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रूमान और इंकलाब के बेजोड़ शायर थे फैज

November 20, 2017 9:39 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

 

मुझसे पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न मांग

               और भी दुख हैं जमाने में मोहब्बत के सिवा

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़। शायरी की दुनियां का वो नाम जिनकी रचनाओं में इंक़लाबी और रूमानी दोनों भाव जिंदा हो उठतें है। शायरी, जो अपने पाठकों-श्रोताओं में मौजूद कुछ जज़्बातों, सपनों, यादों और रिश्तों को जगा देती है। शायरी, जो मुहब्बत भी करती है और क्रांति भी।

13 फरवरी 1911 को सियालकोट के मजदूर परिवार में जन्में फ़ैज़ अंग्रेज़ी और अरबी में स्नात्कोतर करने के बावजूद भी कवितायें उर्दू में ही लिखते थे। सन् 1930 में उन्होनें एक ब्रिटिश महिला एलिस से शादी की। मगर जब फ़ैज़ इश्क़ की बात करते हैं तो लगता है कि न जाने कोई हाड़-मांस की महबूबा है या इंकलाब का परचम थामे हुए क्रांति खड़ी है जिसके लिए वो दीवाने हुए जाते हैं।

सन् 1936 में वे प्रगतिशील लेखक संघ में शामिल हो गए। उन्होंने इंकलाब को अपने कलम की स्याही बनाया और ज़ुल्म-ओ-सितम में जी रहे लोगों को वो कुछ दिया जो बंदूकों और तोपखानों से बढ़कर था। ये वो दौर था जब उर्दू के काव्य-गगन में साहिर लुधियानवी, कैफ़ी आज़मी और फ़िराक़ गोरखपुरी जैसे और भी सितारे चमक रहे थे। लेकिन फैज अहमद की अपनी अलग पहचान थी। फ़ैज की शायरी एक ओर जहां शोषण, दमन और बंदरबांट को खूबसूरती से नंगा करती है तो वहीं संघर्ष की भी नई रवायत लिखती है…

यूँ ही हमेशा उलझती रही है ज़ुल्म से ख़ल्क़

न उनकी रस्म नई है, न अपनी रीत नई

यूँ ही हमेशा खिलाए हैं हमने आग में फूल

न उनकी हार नई है न अपनी जीत नई।

फैज मार्क्सवादी विचारधारा में विश्वास रखते थे। 1942 से लेकर 1947 तक वे ब्रिटिश-सेना मे कर्नल रहे, इसके अलावा फैज ने ’पाकिस्तान टाइम्स’ और ’इमरोज़’ अखबारों का संपादन भी किया। इसी दौरान लियाकत अली खाँ सरकार के तख्तापलट की साजिश रचने के जुर्म में 1951‍ से 1955 तक उन्हें जेल जाना पड़ा ।

जेल में लिखी इनकी रचनाएं “दस्ते सबा” और “जिंदानामा” काफी पसंद की गई। सन् 1963 में उन्हें सोवियत-संघ ने लेनिन शांति पुरस्कार से सम्मानित किया और सन् 1984 में  20 नवम्बर को एक ऐसा वक्त आया, जब ये बेमिसाल शायर सदा-सदा के लिए हमसे दूर चला गया। देश और दुनियां में इन्हें सदीयों-सदीयों तक याद किया जाएगा।

(लेखक हरियाणा खास के कंटेंट एडिटर हैं)

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