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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना – किसानों का नफा या नुक्सान

पेशे खिदमत है नई नवेली कृषि बीमा योजना - रविंद्र सिंह ढुल

August 3, 2016 10:28 am by: Category: खबर खास, खेती खास 1 Comment A+ / A-

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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एनएआईएस) एवं संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एमएनएआईएस) की एक प्रतिस्थापन योजना है जिसका 13 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनावरण किया था। सरकार का दावा है कि इससे किसानों पर प्रीमियम का बोझ कम करने में मदद मिलेगी और जो लोग खेती के लिये ऋण यानि कर्जा लेते हैं खराब मौसम से उनकी फसलों की रक्षा हो सकेगी। योजना को सेवा कर से मुक्त रखा गया है। सरकार का यह भी कहना है कि इस योजना का प्रशासन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जाएगा इसे भारत के हर राज्य में संबंधित राज्य सरकारों के साथ मिलकर लागू किया जायेगा। योजना के नफे और नुक्सान का आकलन कर रहे हैं रविंद्र सिंह ढुल।

 

सबसे पहले जान लें कौनसे किसानों को यह बीमा खरीदना ही है:

 

-जो किसान किसी भी प्रकार का कृषि लोन लेते हैं; उनको यह योजना पसंद हो या न हो पर उन्हें यह लेनी ही होगी. इसे कृषि लोन के लिए कम्पलसरी बनाया गया है. दूसरी ओर जो किसान इन सुविधाओं का लाभ नहीं उठाते उनके लिए इस योजना में आना आवश्यक नहीं.

 

बीमा का फायदा  कैसे  मिलेगा?

 

-एक यूनिट को बीमा दी गयी है; न कि हर एक खेत को..आसान भाषा में समझें  तो प्रीमियम बेशक से एक एकड़ के हिसाब से  लिया गया है पर मुआवजा देने का क्राइटेरिया एक एकड़ नहीं अपितु एक यूनिट है. फ़िलहाल एक यूनिट को एक गाँव के नाम से रखा गया है. एक यूनिट में नुक्सान को देखा  जायेगा और मुआवजा दिया जायेगा…

 

कैलकुलेशन

 

केलकुलेशन का तरीका ऐसा है कि यदि पूरी यूनिट में नुक्सान न हो तो एक एकड़ का मुआवजा कौड़ियों के दाम मानिए आप…. क्योंकि इसके लिए पेरामीटर पिछले सात सालों में उस यूनिट में हुई पैदावार माइनस दो खराब सालों की पैदावार को माना गया है… उसमें भी एक बेतुका फार्मूला रख दिया गया है. ढंग से केलकुलेशन करने में अच्छे अच्छों के पसीने आ जाएँगे.. इस फार्मूला से बीमा निर्धारण न केवल बेतुका है बल्कि ध्यान देने योग्य बात यह है कि एक यूनिट (गाँव ) में भी  अलग अलग प्रकार की जमीन हो सकती है और पैदावार कम अथवा ज्यादा हो सकती है तो एवरेज से देने में घाटा होना निश्चित है

 

क्या यह केवल कृषि बीमा है:

 

नहीं; सरकार आपसे  केवल कृषि बीमा के पैसे नहीं ले रही ; कृषि बीमा के साथ आप सात/आठ बीमा और लेंगे. दुर्घटना प्रीमियम, जीवन बीमा प्रीमियम, ट्यूबवेल बीमा, घर की बीमा, बच्चों की पढ़ाई की बीमा आदि लेंगे. अब तक ज्ञात स्रोतों के आधार  पर आपको अकेली कृषि बीमा लेने पर सरकारी सब्सिडी छोडनी पड़ सकती है. फार्मूले के अनुसार यदि कोई किसान एक एकड़ का बीमा कराता है (आदर्श स्थति में) तो ट्रेक्टर के बीमा के अलावा उसे साल का प्रीमियम लगभग 3000 भरना होगा (यह फार्मूला  सरकारी वेबसाईट पर दिया हुआ है ). ध्यान देने योग्य बात है कि जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा में आत्महत्या को आज तक कवर नहीं माना जाता..इस बारे में योजना में स्पष्ट रूप से निर्देश नहीं हैं कि माना जायेगा या नहीं. अतः कानून के हिसाब से यदि किसान आत्महत्या कर लेता है तो उसे जीवन बीमा या दुर्घटना बीमा राशि नहीं दी जाएगी.

 

मिलेगा कितना?

