Thursday , 19 October 2017

Home » खबर खास » STUDENT AGAINST ABVP: आप व्यक्ति को मार सकते हैं विचार को नहीं

STUDENT AGAINST ABVP: आप व्यक्ति को मार सकते हैं विचार को नहीं

You Can Kill A Man, But You Can't Kill An idea - Medgar Evers

February 28, 2017 10:37 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।

 देखना है ज़ोर कितना, बाज़ुकातिल में है?

                     –बिस्मिल

आज हमारा देश बड़े ही नाजुक दौर से गुजर रहा है। केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण देश गर्त में गिरता जा रहा है। जब देश के प्रगतिशील पत्रकार, छात्र, अध्यापक, मजदूर-किसान इन नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं तो सत्ता की पोलिस और फासिस्ट हिंदुत्ववादी ताकते आवाज को दबाने के लिए दमन का रास्ता अपना रही है। फासिस्ट ताकते शिक्षण संस्थानों में उठने वाली प्रत्येक उस आवाज को ख़ामोश कर देना चाहती है जो उनके कुकर्मो के खिलाफ उठ रही है। इन धार्मिक आंतकवादियो के हाथ और मुँह महात्मा गांधी से लेकर डॉ डाबोलकर, का० पनसारे, प्रो. कलबुर्गी, अख़लाक़, रोहित वेमूला व् कितने ही कलाकारों, लेखकों के खून से सने हुए है।

आज सत्ता में बैठे अंधराष्ट्रवादी व् उनके अंध समर्थक बार-बार प्रगतिशील पत्रकारों, बुद्विजीवियों, लेखको, वज्ञानीको, साहित्यकारों, फिल्मकारों और कम्युनिस्टो पर उनके प्रगतिशील विचारो के कारण हमला कर रहे है,  उनको पाकिस्तान भेजने की धमकी दे रहे है। आज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छिनी जा रही है। इनके द्वारा अपरहण JNU छात्र नजीब का आज तक लापता है। देशभक्ति का लबादा ओढे इन धार्मिक आंतकवादियो के चेहरे से छदम देशभक्ति का नकाब उतारा जाये और इसलिये आज ये बहस भी जरूरी बनती है की ये देश क्या उन धार्मिक आंतकवादियो का है जिन्होंने सदा मेहनतकश जनता के साथ गद्दारी की या ये जमीन उन मेहनतकश इंसानों की है जिन्होंने अपने खून से इस मिटटी को सींचा है। इसलिए सवाल ये है की ये देश है किसका…..

ये देश न हिन्दुओ का है, न सिखों का है और न ही मुस्लिम, बौद्ध और जैनियो का है। ये देश उन सभी मेहनतकश इंसानो का है जो अपनी मेहनत के बूते इस देश को यहाँ तक लेकर आये है। ये देश उन महान क्रांतिकारी इंसानो का है जिन्होंने 1857 की क्रांति से बहुत पहले से ही अंग्रेज सरकार और सामन्ती राजाओ के खिलाफ आजादी के लिए जंग लड़ी। देश को साम्राज्यवादी अंग्रेज सरकार से आजाद करवाने के लीये 1857 की महान क्रांतिकारी लड़ाई से देश की स्वंतन्त्रता 15 अगस्त 1947  तक जिन महान क्रान्तिकारियो ने कुर्बानियां दी।  इस लड़ाई में लाखो इंसानो ने अपनी जान कुर्बान की व् लाखो क्रान्तिकारियो ने जेल की यातनाये सही और 1947 के बाद भी तेलंगाना, तेभागा, वारली, नक्सबाड़ी से लेकर बिहार, छत्तीसग़ढ, झारखंड, आंध्रा के वो महान क्रांतिकारी जिन्होंने जल, जंगल और जमीन के लिए भारत के काले अंग्रेजो से लड़ते हुए अपनी जान कुर्बान की और जो आज भी मजबूती से काले और गोरे अंग्रेजो के खिलाफ लड़ रहे है।

