Tuesday , 24 October 2017

Home » खबर खास » किस-किस तरह के हमले झेलते हैं नेताजी

किस-किस तरह के हमले झेलते हैं नेताजी

October 18, 2016 10:48 am by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

rajkumar-saini

खादी और नेताजी कभी समाज में बहुत आदर भाव से देखे जाते थे। जहां जाते, बच्चे स्वागत् में खड़े मिलते, फूलों की वर्षा होती, लाल कालीन पर चल कर मुस्कुराते हुए मंच तक पहुंचते। कितने सुंदर, मनोरम और मनभावन दृश्य हुआ करते थे। अखबारों में दूसरे दिन फोटो छपते। सब तरफ, वाह जी वाह होती। अब जमाना बदला, सब कुछ बदल गया। बच्चे तो स्वागत् गीत गाकर निकल लेते हैं। प्लास्टिक के नकली फूलों से स्वागत् होता है और फिर समारोह पूरा होने तक नेताजी व आयोजकों की जान सांसत में आई रहीत है कि कोई अनहोनी न घट जाए। 

 

अब देखिए कुरुक्षेत्र में ऐसा ही हुआ। महाराजा अजमीगढ़ जयंती समारोह में भाग लेकर भाजपा सांसद राजकुमार सैनी बस निकलने ही वाले थे, सब कुछ ठीक-ठाक निपट गया था कि चार-पांच युवक उनके पास एक सेल्फी लेने का आग्रह करने लगे। अब नेताजी को सेल्फी से क्या एतराज हो सकता था भला। सेल्फी तो सुरक्षा को धत्ता दिखाने की चाल थी। युवकों ने सांसद सैनी पर न केवल स्याही फेंकी बल्कि धक्का-मुक्की करके नीचे गिरा दिया, जिससे उनकी पगड़ी भी सिर से छिटक कर दूर जा गिरी। बाद में चार युवक काबू कर लिए और पता चला कि इन्होंने पर्चे भी फेंके, जिनमें लिखा था- किसान बचाओ, देश बचाओ। दूसरे में लिखा था- नौजवानों से दो बातें। ये लोग आजाद किसान मिशन व भारतीय किसान ब्रिगेड का संगठन बनाकर ऐसी हरकत जात-पात का सबक सिखाने की बात कह रहे हैं। अब सांसद सैनी ने जवाब में इसे जाति विशेष का सुनियोजित षड्यंत्र बताया। आगे से कोई नेता सेल्फी लेने वालों से सावधान रहेगा। यह भी तो एक प्रकार से सर्जिकल स्ट्राइक ही हो गयी न। 

 

एक तरफ कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़़ को कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर की दिल्ली में हुई पिटाई का दर्द सता हा है और वे कह रहे हैं कि कांग्रेसी संतुलन खो चुके हैं और अपने ही दलित अध्यक्ष को पीट रहे हैं। दूसरी ओर सांसद राजकुमार सैनी जब जाति विशेष के आरक्षण पर सवाल उठाते हैं तो कोई जवाब नहीं सूझता और उनके साथ इस तरह हुई धक्का-मुक्की पर कोई खेद व्यक्त नहीं किया। दूसरी पार्टी का सब कुछ नजर आ रहा है, अपनी पार्टी का कुछ पता नहीं चलता। 

 

दूसरी ओर गुजरात के सूरत में भी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की रैली में उन्हें काले झंडे तो दिखाए ही गए बल्कि रैली में हंगामा भी किया गया। केजरीवाल पाटीदार आंदोलन का समर्थन करते हुए हार्दिक पटेल को देशभक्त बता रहे थे। उन्होंने भी भाजपा को इसका जिम्मेदार बताया। लोकतंत्र में बात कहने-रखने की स्वतंत्रता तो रहने दीजिए। पहले तो गुजरात में रैली करने को केजरीवाल को आयोजन स्थल नहीं दे रहे थे। फिर जब अदालत में याचिका डाली तब जाकर रैली के लिए जगह दी गई। फिर यह काले झंडे दिखाए व हंगामा किया। केजरीवाल को तो ऑटो चालक ने दिल्ली में थप्पड़ ही जड़ दिया था। जूता फेंका गया प्रैस कांफ्रेंस में, स्याही फेंकी, कागज फेंके भावना अरोड़ा ने। क्या-क्या नहीं सहते केजरीवाल? चूडिय़ां पहनाने का प्रदर्शन, काले झंडे दिखाना तो आम स्वागत् में आने लगा है। जोरदार स्वागत् में स्याही फेंकना, जूता-चप्पल फेंकना और धक्का मुक्की, थप्पड़ तक लगा देना शामिल है।

 

पर यह स्वस्थ लोकतंत्र की निशानी नहीं है। स्वस्थ राजनीति के लिए सहनशीलता से दूसरे पक्ष की बात सुनना जरूरी है। अब तो हालत यह हो गई है कि कई राज्यों में अच्छे-भले विधानसभा में गए विधायक हंगामे के बाद या तो मार्शलों द्वारा निकाले जाते हैं या फिर कंधों पर अस्पताल पहुंचाए जाते हैं। दूसरी पार्टियों से लोहा लेने की बजाय अपनी ही पार्टी में लट्ठम लट्ठ होने लगते हैं। हालत यह हो गई है कि कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी सांसद दीपेंद्र हुड्डा से कह रही है कि अपने क्षेत्र रोहतक तक सीमित रहो, भिवानी-चरखी दादरी की चिंता छोड़ो। वाह…।

 

अंत में एक गाने की पंक्तियां…

आते-जाते हुए मैं सब पे नजर रखता हूं,

नाम अब्दुल है मेरा, सबकी खबर रखता हूं।  

लेखक परिचय

kamlesh-bhartiya

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर ।

उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहायस हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

किस-किस तरह के हमले झेलते हैं नेताजी Reviewed by on . खादी और नेताजी कभी समाज में बहुत आदर भाव से देखे जाते थे। जहां जाते, बच्चे स्वागत् में खड़े मिलते, फूलों की वर्षा होती, लाल कालीन पर चल कर मुस्कुराते हुए मंच तक खादी और नेताजी कभी समाज में बहुत आदर भाव से देखे जाते थे। जहां जाते, बच्चे स्वागत् में खड़े मिलते, फूलों की वर्षा होती, लाल कालीन पर चल कर मुस्कुराते हुए मंच तक Rating: 0

Leave a Comment

scroll to top