कृपया बताएं एक एकड़ जमीन को बोने में एक आम किसान को कितना खर्च करना पड़ता है? फिर बताएं कि समस्त खर्चे निकालने के बाद उस किसान को कितने पैसे का मुनाफा मिलता है? आज कल जो सरकार की तरफ से पेम्फलेट बांटे जा रहे हैं उनसे पता लगता है सरकार धान की फसल के लिए 500 से कुछ अधिक ले रही है. चूंकि दो प्रतिशत बीमा ही देय है अतः इसका पचास गुना अर्थात लगभग दस हजार प्रति एकड़ ही मुआवजा मिल पायेगा…जबकि आम तौर पर  धान का  एक एकड़ लगाने मात्र में ही पचीस हजार से अधिक खर्चा आता है…तो प्रॉफिट या फसल की कीमत तो भूल ही जाइए जनाब.

 

सरकार अपनी और से प्रीमियम दे कितना रही है?

 

सरकार निजी बीमा कम्पनियों को इससे दोगुने से अधिक प्रीमियम अपनी और से देगी..यानि कम्पनी की जेब भरने के लिए अब भारत का आम आदमी पैसा देगा. हरियाणा में डेटा के अनुसार आठ सौ करोड़ से अधिक तो किसान भरेंगे प्रीमियम..सरकार भी  एक हजार करोड़ से अधिक देगी. ध्यान रहे पिछले वर्ष सरकार की ओर से केवल ग्यारह सौ करोड़ का मुआवजा बांटा गया…यानी जनता से आपने दोगुना से अधिक लेकर कम्पनियों को दे दिया.

 

चेक कैसे करेंगे नुकसान?

ड्रोन, मोबाइल फोटो जैसे बेतुके तरीके से एवं पटवारियों से चेक करवाने के बेहद भ्रष्ट तरीके को ही आगे बढाया गया है. फसल की क्वालिटी/खर्चा आदि इससे कैसे पता चलेगा? किसी को नहीं मालूम।

 

अन्य दिक्कत

चलो बहुत लिख लिया; अब और आगे बढ़ते हैं. यदि आपने फसल काट दी और खेत में छोड़ दी या मंडी ले गये और उसके बाद आपकी फसल खराब हुई तो सरकार आपको एक धेला नहीं देगी. शर्तों के अनुसार फसल कटाई के बाद यदि उसे सुखाने के लिए बिछाया गया है और आप की वह फसल चौदह दिन के अन्दर अन्दर खराब होती है तो उस स्थिति में ही आपको मुआवजा दिया जायेगा. यानि निकालने के लिए, या मंडी में रखने के बाद या किसी और काम के लिए कटी फसल के खराब होने पर कम्पनी की जिम्मेदारी नहीं. हम फसल काट कर जब बाँध कर रख देते हैं तो उस परिस्थिति में फसल का बीमा नहीं मिलेगा.

 

आग, पशु आदि से नुकसान पर बीमा नहीं दिया जायेगा.

 

चूंकि एक यूनिट में नुकसान के बाद ही पैसा दिया जायेगा; अतः किसी एक खेत में नुकसान पर एक पैसा भी नहीं मिल पायेगा…या तो प्रतिशत के हिसाब से समस्त यूनिट में नुकसान हो.

ठेके पर खेती करने वाले किसान जो रिकोर्ड में अपना नाम दर्ज नहीं करते; उन्हें राशि नहीं मिल सकती.

समस्त ठेका केवल उन्हीं प्राइवेट कम्पनियों को दिया गया है जिनसे पहले भी क्लेम लेने में दिक्कत आई है..सरकारी कम्पनियों को शामिल क्यों नहीं किया गया?

 

यह बीमा पहले चल रही फसल सुरक्षा बीमा योजना से किस प्रकार अलग है?

भाई आपको विविध खेती का शौक है तो कृपया रुकें…एक यूनिट के अंदर एवरेज फसल की पैदावार को पैमाना रखा गया है…एवरेज में वहां बहुलता से बोई जाने वाली फसल को ही रखा जायेगा. महंगी फसल अथवा अलग प्रकार की फसल बोने पर झटके के लिए आप तैयार रहें.

 

RS Dhull

(लेखक – रविंद्र सिंह ढुल द रिबिल इंडियन के मुख्य संपादक और इनेलो प्रवक्ता हैं वे पेशे से पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में वकालत भी करते हैं। प्रस्तुत लेख में दिये गये विचार उनके निजी विचार हैं।)

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