इस आजादी की लड़ाई में थोड़ा और पीछे जाये तो आपको महान शिक्षक शम्भूक मिलेगा जो संसार की सबसे बड़ी लड़ाई उन मेहनतकश इंसानो के लिए लड़ रहा है जो मानव जाति का सबसे बड़ा और सबसे मेहनतकश तबका है। लेकिन शिक्षित न होने के कारण वो लुटेरे ब्राह्मण, क्षेत्रीय और वैश्य की लुटेरी सत्ता के गुलाम बना हुआ है। आजादी के लिए शिक्षा जरूरी है और शिक्षा हासिल करने के लिए उस सत्ता के खिलाफ लड़ रहा है महान क्रांतिकारी शुद्र ऋषि शम्भूक। लेकिन उस समय के महान छलकपटी निरंकुश राजा राम ने शम्भूक् का धर्म की आड़ लेकर कत्ल कर दिया। लेकिन वो आजादी की चिंगारी कभी बुझी नही लुटेरी सत्ता के खिलाफ मेहनतकश इंसान ने लड़ाई जारी रखी।

आगे आपको मिलेगा खून से लथपथ महान धनुषधरएकलव्य जिसका अंगूठा  सत्ता के महान राजकुमारो और उनके शिक्षक द्रोण ने सिर्फ इसलिए काट लिया क्योकि वो शुद्र है और उनका धार्मिक कानून शुद्र को शिक्षा हासिल करने का अधिकार नही देता है। उसने उनके मानवता विरोधी कानून को तोड़ा तो उसको ये सजा मिली।

थोड़ा सा और आगे आओगे तो आपको चार्वाहक, महात्मा बुद्ध, गुरु नानक, रविदास, कबीर, दादू, मीरा और सूफी सन्त मिलेंगे जो धार्मिक अन्धविश्वाश के खिलाफ, अन्याय के खिलाफ और मानवता की समानता के लिए लड़ रहे है।

लेकिन 1857 की लड़ाई में जब अंग्रेज सरकार ने सभी धर्मो के इंसानो को देश के लिए अंग्रेज सरकार के खिलाफ लड़ते देखा तो अंग्रेजो ने भारत के आवाम की ताकत को तोड़ने के लिए फुट डालो और राज करो की निति का उपयोग किया।

उसी निति के तहत अंग्रेजो ने धार्मिक लोगों को हवा देनी शुरू कर दी इसके बाद ही आगे चलकर फासिस्ट हिंदुत्ववादी और मुस्लिमवादी धार्मिक संघठनो का गठन हुआ। इन धार्मिक संगठनो का काम ही आजादी के आंदोलन को तोड़ना और मेहनतकश किसान मजदूर का ध्यान उसकी मुख्य लड़ाई से भटका कर धर्म के नाम पर उलझाये रखना था जो आज भी बैखुबी ये धार्मिक संगठन अपना ये काम कर रहे है।

आज भी साम्राज्यवादी देश अपनी लूट को जारी रखने के लिए फुट डालोराज करो की निति अपना रहे है। इराक, अफगानिस्तान, सीरिया, लीबिया, पाकिस्तान जैसे देशो की प्राकृतिक धन सम्पदा को लूटने के लिए पूंजीवादी देश इन देशो में धर्म के नाम पर झगड़े कराये हुए है ताकि आम जनता उनकी लूट पर बात करने की बजाए आपस में ही लड़ती रहे। उसी निति के तहत साम्राज्यवादी देश और भारत की सता भी भारत में काम कर रहे है। आज भारत की सत्ता चाहती है की देश की जनता धर्म-जात के नाम पर आपस में लड़ मरे और उनकी लूट जारी  रहे। आज देश का किसान आत्महत्या कर रहा है। मजदूर बहुत ही बुरे हालात में जी रहा है।  शिक्षा-स्वास्थ्य को सरकार सार्वजनिक से पूंजीपतियों के हवाले कर रही है ताकि वो अपनी मनमर्जी लूट मचा सके।

