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यह कैसा सुर फूटा चौरसिया की बांसुरी से?

खिलाड़ियों को भारत रत्न देने पर बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया ने जताई आपत्ति

May 7, 2017 3:19 pm by: Category: खबर खास Leave a comment A+ / A-

पंडित हरिप्रसाद चौरसिया देश-विदेश में बांसुरी वादक के तौर पर और मुंबई की फिल्मनगरी में शिव हरि की संगीतकार जोड़ी के रूप में जाने जाते हैं। वे किशोरी अमानेकर की याद में आयोजित संगीत संध्या में जयपुर पहुंचे थे। मीडिया से बातचीत करते हुए उनके मुंह से ऐसे सुर फूटे कि मीडिया के लोग भी चौंक गए। बांसुरी वादक ने कड़वे बोल बोलते हुए कहा कि खेल से जुड़े बच्चों को भारत रत्न देकर इसकी गरिमा घटा दी गई। जब मीडिया कर्मियों ने कहा कि वे सचिन तेंदुलकर के बारे में कह रहे हैं, तो वे न केवल मुस्कराए बल्कि चुप्पी भी साध ली। उन्होंने यह भी कहा कि यह सम्मान कम उम्र के लोगों को दिए जाने की बजाय कठिन तपस्या कर भारतीय संस्कृति के मूल्यों को कायम रखने वाले उम्रदराज लोगों को दिया जाना चाहिए।
हरिप्रसाद चौरसिया ने नाम लिया या नहीं पर यह संकेत क्रिकेट के भगवान माने जाने वाले सचिन तेंदुलकर की ओर ही था। सचिन तेंदुलकर की राज्यसभा के सदन में उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठते रहते हैं। पर यहां राज्यसभा की सदस्यता से भी महत्वपूर्ण सवाल भारत रत्न व अन्य सम्मानों को लेकर है। याद हो कि पिछेल वर्ष ऋषि कपूर ने भी अपना चाचा शम्मी कपूर और शशि कपूर को सम्मान न मिलने पर गुस्सा एक ट्वीट पर निकाला था। उन्होंने ट्वीट किया था कि हर एयरपोर्ट, शिक्षण संस्थान, सड़क सबका नाम एक ही परिवार के नाम पर क्यों? क्या बाप का माल समझ रखा है? बाद में ऋषि कपूर ने कहा था कि मेरे योगदान को तो छोडि़ए शम्मी कपूर और शशि कपूर तक को सम्मान के योग्य नहीं समझा गया। खैर शशिकपूर को तो सम्मानित कर दिया गया पर सवाल वहीं के वहीं है कि सम्मान पर विवाद क्यों होता है? सम्मान देने का पैमाना, नियम, शर्तें क्या हैं? अक्षय कुमार को इस वर्ष श्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। तब उन्होंने भी ट्वीट किया कि मेरी पत्नी टिंवक्ल कहती हैं कि कोई इनाम-विनाम तो मिलना नहीं, फिर अवॉर्ड समारोह में क्यों जाते हो? चलो, अब मिल ही गया। यह उसी के नाम।
चाहे यह मजाकिया लहजे में कही गई बात हो, लेकिन कितना दर्द लिए हुए हैं। ऋषि कपूर ने तो यह भी लिखा था कि उनसे एक अवॉर्ड के देने के एवज में 11 हजार रुपए मांग लिए गए थे। यानी अवॉर्ड के पीछे पैसों का लेन-देन भी होता है। ये सम्मान कहीं सामान बनकर ही रह जाते हैं। बताइए, फिल्म इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर बनाए जाने पर भी लंबा विरोध चला। शायद विरोध में ही गजेंद्र चौहान का समय निकल जाए।
भारत रत्न देश का सर्वोच्च सम्मान है। यह भी सही है कि पहली बार किसी खेल की हस्ती को दिया गया। चौरसिया ने इस पर सवाल उठा कर खेल की हस्तियों के योगदान कम करके ही आंका है। जब साक्षी मलिक, पीवी सिंधू को ओलंपिक में पदक मिले, तब सारा देश गर्व से झूमने लगा, वैसे ही जैसे पंडित चौरसिया के बांसुरी वादन के समय झूमता है। सचिन के ऊपर सवाल उठाकर चौरसिया ने अपनी संगीत की दुनिया के लोगों की ओर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है। पर सुर ठीक से नहीं लगाया, बेसुरा रह गया।

लेखक परिचय

kamlesh-bhartiya

लेखक कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रंथ अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं। इससे पहले खटकड़ कलां में शहीद भगतसिंह की स्मृति में खोले सीनियर सेकेंडरी स्कूल में ग्यारह साल तक हिंदी अध्यापन एवं कार्यकारी प्राचार्य।  फिर चंडीगढ से प्रकाशित दैनिक ट्रिब्यून समाचारपत्र में उपसंपादक,  इसके बाद हिसार में प्रिंसिपल रिपोर्टर ।उसके बाद नवगठित हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष बने। कथा समय मासिक पत्रिका का संपादन। मूल रूप से पंजाब के नवांशहर दोआबा से, लेकिन फिलहाल रिहायस हिसार में। हिंदी में स्वतंत्र लेखन । दस संकलन प्रकाशित एवं एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री पुरस्कार।

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