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मलमास और रमज़ान की एकसाथ शुरुआत गज़ब का संयोग

May 17, 2018 2:22 am by: Category: तीज त्यौहार Leave a comment A+ / A-

16 मई की तारीख को धर्म-कर्म में आस्था रखने वाले नोट कर लें। यह बहुत ही शुभ तारीख है। यही वो दिन है जिस दिन हिंदूओं के लिये अधिकमास जिसे मलमास और पुरुषोतम मास कहा जाता है की शुरुआत हुई तो रमदान का महीना भी इस दिन से शुरु हो चुका है। दोनों मास में एक समानता यह है कि इन दिनों में दोनों धर्मों के लोग अपने-अपने धर्म की मान्यताओं के अनुसार पूजा-पाठ, खुदा की इबाबत करते हैं।

अधिक मास की कहानी क्या है?

अधिक मास वैसे तो स्वयं अपने नाम से ही अपनी कहानी को बयां कर रहा है कि यह अधिकता वाला मास है यानि हिंदू पंचांग का तेरहवां महीना, जैसे अंग्रेजी कलैंडर में हर चार साल बाद एक साल लीप वर्ष यानि सामान्य वर्ष से एक दिन अधिकता वाला होता है वैसे ही हिंदू पंचांग में लगभग हर तीन साल में एक माह का समय अतिरिक्त हो जाता है जिसे पाटने के लिये अधिक मास की कल्पना की गई।

दरअसल हिंदू पंचांग सौर और चंद्र वर्ष पर आधारित है। सौर वर्ष लगभग अंग्रेजी कैलेंडर बराबर दिन वाला होता है हालांकि इसके महीने सूर्य की संक्रांति के साथ शुरु होते हैं जो कि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार लगभग 14 या 15 तारीख को होती है। वहीं चंद्र मास में दिनों की संख्या कम होती है। संख्या का यह अंतर बढ़ते बढ़ते तीन साल में लगभग एक चंद्र माह के बराबर हो जाता है। सौर कैलेंडर के अनुसार तालमेल बनाए रखने के हिसाब से ही अधिक मास की कल्पना की गई।

वैसे इसकी पौराणिक कहानी हिरण्यकश्यप के वध से जुड़ी बताते हैं। क्योंकि उसने ब्रह्मा की भक्ति कर उनसे अमरता का वरदान मांगा ब्रह्मा जी अमरता का वरदान देने से साफ मना कर गये फिर हरिण्यकश्यप ने यह वरदान मांगा कि 12 महीने के किसी भी दिन या रात, बाहर या भीतर मनुष्य जानवर कोई भी उसे मार न पाये। इसके लिये ब्रह्मा जी मान गये। वरदान पाकर वह खुद को भगवान समझने लगा तो फिर पुरुषोतम भगवान विष्णु ने उसकी वाट लगाने के लिये नरसिंह का अवतार लेकर उसे मार डाला। कहते हैं इसी के लिये इस तेरहवें माह की संरचना हुई थी। हिंदूओं में प्रत्येक माह का कोई न कोई देवता निर्धारित है। ऐसे में अधिक मास का देवता कौन हो तो इसके लिये भी कहते हैं देवताओं ने अपने हाथ खड़े कर दिये तो फिर यह माह विष्णु के खाते में चला गया इसी कारण इसका नाम पुरुषोतम मास भी पड़ा।

रमजान या रमदान कब से कब तक है

रमजान या रमदान का महीना एक पावन महीना माना जाता है जिसमें ईस्लाम धर्म को मानने वाले रोज़े रखते हैं। रोज़े हिंदूओं के उपवास का ही एक रूप हैं। जिस तरह निर्जला एकादशी का उपवास काफी कठोर होता है वैसे ही रोज़े रखना भी कड़ी तपस्या है। मकसद अल्लाह की इबादत करना है। 16 मई से लेकर 14 जून तक रोज़े चलेंगें। इसके पश्चात 15 जून को ईद का मुबारक त्यौहार मनाया जायेगा।

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