भारत की सत्ता देश की जल जंगल और जमीन को आम जनता से छिन कर बड़े-बड़े कारपोरेट घरानों को दे रही है। विदेशी बहूराष्ट्र कम्पनियों को देश के प्राकृतिक संसाधनो का दोहन करने की खुली छुट दी जा रही है। इस लूट के खिलाफ लड़ने वाले आदिवासियों को माओवादी बताकर जेल में डाला जा रहा है, उनको फर्जी मुठभेड़ में मारा जा रहा है और इस लूट के खिलाफ लिखने वाले प्रगतिशील बुद्विजीवियों, पत्रकारों पर सत्ता फर्जी मुकदमे बना रही है। धार्मिक आंतकवादियो द्वारा बुद्विजीवियों का कत्ल किया जा रहा है।

इस लूट पर लोगो का ध्यान ही न जाये इसके लिए सत्ता और सत्ता से जुड़े हजारो जातीय व् धार्मिक संगठन देश में वो ही निति फुट डालो राज करो पर काम कर रही है।

इसी रणनीति के तहत ये धार्मिक संगठन लव जेहाद, घर वापिसी, बीफ, अयोध्या में मन्दिर निर्माण, रोमियो स्क्वाड और आरक्षण जैसे छद्दम मुद्दों पर लोगो को आपस में लड़ा रहे है। इस छद्दम लड़ाई में हिंदुत्व वादी व् मुस्लिमवादी और स्वर्ण, दलित व् पिछड़ी जातीय संगठन आपस में खाद – पानी एक दूसरे को देने का काम कर रहे है।

लेकिन देश की मेहनतकश व् प्रगतिशील जनता जात, धर्म, इलाका के नाम पर बाँटने वाली इन ताकतों को मुँह तोड़ जवाब देगी और मानवता की आजादी के लिए लड़े उन असंख्यक क्रान्तिकारियो के सपनो को मंजिल तक लेकर जायेगी। ये देश न हिंदुत्वादीयों न मुस्लिमवादीयों का है। मेरे मेहनतकश साथियों ये देश ही नही ये पूरी दुनियां तुम्हारी है। इसलिए इकठ्ठा होकर इन फासिस्ट ताकतों को मुँहतोड़ जवाब दो। आज मानवता, इंसानियत को बचाने के लिए इस जहरीले सांप का फन को कुचलना जरूरी है।

इसी के साथ मेरा आप सभी को क्रांतिकारी सलाम।।

फासिस्ट धार्मिक आंतकवादियो…….

You Can Kill A Man, But You Can’t Kill An idea -Medgar Evers 

इंकलाब जिंदाबाद

#STUDENTSAGAINSTABVP

uday-che

लेखक परिचय

उदय चे स्वतंत्र लेखक हैं एवं सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं। दलित एवं पीड़ितों के हक की आवाज़ के लिये अपने संगठन के माध्यम से उठाते रहते हैं। उदय चे हिसार के हांसी में रहते हैं।

(नोट: आलेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं। जिन्हें ज्यों का त्यों यहां प्रस्तुत किया गया है। आलेख में व्यक्त किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति हरियाणा खास उत्तरदायी नहीं है)

STUDENT AGAINST ABVP: आप व्यक्ति को मार सकते हैं विचार को नहीं Reviewed by on . सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।  देखना है ज़ोर कितना, बाज़ु-ए-कातिल में है?                      -बिस्मिल आज हमारा देश बड़े ही नाजुक दौर से गुजर रहा है। सरफ़रोशी की तमन्ना, अब हमारे दिल में है।  देखना है ज़ोर कितना, बाज़ु-ए-कातिल में है?                      -बिस्मिल आज हमारा देश बड़े ही नाजुक दौर से गुजर रहा है। Rating: 0

Leave a Comment

scroll to top