by on . फागण का म्हीनां भी कमाल का म्हीनां हो सै सब पै मस्ती का इसा खुमार छावै है के छोटै तै लेकै बड़े बडेरे तक मस्ती मैं झूमदे पांवैगे ज्यांए तै तो लोकगीतां मैं भी कह् फागण का म्हीनां भी कमाल का म्हीनां हो सै सब पै मस्ती का इसा खुमार छावै है के छोटै तै लेकै बड़े बडेरे तक मस्ती मैं झूमदे पांवैगे ज्यांए तै तो लोकगीतां मैं भी कह् Rating: 0

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